गजब हाल है: गूगल स्टार रेटिंग में वाराणसी का जिला अस्पताल नंबर वन, 40 मिनट देर से आते हैं डॉक्टर
Varanasi News: अमर उजाला की पड़ताल में वाराणसी के जिला अस्पताल की सच्चाई सामने आई। यहां डॉक्टर 40 मिनट की देरी से आते हैं। इतना ही नहीं पैथालोजी, एक्सरे, अल्ट्रासाउंड भी देरी से शुरू होता है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
दीनदयाल उपाध्याय जिला अस्पताल को मरीजों की सुविधाओं के मामले में गूगल 5 स्टार रेटिंग मिलने के साथ ही सर्जरी करने, इको फ्रेंडली सहित कई श्रेणी में कागज पर प्रदेश में पहला स्थान मिला है। इसके बाद भी यहां ओपीडी में डॉक्टर 40 मिनट की देरी से आते हैं। पैथालोजी, एक्सरे, अल्ट्रासाउंड भी देरी से शुरू होता है। दोपहर में ओपीडी में अधिकांश जगह तय समय से 30 मिनट पहले ही सन्नाटा दिखने लगता है।
बुधवार को अमर उजाला की पड़ताल में सुबह ओपीडी खुलने के 40 मिनट बाद तक कुर्सियां खाली रहीं। एक्सरे, अल्ट्रासाउंड और पैथालॉजी में भी आधे घंटे तक जांच नहीं शुरू हुई। जिला अस्पताल में शहरी और ग्रामीण इलाकों से रोज 1500 मरीज पहुंचते हैं। ओपीडी का समय सुबह 8 से दोपहर 2 बजे तक है।
बुधवार को सुबह 7.30 बजे ओपीडी के मुख्य द्वार के सामने मरीज इलाज के लिए पहुंचे। 8 बजे गेट खुलने के साथ पर्ची तो तुरंत बनने लगी लेकिन मरीज डॉक्टर के कमरे में पहुंचे तो वहां डॉक्टर नहीं मिले। वे बाहर ही डॉक्टर का इंतजार करते रहे।
इसे भी पढ़ें; Sonbhadra: बर्रे के झुंड के हमले से मासूम की मौत, दादी की हालत गंभीर, जंगल में बकरी चराने गई थीं दोनों
ओपीडी खुलने के 40 मिनट बाद तक निजी फार्मेसी से प्रशिक्षण लेने वाले विद्यार्थी कमरे में और उसके बाहर जरूर दिखे लेकिन ऑर्थोपेडिक्स के चार चिकित्सक, तीन सर्जन, एक चर्म रोग विशेषज्ञ, दो बाल रोग विशेषज्ञ, दो फिजिशियन नहीं थे। ओपीडी में डॉक्टरों, कर्मचारियों को समय से आने के लिए कहा गया है।
निगरानी के लिए सीसी कैमरे और ऑनलाइन अटेंडेंस की व्यवस्था की गई है। चिकित्सक आने के बाद वार्ड में भर्ती मरीजों को देखते हैं। समय से ओपीडी, एक्सरे, पैथालॉजी, अल्ट्रासाउंड समय से शुरू नहीं हो रहा है तो इस बारे में जवाब तलब किया जाएगा। -डॉ. बृजेश कुमार, सीएमएस, जिला अस्पताल
ये रहा ओपीडी में सुबह का हाल
- 08.12 बजे: अस्पताल में प्लास्टर कक्ष खुला था, लेकिन कोई नजर नहीं आया। फार्मेसी कॉलेज के छात्र भी स्थायी कर्मचारियों के आने का इंतजार करते रहे।
- 08.30 बजे: पैथालॉजी काउंटर वाला चैनल गेट खुला था। सैंपल कक्ष का दरवाजा भी खुला था, लेकिन सैंपल लेने वाला कोई नहीं था।
- 08.34 बजे: अल्ट्रासाउंड कक्ष में एक कर्मचारी लोगों का पंजीकरण कर रहा था, लेकिन कक्ष पर ताला लटकता रहा।
- 08.40 बजे: ओपीडी हॉल में चर्म रोग विशेषज्ञ का कमरा खुला लेकिन कुर्सी खाली रही। बाहर मरीज पर्चा लेकर बैठे रहे।
- 08.35 बजे: एक्सरे कक्ष तो समय से खुल गया था, लेकिन मरीजों का एक्सरे करने वाला कोई नहीं था।
- 08.46 बजे: फिजिशियिन, बाल रोग विशेषज्ञ के कमरे में भी डॉक्टर नहीं थे। यहां बच्चों को लेकर अभिभावक बैठे रहे।
- 08.49 बजे: ओपीडी हॉल में कमरा नंबर 228 में ईसीजी कक्ष नहीं खुल सका था। इस कारण लोग बाहर बैठे थे।
- 08.50 बजे: कमरा नंबर 227 में फीवर क्लीनिक में दो डॉक्टरों की कुर्सियां थीं। प्रशिक्षण लेने वाले छात्र थे, लेकिन कोई डॉक्टर नहीं था।