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Varanasi News : मुक्ति देने के लिए काफी है काशी का नाम, बोले कथावाचक प्रदीप- पवित्र हृदय में विराजते हैं शिव

Wed, 20 Nov 2024 11:19 PM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: अमन विश्वकर्मा Updated Wed, 20 Nov 2024 11:19 PM IST
सार

Varanasi News : वाराणसी के श्री सतुआ बाबा गोशाला में आयोजित कथा के दाैरान भक्तगण दूरदराज से आए थे। शिवमहापुराण की कथा सुन भक्त विभोर हो गए। काशी की धरती पर हुई भगवान की लीलाओं का भी व्याख्यान किया गया।

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Varanasi News name of Kashi enough give salvation said storyteller Pradeep Shiva resides pure heart
कथावाचक प्रदीप मिश्र ने सुनाई कथा। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कथावाचक पं. प्रदीप मिश्र ने कहा कि सुगर, बीपी और खून नापने की मशीन आती है लेकिन भगवान के प्रति आपका कितना प्रेम है इसको नापने की कोई मशीन नहीं आती है। मन रूपी कुर्सी को साफ कर लीजिए, क्योंकि बाबा को बिठाना यहीं है। पार्वती ने शंकरजी से पूछा कि प्रभु आप असल में रहते कहां हैं।

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शिवजी ने जवाब दिया कि जो अपने मन को पवित्र करके मुझे दिल से निमंत्रण दे और दिल से एक लोटा जल समर्पित कर देता है मैं उसके हृदय में जाकर विराजमान हो जाता हूं। शिव को कहीं पर भी ढूंढ लो, शिव को पाने की कोई जगह है तो वह भक्त का हृदय है।
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वह बुधवार को श्री सतुआ बाबा गोशाला डोमरी में महामंडलेश्वर संतोष दास के सानिध्य में आयोजित सात दिवसीय शिव महापुराण कथा का श्रवण करा रहे थे। कथा के पहले दिन दो लाख से अधिक श्रद्धालु कथा श्रवण करने पहुंचे। 

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श्री सतुआ बाबा गोशाला डोमरी में जुटे लोग। - फोटो : अमर उजाला

भक्तों ने किया नमन
कथावाचक प्रदीप मिश्र ने काशी की महिमा का गुणगान करते हुए कहा कि शिवमहापुराण की कथा कहती है कि काशी का नाम ही मुक्ति देने वाला है। जब यमराज के दरबार में भगवान चित्रगुप्त महाराज जीव से पूछेंगे कि तुमने कौन सा पुण्य किया और अगर गलती से भी जीव के मुख से काशी शब्द निकल जाए तो वह यमदूतों से कहेंगे इसे कैलाश छोड़ आओ। कितनी बार सृष्टि समाप्त हुई लेकिन पूरे भूमंडल पर काशी एक ऐसी धरती है जो कभी समाप्त नहीं होती है। 

बाबा की नगरी में निवास है तो ना कहीं जाना है ना कहीं आना है। यहीं सब आएंगे। यह सभी का सौभाग्य है कि हम गंगा के किनारे शिवमहापुराण की कथा श्रवण कर रहे हैं। इससे तो यह निश्चित हो गया कि हम जन्म और मृत्यु के फेरे से मुक्त हो गए। 

पं. प्रदीप मिश्र ने कहा कि भगवान शिव पर चढ़ाया एक लोटा जल 33 कोटि देवी-देवताओं को समर्पित होता है। इसलिए प्रतिदिन एक लोटा जल भगवान शिव को अवश्य चढ़ाना चाहिए। यह एक लोटा जल आपकी सभी समस्या का हल है। शिवजी एक लोटा जल से हमारा कल बदल देंगे। ऐसा कोई मनुष्य नहीं जिसके सिर पर समस्या नहीं और ऐसी कोई समस्या नहीं जिसका हल एक लोटा जल ना हो। यह निश्चित है, भले ही इसमें थोड़ा समय लग सकता है। 

लोटे में जल भरकर हमेशा मुस्कुराते हुए मंदिर जाएं, चाहे कितनी भी परेशानी क्यों न हो, आपके चेहरे पर भगवान हमेशा के लिए मुस्कान दे देंगे। अपना संबंध शिव से जोड़ें। यह न समझें कि भगवान मेरी नहीं सुनते। वे सबकी सुनते हैं। काशी में हैं तो बाबा विश्वनाथ का दर्शन और नियमित सेवा का संकल्प आपका जीवन बदल सकता है। सभी सनातन धर्म को मानने वाले सेवकों के गले में रुद्राक्ष हो सभी के घर के मंदिर में रुद्राक्ष होना चाहिए। इस दौरान संजय केशरी, संदीप केशरी, नीरज केशरी समेत श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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