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Varanasi News: काशी विश्वनाथ धाम में राम दरबार की स्थापना, रामायण महायज्ञ शुरू; नाै दिनों तक कथा

Tue, 28 Oct 2025 03:49 PM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: अमन विश्वकर्मा Updated Tue, 28 Oct 2025 03:49 PM IST
सार

श्रीराम कपूरिया व्यास द्वारा 111 भूदेव के साथ सामूहिक रामचरितमानस का पाठ पढ़ा गया। यजमान परिवार की तरफ से सभी ब्राह्मणों को फल व दक्षिणा देकर आशीर्वाद प्राप्त किया। शाम को प्रवचन हुआ। 

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Varanasi News Ram Darbar established at Kashi Vishwanath Dham Ramayana Mahayagna begins
शोभायात्रा में शामिल श्रद्धालु। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

श्री रामचरितमानस नवाह्न पाठ महायज्ञ समिति की ओर से नौ दिवसीय रामायण महायज्ञ का शुभारंभ हुआ। श्री काशी विश्वनाथ मंदिर कॉरिडोर के सरस्वती फाटक गेट नंबर दो के पास सुबह नौ बजे 111 ब्राह्मणों ने संकल्प कर पूजा और हवन के साथ महायज्ञ के लिए राम दरबार मूर्ति स्थापना कराई। 70 वर्षों से बाबा विश्वनाथ को रामायण सुनाने की परंपरा के अनुसार अनुष्ठान शुरू हुआ।

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मुख्य यजमान अशोक अग्रवाल, मुख्य अतिथि सीआरपीएफ कमांडेंट राजेश्वर बालापुरकर, अध्यक्ष कौशल शर्मा, योगीराज विजय कुमार मिश्रा, मनीष मोरोलिया, प्रचार मंत्री सुरेश तुलस्यान ने संयुक्त रूप से राम दरबार की पूजा अर्चना कर महायज्ञ का शुभारंभ किया। 
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श्री रामचरितमानस नवाह्न पाठ महायज्ञ समिति के अध्यक्ष कौशल शर्मा ने बताया कि यह महायज्ञ विगत 70 साल से श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में कार्तिक पूर्णिमा के छठ से शुरू होकर कार्तिक पूर्णिमा देव दीपावली तक होता है। 

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70 साल से श्री काशी विश्वनाथ को रामायण का पाठ सुनाया जाता है और जगह-जगह से लोग अपने परिवार के नाम से श्री रामचरितमानस पाठ अपने परिवार के नाम से यहां कराते हैं। राम जी को छप्पन भोग लगाया जाता है। विदाई शोभायात्रा के रूप में की जाती है। स्वागत राजकुमार कोठारी, अशोक कोठारी, रघुदेव अग्रवाल, विश्वनाथ पोद्दार, महेंद्र शर्मा ने किया।

धाम में पूजे गए शिव के पुत्र कार्तिकेय : कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि पर श्री काशी विश्वनाथ धाम में भगवान शिव के पुत्र भगवान कार्तिकेय (स्कंद कुमार) की पूजा-अर्चना की गई। श्रद्धालुओं ने भगवान कार्तिकेय से परिवार, समाज और राष्ट्र की मंगलकामना की। बीते साल कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि (11 नवंबर 2024) को धाम में विशिष्ट आयोजन संपन्न हुए थे। 2024 से संकल्पित सनातन पर्वों को उत्सवपूर्वक मनाने की शुरूआत हुई थी। इसमें स्कंद षष्ठी को भी शामिल किया गया था। 

शिव पार्वती शांति कल्याणोत्सव की हुई पूजा
यज्ञो वै विष्णु: के तहत सोमवार को सोनारपुरा से श्री काशी विश्वनाथ मंदिर तक शोभायात्रा निकाली गई। शोभायात्रा में फूलों से सजे रथ पर देव विग्रहों को रखा गया था। दक्षिण भारत से आए कलाकार पारंपरिक लोकनृत्य करते हुए चल रहे थे। 

श्री काशी विश्वनाथ धाम के त्र्यंबकेश्वर हाॅल में वैदिक विद्वानों ने श्री शिव पार्वती शांति कल्याणोत्सव की विधि-विधान से पूजा की। सोमवार को श्री काशी विश्वनाथ मंदिर प्रांगण में नौ दिवसीय धार्मिक अनुष्ठान यज्ञो वै विष्णु: के तहत सोमवार को अनुष्ठान हुए। 

मुख्य आचार्य पंडित जगन्नाथ शास्त्री के नेतृत्व में सोनारपुरा से श्री काशी विश्वनाथ मंदिर गेट नंबर चार तक भव्य शोभायात्रा निकाली गई। शोभायात्रा में चिंतामणि गणेश मंदिर के महंत चल्ला सुब्बाराव, शृंगेरी मठ के प्रबंधक चल्ला अन्नपूर्णा प्रसाद, केदाररेश्वर महादेव मंदिर के मुख्य अर्चक धुलीपल्ला नारायण शास्त्री शामिल थे। 

चक्रवर्ती विजय नावड ने बताया कि तेलुगू वैभवम के अंतर्गत सांस्कृतिक कार्यक्रम में सुप्रसिद्ध शास्त्रीय संगीतज्ञ कलारत्न वेमुरी वेंकटविश्वनाथ का गायन हुआ। आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा की नृत्यांगना एस मीनाक्षी के कुचिपुड़ी नृत्य की प्रस्तुति दी। डॉ. बुलुसु अपर्णा द्विशतावधानी ने श्री महाकवि थिक्कनाचार्य की कृतियों पर आधारित भजन प्रस्तुत किया। सीईओ विश्वभूषण मिश्र ने शिवलिंगों की पूजा अर्चना की। 

सोमवासरीय रुद्राभिषेक का एक साल हुआ पूरा

श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास की ओर से संकल्पित सोमवासरीय रुद्राभिषेक के पावन अनुष्ठान का एक वर्ष पूर्ण हुआ। पिछले साल कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि से प्रारंभ होकर कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी (कार्तिक षष्ठी) तिथि तक प्रत्येक सोमवार को नियमित रूप से संपन्न किया गया। सोमवासरीय अभिषेक के एक वर्ष पूर्ण होने पर सोमवार को रुद्राभिषेक हुआ। वर्ष 2025 में 13 जनवरी (पौष पूर्णिमा) से इसकी शुरुआत हुई थी। 

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