फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   Varanasi News Vijnana Bharati Convention Ambekar urges youth foster scientific awareness conduct research inte

Varanasi News: विज्ञान भारती का अधिवेशन, आंबेकर बोले- साइंस के प्रति जागरूकता व देश हित में अनुसंधान करे युवा

Sun, 14 Jun 2026 02:45 PM IST
Aman Vishwakarma अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: Aman Vishwakarma Updated Sun, 14 Jun 2026 02:45 PM IST
सार

वाराणसी में आयोजित विज्ञान भारती के अधिवेशन में वक्ताओं ने युवाओं से विज्ञान के प्रति जागरूक होकर देशहित में अनुसंधान करने का आह्वान किया। कार्यक्रम में वन हेल्थ और विकसित भारत के लिए नेट जीरो जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विशेषज्ञों ने मंथन किया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री Yogi Adityanath भी उपस्थित रहे।

विज्ञापन
Varanasi News Vijnana Bharati Convention Ambekar urges youth foster scientific awareness conduct research inte
अधिवेशन में सीएम योगी को मिला सम्मान। - फोटो : संवाद

विस्तार

बीएचयू के स्वतंत्रता भवन में आयोजित विज्ञान भारती के अधिवेशन के उद्घाटन के बाद विभिन्न सत्रों में वक्ताओं ने अलग-अलग विषयों पर मंथन किया। उद्घाटन समारोह में आरएसएस के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने कहा कि विज्ञान के प्रति जागरूकता बहुत जरूरी है। साथ ही नई पीढ़ी को देश और समाज हित में अनुसंधान करने की दिशा में प्रयास जारी रखना होगा।

विज्ञापन


अधिवेशन में सुनील आंबेकर ने कहा कि इस अधिवेशन के माध्यम से यह संकल्प लेना होगा कि सामान्य जन के जीवन में विज्ञान के प्रति जागरूकता का अभाव है, उसे दूर करना बहुत लाभकारी होगा। भारत एक सनातन और पुरातन राष्ट्र है। जीवन के हर क्षेत्र में समग्रता से विचार करते हुए केवल मनुष्य ही नहीं, संपूर्ण सृष्टि के कल्याण के लिए यहां सतत चिंतन का प्रयास हुआ है। 
विज्ञापन


इसलिए जीवन का कोई भी शास्त्र या विषय अछूता नहीं रहा है। उन सभी विषयों में तर्क और सत्य के आधार पर साधना एवं समीक्षा करते हुए ही हमारे देश में परंपराओं और कार्यों का विकास हुआ। स्वाभाविक विज्ञान की जो दृष्टि है, वह स्वाभाविक रूप से सभी कार्यों में रही है। 

विज्ञापन
विज्ञापन

सुनील आंबेकर ने कहा कि बीच के समय में भारत की परिस्थितियां बदलीं और इन क्षेत्रों में अनुसंधान व ज्ञान की परंपरा कुछ हद तक बाधित भी हुई। आधुनिक विज्ञान की आधुनिक दृष्टि में मनुष्य और सृष्टि के कल्याण की अपेक्षाकृत कम चिंता होने तथा इसके एकतरफा प्रभाव के कारण आज अनेक समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं। भारत के विज्ञान की ऐसी दृष्टि, जो पर्यावरण और मनुष्य कल्याण की बात सोचती है, उसे लागू करना होगा। इसी उद्देश्य से विज्ञान भारती कार्य कर रही है। 

राष्ट्रीय अधिवेशन में देशभर से आए वैज्ञानिकों, नीति-निर्माताओं, शिक्षाविदों एवं विशेषज्ञों ने राष्ट्रीय महत्व से जुड़े विषयों पर चर्चा की। ‘संकल्प : विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार (एसटीआई) नीति एवं प्रस्तुति’, ‘वन हेल्थ’ और ‘विकसित भारत के लिए नेट जीरो’ जैसे विषयों पर बिंदुवार मंथन किया गया। उत्तराखंड प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. तृप्ता ठाकुर ने विकसित भारत के लिए नेट जीरो की अवधारणा को उपयोगी बताया। 

प्रमुख सचिव, ऊर्जा, नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा विभाग, मनु श्रीवास्तव ने कहा कि सौर ऊर्जा अब पर्यावरणीय दृष्टि से टिकाऊ होने के साथ-साथ आर्थिक रूप से भी व्यवहार्य विकल्प बन चुकी है। यूजीसी के पूर्व चेयरमैन प्रो. डीपी सिंह ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र के 17 सतत विकास लक्ष्यों में से सात सीधे तौर पर पर्यावरण से संबंधित हैं। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 में सतत विकास और उत्तरदायी नागरिकता पर दिए गए विशेष बल का उल्लेख करते हुए काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के पर्यावरण एवं सतत विकास संस्थान को अन्य संस्थानों के लिए अनुकरणीय मॉडल बताया।

बीएचयू ट्रॉमा सेंटर प्रभारी प्रो. सौरभ सिंह ने अस्पतालों में वन हेल्थ दृष्टिकोण के क्रियान्वयन से जुड़ी चुनौतियों पर चर्चा की। उन्होंने मानक संचालन प्रक्रियाओं, अधोसंरचना तथा वेंटिलेशन प्रणालियों में मौजूद कमियों की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए गहन चिकित्सा इकाइयों के लिए भारत-विशिष्ट वायु गुणवत्ता मानकों की आवश्यकता पर बल दिया। इंदिरा गांधी परमाणु अनुसंधान केंद्र के पूर्व निदेशक डॉ. बी. वेंकटरमण ने नेट जीरो लक्ष्य की प्राप्ति में नाभिकीय ऊर्जा की महत्वपूर्ण भूमिका पर चर्चा की। 

वहीं, भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र के समूह निदेशक डॉ. महेश सुधाकर देशपांडे ने डी-कार्बोनाइजेशन के लिए हाइड्रोजन को एक स्वच्छ ऊर्जा विकल्प बताया। सत्र का संचालन डॉ. मनोज नेसारी ने किया। इस दौरान राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग के पूर्व निदेशक डॉ. बीएन गंगाधर, दक्कन विश्वविद्यालय के कुलाधिपति डॉ. भूषण पटवर्धन, डॉ. रंजना अग्रवाल, प्रो. अविनाश चन्द्र पाण्डेय सहित अन्य लोग मौजूद रहे।

विकसित भारत के लिए समावेशी दृष्टि जरूरी
नीति आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष डॉ. राजीव कुमार ने कहा कि यह अधिवेशन भारत में विज्ञान के पुनर्जागरण का आधार बनेगा। उन्होंने स्वतंत्रता के बाद भारत की विकास यात्रा और समकालीन विश्व को प्रभावित कर रहे प्रमुख परिवर्तनों की चर्चा की। उन्होंने कहा कि विकसित भारत के लिए एक स्पष्ट और समावेशी दृष्टि की आवश्यकता है। विकास का लाभ समाज के सभी वर्गों तक पहुंचना चाहिए, विशेषकर आबादी के सबसे निचले 10 प्रतिशत हिस्से तक। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed