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Varanasi News: बुद्ध की जातक कथाएं सिर्फ मनोरंजन या यादें ही नहीं, पशुत्व को बुद्धत्व में बदलती हैं; जानकारी

Tue, 26 May 2026 02:46 PM IST
Aman Vishwakarma अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: Aman Vishwakarma Updated Tue, 26 May 2026 02:46 PM IST
सार

फाह्यान और ह्वेनसांग के यात्रा वृत्तांत को भारत की पहली ‘सॉफ्ट पावर’ बताया गया। वक्ताओं ने कहा कि बुद्ध की जातक कथाएं केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि पशुत्व को बुद्धत्व में बदलने का संदेश देती हैं। भारतीय साहित्य और संस्कृति ने दुनिया को बिना युद्ध और तलवार के प्रभावित किया है।

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Varanasi News Jataka Tales Buddha not merely sources of entertainment memories transform animality
आर्ट गैलेरी में विचार व्यक्त करते प्रोफेसर सदाफल। - फोटो : संवाद

विस्तार

Varanasi News: लंका स्थित क कला दीर्घा में भगवान गौतम बुद्ध की जातक कथाओं के मर्म पर मंथन किया गया। साखी शोधशाला और अंतरराष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान, लखनऊ की ओर से आयोजित कार्यक्रम में भरहुत, सांची और अजंता के पुरातात्विक साक्ष्यों को विद्यार्थियों के समक्ष प्रस्तुत किया गया।

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मुख्य वक्ता प्रो. सदानंद शाही ने कहा कि जातक कथाएं केवल मनोरंजन या अतीत की स्मृतियां नहीं हैं, बल्कि मनुष्य के अंदर सुप्त ‘पशुत्व’ को ‘बुद्धत्व’ में बदलने की प्रक्रिया हैं। ईसा पूर्व दूसरी शताब्दी के भरहुत और सांची स्तूपों पर ब्राह्मी लिपि में अंकित दृश्य और अजंता की गुफा संख्या-17 के भित्ति चित्र इस बात की गवाही देते हैं कि ये कथाएं सदियों से हमारी लोक चेतना का हिस्सा रही हैं। उन्होंने चीनी यात्रियों फाह्यान और ह्वेनसांग के यात्रा वृत्तांतों का उल्लेख करते हुए कहा कि साहित्य भारत का वह पहला ‘सॉफ्ट पावर’ था, जिसने पूरी दुनिया के लोकमानस को बिना तलवार के जीत लिया।
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विशिष्ट वक्ता प्रो. राम सुधार सिंह ने कहा कि जातक की हर गाथा और कथा अनूठी है। ‘कलिंग जातक’ और ‘कणवेर जातक’ का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि ये कथाएं पुनर्जन्म, कर्म सिद्धांत और मानव स्वभाव के द्वंद्व को बेहद सहजता से समझाती हैं। 

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हुई गंभीर चर्चा

उन्होंने कहा कि बुद्धत्व की सर्वोच्च अवस्था प्राप्त करने के लिए जीवन में जिन आदर्शों की आवश्यकता होती है, उनका बीजारोपण जातक कथाओं के माध्यम से होता है। आलोचक प्रो. अवधेश प्रधान ने कहा कि आत्मिक सुख की प्राप्ति केवल स्वयं के लिए नहीं, बल्कि समाज के सभी जीवों की मुक्ति और परोपकार में निहित है। 

बौद्ध दर्शन और सनातन परंपरा के संबंधों पर उन्होंने कहा कि आत्मिक सुख ही परम सत्य है और अपने साथ सभी की मुक्ति के लिए जीना ही ‘करुणा’ का मूल तत्व है। ‘महाकपि जातक’ का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि दूसरों के लिए अपना सब कुछ त्याग देना ही नेतृत्व का वास्तविक धर्म है।

बोधिसत्व धर्म की इसी करुणा ने आगे चलकर वैष्णव धर्म और भारतीय भक्ति आंदोलन को भी गहराई से प्रभावित किया। कार्यक्रम में बीएचयू के प्राचीन इतिहास, संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग के अध्यक्ष प्रो. महेश प्रसाद अहिरवार, प्रो. प्रकाश उदय, प्रो. मृदुला सिन्हा और प्रो. मनोज राय आदि ने भी विद्यार्थियों को संबोधित किया।

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