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काशी में मौत का अड्डा: गंगा में डूबने से 159 दिन में 23 की गई जान, 12 घाट और उस पार का रेती क्षेत्र खतरनाक

Mon, 09 Jun 2025 10:56 AM IST
प्रगति चंद अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: प्रगति चंद Updated Mon, 09 Jun 2025 10:56 AM IST
सार

Varanasi News: वाराणसी जिले में गंगा घाटों पर स्नान के दौरान डबने की घटनाएं घमने का नाम नहीं ले रहीं। यहां गंगा में डूबने से 159 दिन में 23 लोगों की जान चली गई। 

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Varanasi many ghat including Tulsi Ghat and Mir Ghat in dangerous due to 23 deaths in 159 days
गंगा घाट वाराणसी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

इस साल एक जनवरी से आठ जून तक यानी 159 दिन में गंगा में स्नान के दौरान डूबने से 23 लोगों की जान चली गई। गंगा उस पार का रेती क्षेत्र और 12 घाटों के किनारे स्नान करना खतरनाक साबित हुआ। सबसे ज्यादा पांच लोगों की मौत गंगा उस पार रेती वाले क्षेत्र में ही हुई है। 12 घाटों के आसपास डूबने से 18 लोगों की जान गई है।

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काशी में देश और दुनिया के कोने-कोने से श्रद्धालु और सैलानी आते हैं। गंगा में स्नान के दौरान असावधानी या अति उत्साह जीवन पर भारी पड़ जाता है। पुलिस के पास उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, सुरक्षा मानकों की अनदेखी कर गंगा उस पार रेती की तरफ जाकर स्नान करने के दौरान इस साल अब तक पांच लोग जान गंवा चुके हैं। तुलसी घाट और मीर घाट पर तीन-तीन लोग डूबे हैं। इसी तरह हनुमान घाट और पंचगंगा घाट पर दो-दो लोगों की डूबने से जान गई है। 
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इन घाटों के आसपास गंगा की गहराई ज्यादा है। पुलिस ने स्नान के दौरान खास सतर्कता बरतने की सलाह भी दी है। अस्सी पाट व वक्षराज घाट पर डूबने से एक-एक लोगों की मौत हुई है। इसी तरह पाट, लाट घाट, प्रहलाद घाट और राजपाट जानकी पाट, मानसरोवर घाट, चौसट्टी पर गंगा में डूबने से एक-एक लोगों की जान गई है। बता दें इन क्षेत्रों में ज्यादातर हादसे सेल्फी लेने या फिर नहाने के दौरान तैराकी की होड़ के चक्कर में भी हुए हैं।

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2024 में 37 और 2023 में हुई थी 33 लोगों की मौत

इससे पहले वर्ष 2024 में 37 और वर्ष 2023 में 33 लोगों की मौत गंगा में डूबने के कारण हुई थी। वहीं, स्नान से संबंधित प्रमुख गंगा घाटों को छोड़ कर अन्य घाटों पर फ्लोटिंग बैरिकेडिंग नहीं लगाई गई है। इस कारण गंगा में स्नान करने वाले गहराई का अंदाजा नहीं लगा पाते हैं। वे गहरे पानी में चले जाते हैं। प्रमुख गंगा घाटों को छोड़ कर अन्य घाटों पर चेतावनी बोर्ड भी नहीं लगाए गए हैं। जल पुलिस कायदे से निगरानी भी नहीं करती है। इसके चलते लोग स्नान करने के दौरान गंगा के गहरे पानी में जाकर डूब जाते हैं।

क्या बोले अधिकारी
जल पुलिस के अलावा एनडीआरएफ की टीम गंगा में लगातार पेट्रोलिंग करती रहती है। स्नान से संबंधित प्रमुख गंगा घाटों पर फ्लोटिंग बैरिकेडिंग लगाने के साथ ही जल पुलिस की ओर से लगातार लोगों को गहरे पानों में न जाने के लिए आगाह किया जाता है। वे लोग गंगा में स्नान करने आते हैं। वह सतर्कता बरतें। घाट के किनारे हो नहाएं और गहराई की ओर न जाएं। गंगा उस पार रेतीले हिस्से की ओर जफर भी स्नान करने की जरूरत नहीं है। -सरवणन टी, एडीसीपी काशी जोन
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