ग्राउंड रिपोर्ट: जिला महिला अस्पताल के गेट पर ताला बंद कर रात में ड्यूटी करती हैं महिला डॉक्टर और स्टाफ नर्स
वाराणसी में जिला महिला अस्पताल में रात में महिला डॉक्टर और स्टाफ नर्स गेट में अंदर से ताला बंद करके ड्यूटी करती हैं। कागज में होमगार्ड की तैनाती है, लेकिन हकीकत में गेट पर गार्ड नहीं मिले।
विस्तार
वाराणसी के जिला महिला अस्पताल कबीरचौरा में तैनात महिला डॉक्टर और स्टाफ नर्स गेट में ताला बंद कर रात में डयूटी कर रही हैं। अस्पताल में दो गेट हैं, दोनों में अंदर से ताला बंद रहता है। अगर किसी मरीज को लेकर परिजन डिलीवरी के लिए पहुंचते हैं और आवाज लगाते हैं तो गेट को खोला जाता है और फिर तुरंत फिर से बंद कर लिया जाता है। मंगलवार आधी रात बाद अमर उजाला की टीम महिला अस्पताल, बीएचयू अस्पताल, जिला अस्पताल, मंडलीय अस्पताल, एमसीएच विंग पांडेयपुर पहुंची। पड़ताल के दौरान गेट से लेकर अंदर तक बमुश्किल कोई सुरक्षा कर्मी नजर आया।
कोलकाता के आरजीकर मेडिकल कॉलेज में महिला डॉक्टर के साथ हुई दरिंदगी के बाद सरकारी अस्पतालों में महिला डॉक्टर और स्टाफ की सुरक्षा को लेकर सवाल उठ रहे हैं। अमर उजाला ने वाराणसी के अस्पतालों में मंगलवार की आधी रात बाद से 2 बजे रात तक जिले के सरकारी अस्पतालों में सुरक्षा का रियलिटी चेक किया तो चौंकाने वाला मामला सामने आया।
रात 12.30 बजे कबीरचौरा महिला अस्पताल
180 बेड वाले महिला अस्पताल में तो महिला डॉक्टर, स्टाफ नर्स अपने को सुरक्षित रखने के लिए अंदर से गेट में ताला बंद कर रात में ड्यूटी करतीं मिलीं। एमसीएच विंग के पीछे वार्ड की ओर जाने वाले गेट पर बाहर एक कुर्सी जरूर थी लेकिन कोई सुरक्षा कर्मी नही दिखा। जिला महिला अस्पताल की अधीक्षक डॉ.मनीषा सिंह कहती हैं अस्पताल परिसर की निगरानी के लिए कुल 40 कैमरे लगाए गए हैं। गेट में अंदर से ताला इसलिए बंद किया जाता है कि कोई भी बाहरी अंदर न आ सकें। अस्पताल के वार्डों में जो सिस्टर इंचार्ज हैं, उनके पास सुरक्षा की निगरानी की जिम्मेदारी है। अंदर से गेट का बंद ताला कब खोला जाना है, कब नहीं यह डॉक्टर, पैरामेडिकल स्टाफ तय करते हैं। अगर कोई मरीज आती है तो उसको ताला खोलकर अंदर भर्ती करने, जांच, इलाज के लिए बुलाया जाता है।
बीएचयू अस्पताल की सुरक्षा के लिए वैसे तो कागज पर 210 सुरक्षा कर्मियों की तैनाती है। यहां निगरानी के लिए जगह-जगह सीसीटीवी कैमरे भी लगाए गए हैं लेकिन मंगलवार की रात यहां कोई सुरक्षा कर्मी नजर नहीं आया। किसी ने कुछ पूछा भी नहीं। इसके अलावा लिफ्ट वाली जगह पर भी कोई सुरक्षा कर्मी नहीं दिखा। और तो और अस्पताल के फिमेल सर्जरी वार्ड के पास भी गेट खुला रहा और लोग आते जाते दिखे लेकिन यहां भी कोई सुरक्षा कर्मी नहीं तैनात था। कुछ इसी तरह का दृश्य तीसरे, चौथे तल के वार्डों में भी नजर आया। हालांकि चीफ प्रॉक्टर प्रो. शिवप्रकाश सिंह का कहना है कि कोलकाता की घटना के बाद से अस्पताल में तैनात सुरक्षाकर्मियों को और मुस्तैदी से रहने को कहा गया है।
रात:12 बजे दीनदयाल उपाध्याय जिला अस्पताल
परिसर स्थित 50 बेड वाले एमसीएच विंग के गेट पर दो एंबुलेंस मिलीं। अस्पताल का मुख्य प्रवेश द्वार भी पूरा खुला था। यहां चार कुर्सियां भी रखी थी लेकिन गेट से लेकर अंदर तक कोई पुरुष या महिला सुरक्षा कर्मी नहीं नजर आया। दवा वितरण काउंटर के सामने पड़ी कुर्सियों पर कुछ मरीजों के परिजन सोये थे। तीसरे तल पर वार्ड में जाने वाले रास्ते पर पूरा अंधेरा था। रैंप और सीढ़ी वाले रास्ते पर लाइट भी नहीं जल रही थी। इस तरह की स्थिति तब है जब एमसीएच विंग के सामने ही अपर निदेशक स्वास्थ्य का आवास भी है।
मंगलवार की रात 1 बजे इमरजेंसी में तो दो होमगार्ड नजर आए लेकिन यहां वार्डों में किसी तरह की कोई सुरक्षा नहीं नजर आई। अस्पताल में अल्ट्रासाउंड कक्ष के पास बने वार्ड नंबर 4 महिला वार्ड में महिलाएं तो तीन कमरों में भर्ती रही लेकिन गेट से लेकर अंदर तक कोई भी सुरक्षा कर्मी नहीं दिखा। यहीं नहीं अस्पताल की ओर से तैनात यहां कोई कर्मचारी भी नहीं नजर आया। अस्पताल के एसआईसी डॉ.एसपी सिंह का कहना है कि अस्पताल में सुरक्षा के लिए 12 होमगार्ड और 34 सिक्योरिटी गार्ड की तैनाती है। तीन शिफ्ट में जगह-जगह तैनाती भी की जाती है। कुछ दिनों से पहले से अधिक सतर्क रहने को कहा गया है।
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