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वाराणसीः अस्पताल खुद ही बीमार, कैसे होगा बच्चों का इलाज, पेयजल का संकट

Fri, 17 Jan 2020 04:38 PM IST
स्‍वाधीन तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: स्‍वाधीन तिवारी Updated Fri, 17 Jan 2020 04:38 PM IST
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Varanasi: Hospital itself ill, how will children be treated, drinking water crisis
अस्पताल में आक्सीजन सिलेंडर के पास रखी लकड़ी - फोटो : ं

स्वास्थ्य विभाग की ओर से बच्चों के इलाज के लिए सभी सुविधाएं मुहैया कराने का दावा तो किया जाता है, लेकिन यहां कई मूलभूत सुविधाएं हीं नहीं हैं। साफ-सफाई की नियमित मानीटरिंग भी नहीं हो पाती है। ग्रामीण इलाकों के स्वास्थ्य केंद्रों पर तो जिन वार्डों में गर्भवती महिलाओं संग बच्चे भर्ती होते थे, उसमें अधिकांश में वार्मर भी नहीं लगा है। चादर भी नहीं बदले जाते हैं और मरीजों को खुद ही चादर लेकर आना पड़ता है।

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जिले में रामनगर अस्पताल, जिला महिला अस्पताल कबीरचौरा के साथ ही 24 शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और चार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हैं, जहां गर्भवती महिलाओं की डिलिवरी होती है। इसमें शहरी केंद्रों की तुलना में ग्रामीण इलाकों के स्वास्थ्य केंद्रों पर अब भी कई मूलभूत सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। काशी विद्यापीठ प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में जिस वार्ड में डिलिवरी के बाद महिलाओं और बच्चों को भर्ती किया जाता है, वहां भी बृहस्पतिवार को दोपहर में बेड पर चादर, वार्डों में वार्मर नहीं दिखा।

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कबीरचौरा स्थित जिला महिला अस्पताल में पेयजल आपूर्ति के लिए बने रूम के पास गंदगी के साथ ही टायलेट में भी गंदगी है। वार्ड में जाने वाले रास्ते पर पानी जमा होने से कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है। आक्सीजन सिस्टम के पास लकडि़यां रख दी गई। वहीं रामनगर शास्त्री अस्पताल में वार्डों में सफाई तो ठीक हैं लेकिन यहां लंबे समय से अल्ट्रासाउंड की कोई व्यवस्था नहीं है।

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टूटी है खिड़की, बेड पर चादर नहीं

जिले कई स्वास्थ्य केंद्र ऐसे हैं जहां रख-रखाव के अभाव में वार्डों की हालत ठीक नहीं है। वार्डों की खिड़कियां टूटी हैं, बेड के चादर भी नहीं बदले जा रहे हैं। इस वजह से बच्चों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। पीएचसी चिरईगांव पर भी ऐसा ही है। सफाई का आलम है कि दरवाजे पर ही ईट के टुकड़े ही फेके गए हैं। बेड पर चादर नहीं होने के बावत गीता हीरामनपुर, संजना नेवादा ने बताया कि बेड पर चादर न मिलने के बाद घर से लेकर आए हैं। चिकित्सा प्रभारी डॉ. अमित कुमार सिंह का कहना है कि महिला वार्ड रोड चौड़ीकरण में वह टूटने वाला है।

पानी की टंकी में मरे थे बंदर, अब उसी से आपूर्ति

चिरईगांव प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर पिछले दिनों पानी की टंकी में दो बंदरों के शव मिलने के बाद भी व्यवस्था में सुधार नहीं हो पाया। उसकी साफ सफाई कराए बगैर ही पेयजल की आपूर्ति की जारी है। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण द्वारा बनाई गई टंकी के ढांचे को इस ढंग से बनाया गया है कि उस पर पहुंचकर टंकी को साफ करने की कोई व्यवस्था नहीं है।

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