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वाराणसी: सुर-साज से सजा, स्वर्णाभूषणों से दमका मां का दरबार, कलाकारों की प्रस्तुति ने मन मोहा

Tue, 07 Sep 2021 12:54 AM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: गीतार्जुन गौतम Updated Tue, 07 Sep 2021 12:54 AM IST
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Varanasi Maa Kushmanda filled with melody of music seekers artists performance mesmerized
प्रस्तुति देते कलाकार। - फोटो : अमर उजाला

वाराणसी में मां कूष्मांडा का दरबार संगीत साधकों की सुरलहरी से झंकृत हो उठा। माता के छह दिवसीय शृंगार एवं संगीत समारोह के दौरान माता का दरबार स्वर्णा आभूषणों से दमक उठा। श्रद्धालु माता की मनोहारी छवि का दर्शन करते रहे। संगीत समारोह की तीसरी निशा में सुर, लय-ताल की झंकार का लुत्फ श्रोताओं ने ऑनलाइन मंच पर उठाया।

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दुर्गाकुंड स्थित मां दुर्गा के दरबार में संगीत समारोह की पहली प्रस्तुति में मांडवी एवं शांभवी की जोड़ी के कथक नृत्य की प्रस्तुति मनोहारी रही। उन्होंने सबसे पहले शिव स्तुति से मां के चरणों में संगीतांजलि अर्पित की। उसके बाद पारंपरिक कथक प्रस्तुत किया। राधा कृष्ण के युगल रास पर आधारित कथक से सबको भावविह्वल कर दिया।
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अंत में मां दुर्गा पर आधारित जै जै भवानी दुर्गे रानी से समापन किया। उनके साथ बोल पढ़ंत पर डॉ. ममता टंडन, तबले पर प्रीतम मिश्र, गायन एवं हारमोनियम पर आनंद किशोर मिश्रा, बांसुरी पर सुधीर कुमार ने संगत की।

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समारोह की दूसरी प्रस्तुति काशी के ही पंडित नीरज मिश्र एवं पंडित ध्रुवनाथ मिश्र के सितार की जुगलबंदी रही। उन्होंने सबसे पहले अलाप, जोड़, झाला के पश्चात राग रागेश्री में निबद्ध विलंबित तीन ताल एवं द्रुत तीन ताल में रचनाएं बजाईं। उसके बाद राग मिश्र खमाज में धुन सुनाकर सबको आनंदित कर दिया। उनके साथ तबले पर पंडित भोलानाथ मिश्रा रहे।

तीसरी प्रस्तुति ख्यात वायलिन वादक पंडित सुखदेव मिश्रा की रही। चौथी प्रस्तुति राकेश के बांसुरी वादन, पांचवी प्रस्तुति आद्या मुखर्जी के शास्त्रीय गायन एवं निशा की आखिरी प्रस्तुति पंडित अंशुमान महाराज के सरोद वादन की रही। इससे पहले सुबह पट खुलने के साथ ही मां का पंचामृत स्नान कराया गया, तत्पश्चात गुलाब, नीलकंठ एवं गजरा से मां का शृंगार किया गया। संपूर्ण मंदिर परिसर की भव्य सजावट की गई, कोलकाता से आए कारीगरों ने मंदिर को सजाया। श्रद्धालुओं को प्रसाद भी वितरित किया गया।

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