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वाराणसी मेट्रो को श्रीधरन की ओके
ब्यूरो, अमर उजाला/वाराणसी
Updated Sat, 08 Oct 2016 02:14 AM IST
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मेट्रो के लिए बेनियाबाग में निरीक्षण करने पहुंचे श्रीधरन।
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काशीवासियों के लिए बड़ी खुशखबरी। मेट्रोमैन ई श्रीधरन की हरी झंडी के बाद यहां बहु प्रतीक्षित मेट्रो रेल के संचालन का रास्ता साफ हो गया है। शुक्रवार को यहां प्रस्तावित मेट्रो रेल रूट का स्थलीय निरीक्षण करने के बाद श्रीधरन ने कहा कि घनी आबादी, संकरी सड़कें और अत्यधिक ट्रैफिक दबाव के मद्देनजर काम बेहद चुनौतीपूर्ण है लेकिन असंभव नहीं है। बीएचयू से भेल (शिवपुर) और बेनियाबाग से सारनाथ तक के प्रस्तावित रूट के तकनीकी पहलुओं के अध्ययन के बाद उन्होंने कहा कि मेट्रो का पहला कॉरिडोर चार साल में और दोनों कॉरिडोर छह साल में पूरे कर लिए जाएंगे। यानी, जनवरी 2017 में यदि काम शुरू हुआ तो 2021 में पहला कॉरिडोर तैयार हो जाएगा। हालांकि श्रीधरन ने स्पष्ट किया कि काम कब शुरू होगा, यह सरकार तय करेगी।
मेट्रो कॉरिडोर परियोजना की डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) और रूटों पर उन्होंने अपनी सहमति जताते हुए कहा कि इसकी रिपोर्ट केंद्र और राज्य सरकार को सौंपेंगे। काम कब शुरू होगा यह सरकार पर निर्भर है। स्थलीय निरीक्षण के बाद नदेसर स्थित एक होटल में मीडिया से मुखातिब श्रीधरन ने यहां मेट्रो संचालन की राह में जो प्रमुख चुनौतियां हैं, उनके बारे में बताया। कहा कि यहां यातायात का काफी दबाव है। सड़कें संकरी हैं।
ट्रैफिक दबाव के चलते रात में भी चलना मुश्किल है, ऐसे में दिन में काम कराना कठिन होगा। काम रात में कराया जाएगा। इसके लिए 300-300 मीटर के छोटे-छोटे ब्लाकेज बनाएं जाएंगे और आवागमन रोककर रात में 11 बजे से सुबह चार बजे तक काम होगा। निर्माण कार्य के दौरान तात्कालिक दिक्कतों को उसी समय दूर किया जाएगा। अत्याधुनिक पुसिंग ड्रिलिंग मशीन से काम होगा। मेट्रो निर्माण में खर्च होने वाली 20 फीसदी धनराशि केंद्र और 20 फीसदी धनराशि प्रदेश सरकार खर्च करेंगी। जबकि 60 फीसदी रकम बैंक से ऋण के तौर पर मुहैया होगी। काम शुरू होने के बाद पहला कॉरिडोर पूरा होने में कम से कम चार साल लगेंगे।
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निरीक्षण के बाद श्रीधरन ने वीडीए उपाध्यक्ष प्रकाश चंद्र श्रीवास्तव, सचिव एमपी सिंह, राइटस के सीजीएम पीयूष कंसल, प्रदेश सरकार के मुख्य नगर नियोजक रवि जैन और लखनऊ मेट्रो रेल कारपोरेशन के एमडी केशव कुमार, पीके पॉल, प्रोभात पॉल, नगर नियोजक वीके सक्सेना के साथ विस्तार से चर्चा की। श्रीधरन के निरीक्षण के दौरान राइट्स के अधिकारियों के अलावा वीडीए के एक्सईएन गोपाल कृष्ण, तहसीलदार, डीके सिंह, प्रभाकर मिश्रा और अशोक सिंह मौजूद थे।
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मेट्रो कॉरिडोर परियोजना की डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) और रूटों पर उन्होंने अपनी सहमति जताते हुए कहा कि इसकी रिपोर्ट केंद्र और राज्य सरकार को सौंपेंगे। काम कब शुरू होगा यह सरकार पर निर्भर है। स्थलीय निरीक्षण के बाद नदेसर स्थित एक होटल में मीडिया से मुखातिब श्रीधरन ने यहां मेट्रो संचालन की राह में जो प्रमुख चुनौतियां हैं, उनके बारे में बताया। कहा कि यहां यातायात का काफी दबाव है। सड़कें संकरी हैं।
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ट्रैफिक दबाव के चलते रात में भी चलना मुश्किल है, ऐसे में दिन में काम कराना कठिन होगा। काम रात में कराया जाएगा। इसके लिए 300-300 मीटर के छोटे-छोटे ब्लाकेज बनाएं जाएंगे और आवागमन रोककर रात में 11 बजे से सुबह चार बजे तक काम होगा। निर्माण कार्य के दौरान तात्कालिक दिक्कतों को उसी समय दूर किया जाएगा। अत्याधुनिक पुसिंग ड्रिलिंग मशीन से काम होगा। मेट्रो निर्माण में खर्च होने वाली 20 फीसदी धनराशि केंद्र और 20 फीसदी धनराशि प्रदेश सरकार खर्च करेंगी। जबकि 60 फीसदी रकम बैंक से ऋण के तौर पर मुहैया होगी। काम शुरू होने के बाद पहला कॉरिडोर पूरा होने में कम से कम चार साल लगेंगे।
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निरीक्षण के बाद श्रीधरन ने वीडीए उपाध्यक्ष प्रकाश चंद्र श्रीवास्तव, सचिव एमपी सिंह, राइटस के सीजीएम पीयूष कंसल, प्रदेश सरकार के मुख्य नगर नियोजक रवि जैन और लखनऊ मेट्रो रेल कारपोरेशन के एमडी केशव कुमार, पीके पॉल, प्रोभात पॉल, नगर नियोजक वीके सक्सेना के साथ विस्तार से चर्चा की। श्रीधरन के निरीक्षण के दौरान राइट्स के अधिकारियों के अलावा वीडीए के एक्सईएन गोपाल कृष्ण, तहसीलदार, डीके सिंह, प्रभाकर मिश्रा और अशोक सिंह मौजूद थे।