{"_id":"5afb37964f1c1bce408b597d","slug":"varanasi-flyover-collapse-many-people-suddenly-trapped","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"वाराणसी फ्लाईओवर हादसाः हंसते-खेलते मस्ती में जा रहे थे, चीख भी नहीं सके","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
वाराणसी फ्लाईओवर हादसाः हंसते-खेलते मस्ती में जा रहे थे, चीख भी नहीं सके
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Updated Wed, 16 May 2018 10:48 AM IST
विज्ञापन
सामने का मंजर देखकर थम गईं सभी लोगों की आंखें
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कार व बस में परिवार और अन्य साथियों संग हंसते-बोलते जा रहे लोगों की चीख तक निकल नहीं पाई। सोचा भी नहीं होगा कि राह चलते इस तरह काल दबोच लेगा। वाराणसी के लहरतारा कैंट रेलवे स्टेशन रोड पर रोजाना की तरह वाहनों की आवाजाही लगी हुई थी।
लहरतारा से लेकर कैंट तक जाम लगा हुआ था। इसी दौरान अचानक धड़ाम की तेज आवाज गूंजी। सभी को तो एकबारगी ऐसा लगा कि कोई बड़ी बिल्डिंग भरभरा कर गिर पड़ी हो। हर कोई जहां था वहीं थम सा गया और किसी अनहोनी की आशंका से भर गया। आवाज इतनी तेज थी कि लोगों की नजर बरबस उस ओर उठ गई और नजारा देखकर लोग लहरतारा पुल की ओर दौड़ पड़े।
मौके पर जब लोग पहुंचे तो लहरतारा चौकाघाट फ्लाईओवर का बीम नीचे गिरा था और उसके नीचे कई वाहन दबे थे। किसी को कुछ समझ ही नहीं आ रहा था कि यह क्या हो गया। सामने का मंजर इतना खौफनाक था कि हर किसी के मुंह से चीख निकल गई।
विज्ञापन
बीम के नीचे दबी बस, कार, बोलेरो, बाइक पर सवार लोगों के मुंह से चीख तक निकल नहीं पाई। कई वाहन तो सड़क से चिपक गए थे। आसपास के लोगों को समझ में नहीं आ रहा था कि दबे लोगों को निकालें तो कैसे? मौके पर मौजूद विमल ने बताया कि लोग कांप रहे थे।
हादसे में मरने वाले कौन थे, इससे किसी को कोई मतलब नहीं था। बस इंसान थे, यह सोचकर आसपास की महिलाएं तो दहाड़े मारकर रोने लगीं। घर के पुरुषों-बच्चों को चिल्ला-चिल्लाकर बुलाने लगीं कि सामने पुल गिर गया है।
उसके नीचे लोग दबे हैं, उन्हें किसी तरह बचाओ। संकरी रोड के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार के चलते हजारों की भीड़ बेबस थी। लोग चाहते हुए भी दबे लोगों को निकाल नहीं पा रहे थे।
विज्ञापन
लहरतारा से लेकर कैंट तक जाम लगा हुआ था। इसी दौरान अचानक धड़ाम की तेज आवाज गूंजी। सभी को तो एकबारगी ऐसा लगा कि कोई बड़ी बिल्डिंग भरभरा कर गिर पड़ी हो। हर कोई जहां था वहीं थम सा गया और किसी अनहोनी की आशंका से भर गया। आवाज इतनी तेज थी कि लोगों की नजर बरबस उस ओर उठ गई और नजारा देखकर लोग लहरतारा पुल की ओर दौड़ पड़े।
विज्ञापन
मौके पर जब लोग पहुंचे तो लहरतारा चौकाघाट फ्लाईओवर का बीम नीचे गिरा था और उसके नीचे कई वाहन दबे थे। किसी को कुछ समझ ही नहीं आ रहा था कि यह क्या हो गया। सामने का मंजर इतना खौफनाक था कि हर किसी के मुंह से चीख निकल गई।
विज्ञापन
बीम के नीचे दबी बस, कार, बोलेरो, बाइक पर सवार लोगों के मुंह से चीख तक निकल नहीं पाई। कई वाहन तो सड़क से चिपक गए थे। आसपास के लोगों को समझ में नहीं आ रहा था कि दबे लोगों को निकालें तो कैसे? मौके पर मौजूद विमल ने बताया कि लोग कांप रहे थे।
हादसे में मरने वाले कौन थे, इससे किसी को कोई मतलब नहीं था। बस इंसान थे, यह सोचकर आसपास की महिलाएं तो दहाड़े मारकर रोने लगीं। घर के पुरुषों-बच्चों को चिल्ला-चिल्लाकर बुलाने लगीं कि सामने पुल गिर गया है।
उसके नीचे लोग दबे हैं, उन्हें किसी तरह बचाओ। संकरी रोड के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार के चलते हजारों की भीड़ बेबस थी। लोग चाहते हुए भी दबे लोगों को निकाल नहीं पा रहे थे।
सुनाई देती रही चीखें, कोई हाथ हिला रहा था तो कोई...
बीम के नीचे फंसे वाहनों को निकालने में लग गए घंटों
- फोटो : अमर उजाला
वाराणसी कैंट पर निर्माणाधीन फ्लाईओवर का बीम गिरने के बाद कई वाहन इसकी चपेट में आ गए। मंजर यह था कि बीम के नीचे दबे, फंसे वाहनों से केवल चीखें सुनाई दे रही थीं। अंदर बुरी तरह फंसे लोगों में से कोई हाथ हिला रहा था तो कोई पानी मांग रहा था।
किसी गाड़ी में फंसे बच्चे की रोने की आवाज से भी कई लोग दर्द में नजर आए। कहीं-कहीं तो केवल तड़प भर सुनाई दे रही थी। वाहनों के बुरी तरह क्षतिग्रस्त होने और वाहनों तक पहुंचने की जगह न होने के चलते आम लोग चाहकर भी उनकी मदद नही कर पा रहे थे। यह मंजर देख कई लोगों की आंखे भर आई।
कैंट के समीप फ्लाईओवर का बीम कई जिंदगियों पर काल बनकर टूटा। हजारों टन भार का बीम गिरने की वजह से चपेट में आए वाहन चकनाचूर हो गए। वाहनों के पिचकने, टूटने की वजह से कई लोग इसमें फंस गए।
बाहर फंसे लोगों को तो बचा लिया गया पर अंदर गाड़ियों में फंसे लोगों की केवल कराह सुनाई दे रही थी। जीवन की उम्मीद में एक स्विफ्ट कार में फंसी महिला हाथ हिला रही थी पर उस तक पहुंचे पर उसे निकालना संभव नही था। वह कार में फंस गई थी।
लोग कई बार उसे निकालने का प्रयास किए पर असफलता ही हाथ लगी। इसी तरह एक और व्यक्ति भीवाहन में फंसा बचाव के लिए चिल्ला रहा था। कुछ देर बाद पानी मांगने लगा। लोगों ने उसे पानी पिलाया। फ्लाईओवर के नीचे लोग वाहनों में इस कदर फंसे थे कि केवल उनकी चीखें सुनाई दे रही थी। इस घटना के प्रत्यक्षदर्शी अपने आंसू नही रोक पाए।
किसी गाड़ी में फंसे बच्चे की रोने की आवाज से भी कई लोग दर्द में नजर आए। कहीं-कहीं तो केवल तड़प भर सुनाई दे रही थी। वाहनों के बुरी तरह क्षतिग्रस्त होने और वाहनों तक पहुंचने की जगह न होने के चलते आम लोग चाहकर भी उनकी मदद नही कर पा रहे थे। यह मंजर देख कई लोगों की आंखे भर आई।
कैंट के समीप फ्लाईओवर का बीम कई जिंदगियों पर काल बनकर टूटा। हजारों टन भार का बीम गिरने की वजह से चपेट में आए वाहन चकनाचूर हो गए। वाहनों के पिचकने, टूटने की वजह से कई लोग इसमें फंस गए।
बाहर फंसे लोगों को तो बचा लिया गया पर अंदर गाड़ियों में फंसे लोगों की केवल कराह सुनाई दे रही थी। जीवन की उम्मीद में एक स्विफ्ट कार में फंसी महिला हाथ हिला रही थी पर उस तक पहुंचे पर उसे निकालना संभव नही था। वह कार में फंस गई थी।
लोग कई बार उसे निकालने का प्रयास किए पर असफलता ही हाथ लगी। इसी तरह एक और व्यक्ति भीवाहन में फंसा बचाव के लिए चिल्ला रहा था। कुछ देर बाद पानी मांगने लगा। लोगों ने उसे पानी पिलाया। फ्लाईओवर के नीचे लोग वाहनों में इस कदर फंसे थे कि केवल उनकी चीखें सुनाई दे रही थी। इस घटना के प्रत्यक्षदर्शी अपने आंसू नही रोक पाए।
दर्द में दब गई भूख, नही पका भोजन
घटनास्थल के आस-पास स्थिति कॉलोनियों में कई घरों में भोजन नही बना। जहां खाना बना वहां लोगों के गले से एक भी निवाला नही उतरा। दर्द में भूख दबकर रह गई। लोगों को चीख पुकार, हादसा सताता रहा। देर रात तक केवल घटना को लेकर चर्चा होती रही। लोगों को रात में नींद भी बड़ी मुश्किल से आई। महिलाओं पर इस घटना का काफी असर दिखा।
- कैंट पर घटना के बाद जब वाहनों का डायवर्जन शुरू हुआ तो रोडवेज बसों को चांदपुर ही रोक दिया गया। ऐसे में यात्रियों को कैंट तक पैदल जाते देखा गया। कई लोगों की ट्रेन भी इस चक्कर में छूट गई। यही हाल शहर से बाहर जाने वाले लोगों का रहा। चांदपुर से लहरतारा के बीच बड़ी संख्या में यात्री पैदल चलते दिखे। महिला, बुजुर्ग और बच्चों को सबसे ज्यादा समस्या का सामना करना पड़ा।
इंजीनियरिंग की कमी से हुई घटना
निर्माणाधीन फ्लाईओवर के बीम गिरने के हादसे के पीछे सही एलाइंमेंट नहीं होना माना जा रहा है। मौके पर पहुंचे विकास प्राधिकरण और नगर निगम के अभियंताओं ने भी यह बात मानी कि फ्लाईओवर निर्माण के वक्त बीम रखने में एलाइंमेट का मिलान सबसे अहम होता है।
उसी लापरवाही में यह हादसा हुआ होगा। कारण बीम रखने के दौरान दबाव बनता है और उससे प्रेशर बनता है। कई बार प्रेशर बनने से उसका बैलेंस बिगड़ने की आशंका रहती है।
- कैंट पर घटना के बाद जब वाहनों का डायवर्जन शुरू हुआ तो रोडवेज बसों को चांदपुर ही रोक दिया गया। ऐसे में यात्रियों को कैंट तक पैदल जाते देखा गया। कई लोगों की ट्रेन भी इस चक्कर में छूट गई। यही हाल शहर से बाहर जाने वाले लोगों का रहा। चांदपुर से लहरतारा के बीच बड़ी संख्या में यात्री पैदल चलते दिखे। महिला, बुजुर्ग और बच्चों को सबसे ज्यादा समस्या का सामना करना पड़ा।
इंजीनियरिंग की कमी से हुई घटना
निर्माणाधीन फ्लाईओवर के बीम गिरने के हादसे के पीछे सही एलाइंमेंट नहीं होना माना जा रहा है। मौके पर पहुंचे विकास प्राधिकरण और नगर निगम के अभियंताओं ने भी यह बात मानी कि फ्लाईओवर निर्माण के वक्त बीम रखने में एलाइंमेट का मिलान सबसे अहम होता है।
उसी लापरवाही में यह हादसा हुआ होगा। कारण बीम रखने के दौरान दबाव बनता है और उससे प्रेशर बनता है। कई बार प्रेशर बनने से उसका बैलेंस बिगड़ने की आशंका रहती है।
घर में हो रहा था नई गाड़ी का इंतजार, हादसे की खबर पहुंची
रिंकू के घर पर सभी लोग बहुत खुश थे। नई गाड़ी जो आने वाली थी लेकिन गाड़ी तो नहीं, जो खबर घर पहुंची वो दिल दहलाने वाली थी। पांडेयपुर के नक्खीघाट निवासी रिंकू अपने रिश्तेदार के साथ मंगलवार को घर से नई गाड़ी खरीदने निकले थे, मगर गाड़ी लेकर लौटते वक्त पुल गिरने से रिंकू और उनके रिश्तेदार गाड़ी सहित उसके नीचे दब गए। हादसे में घायल रिंकू निजी अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच लड़ रहे हैं, वहीं रिश्तेदार की हालत गंभीर है।
बाप-बेटे की मौत, पत्नी की हालत गंभीर
हादसे के बाद पूर्वोत्तर रेलवे के मंडलीय अस्पताल में छह लोगों को ले जाया गया। इसमें चार को मृत घोषित कर दिया गया वहीं दो को अन्य अस्पतालों के लिए रेफर कर दिया गया। कंचनपुर (डीरेका) की रहने वाली कुमकुम सिंह का पूरा परिवार इस हादसे की चपेट में आ गया।
उनके पति आरबी सिंह (50) और पुत्र कुमार वैभव (15) को चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया तो वहीं कुमकुम को गंभीर अवस्था में परिजन ट्रॉमा सेंटर ले गए। वहीं दो और मृतक में से एक की पहचान खुशहाल राम के रूप में हुई तो दूसरे की शिनाख्त नहीं हो पाई है।
जल्दबाजी में काम कराने का नतीजा है हादसा
फ्लाईओवर हादसे की सूचना मिलते ही कांग्रेस नेता मौके पर पहुंच गए। पूर्व विधायक अजय राय व ललितेश पति त्रिपाठी ने हादसे पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि यह हादसा जल्दबाजी से किए गए कार्यों का नतीजा है।
आरोप लगाया कि फ्लाईओवर के निर्माण में सुरक्षा मानकों को तो धता बताई ही जा रही थी, इस्तेमाल की जा रही सामग्री बेहद घटिया किस्म की थी। नेताओं ने हादसे की उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। इस दौरान जिलाध्यक्ष प्रजानाथ शर्मा, प्रेमनाथ पाण्डेय, हरिशंकर सिंह, राकेशचंद्र, शैलेंद्र सिंह, राघवेंद्र चौबे एवं रविशंकर पाठक आदि मौजूद थे।
बाप-बेटे की मौत, पत्नी की हालत गंभीर
हादसे के बाद पूर्वोत्तर रेलवे के मंडलीय अस्पताल में छह लोगों को ले जाया गया। इसमें चार को मृत घोषित कर दिया गया वहीं दो को अन्य अस्पतालों के लिए रेफर कर दिया गया। कंचनपुर (डीरेका) की रहने वाली कुमकुम सिंह का पूरा परिवार इस हादसे की चपेट में आ गया।
उनके पति आरबी सिंह (50) और पुत्र कुमार वैभव (15) को चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया तो वहीं कुमकुम को गंभीर अवस्था में परिजन ट्रॉमा सेंटर ले गए। वहीं दो और मृतक में से एक की पहचान खुशहाल राम के रूप में हुई तो दूसरे की शिनाख्त नहीं हो पाई है।
जल्दबाजी में काम कराने का नतीजा है हादसा
फ्लाईओवर हादसे की सूचना मिलते ही कांग्रेस नेता मौके पर पहुंच गए। पूर्व विधायक अजय राय व ललितेश पति त्रिपाठी ने हादसे पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि यह हादसा जल्दबाजी से किए गए कार्यों का नतीजा है।
आरोप लगाया कि फ्लाईओवर के निर्माण में सुरक्षा मानकों को तो धता बताई ही जा रही थी, इस्तेमाल की जा रही सामग्री बेहद घटिया किस्म की थी। नेताओं ने हादसे की उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। इस दौरान जिलाध्यक्ष प्रजानाथ शर्मा, प्रेमनाथ पाण्डेय, हरिशंकर सिंह, राकेशचंद्र, शैलेंद्र सिंह, राघवेंद्र चौबे एवं रविशंकर पाठक आदि मौजूद थे।