Varanasi Crime: 33 साइबर ठगों का स्क्रीन टाइम दोगुने से भी ज्यादा, कई तथ्य आए सामने; ऐसे रहते हैं सक्रिय
Varanasi News: एक दिन में साइबर ठग औसतन 100-130 लोगों से संपर्क करते थे। यह काम ठीक उसी तरह होता था जैसे किसी कॉरपोरेट कॉल सेंटर में टारगेट पूरा किया जाता है।
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साइबर अपराधियों के लिए ठगी ‘टारगेट बेस्ड जॉब’ है। नौकरीपेशा लोगों से ये दोगुना काम करते हैं। दो दिनों के अंदर हुई गिरफ्तारी में सामने आया है कि साइबर अपराधी रोजाना 16-17 घंटे मोबाइल और लैपटॉप पर सक्रिय रहते थे। गिरफ्तार 96 साइबर अपराधियों में पुलिस की डिजिटल फॉरेंसिक जांच में 33 आरोपियों का स्क्रीन टाइम सामान्य से दोगुना ज्यादा पाया गया।
जांच में पता चला कि गिरफ्तार साइबर अपराधियों में 70 फीसदी इंटरमीडिएट, स्नातक या तकनीकी डिप्लोमा धारक हैं। इन्हें डिजिटल पेमेंट, यूपीआई, फिशिंग लिंक, स्पूफ कॉलिंग और सोशल इंजीनियरिंग की अच्छी समझ थी। साइबर फ्रॉड से जुड़े मामलों में हुई गिरफ्तारियों में पुलिस जांच में सामने आया कि साइबर अपराधियों का पूरा नेटवर्क होता है, जिसमें कौन क्या काम करेगा, इसकी जिम्मेदारी बंटी होती है। डेटा कलेक्शन टीम का काम सोशल मीडिया, लीक डेटाबेस और ऑनलाइन फॉर्म के जरिये मोबाइल नंबर और ईमेल जुटाना होता है।
कॉलिंग टीम बैंक, बीमा, ई-केवाईसी, बिजली बिल, लोन और निवेश के नाम पर स्क्रिप्टेड कॉल करती है। टेक सपोर्ट टीम फिशिंग लिंक, स्क्रीन-शेयरिंग ऐप और फर्जी वेबसाइट तैयार करती है, जबकि मनी रूटिंग टीम फ्रॉड की रकम को तुरंत कई खातों में घुमाकर नकदी निकासी या क्रिप्टो गिफ्ट कार्ड में कन्वर्जन करती है। साइबर एक्सपर्ट मृत्यंजय सिंह के अनुसार, साइबर अपराधी फ्रॉड की रकम 15 मिनट के अंदर 4-5 म्यूल खातों में घुमा देते हैं, जिससे पुलिस के लिए ट्रेसिंग करना जटिल हो जाता है।
ठगी की औसत रकम 5 हजार से 1.5 लाख रुपये डिजिटल अरेस्ट में ज्यादा कमाई
साइबर फ्रॉड करने वाले रोजाना 100-130 लोगों से संपर्क करते थे। इसमें निवेश, प्रलोभन और झांसा देने समेत योजनाओं के बारे में फर्जी विज्ञापन दिखाकर ठगी की जाती थी। जबकि फर्जी कॉल सेंटर में काम करने वाले निवेश और शेयर मार्केट ट्रेडिंग के जरिये फ्रॉड करते थे। ठगी की औसत रकम 5 हजार से 1.5 लाख रुपये तक रही, जबकि कुछ मामलों में 40 लाख रुपये तक की ठगी की गई।
साइबर सेल की जांच में सामने आया कि कम पढ़े-लिखे आरोपियों में झारखंड के जामताड़ा, छत्तीसगढ़ और ओडिशा के कुछ क्षेत्रों के लोग शामिल हैं। बनारस में हुए फ्रॉड में गिरफ्तार साइबर अपराधी खासकर झारखंड के देवघर, धनबाद, पश्चिम बंगाल के मालदा और जामताड़ा, बिहार के पटना, नालंदा, छत्तीसगढ़ के अलावा स्थानीय नेटवर्क से जुड़े थे।
साइबर अपराधी रोज नया तरीका अपनाते हैं। पुलिस उनके पैटर्न, कॉल डिटेल, बैंकिंग ट्रेल और आईपी एड्रेस के आधार पर नेटवर्क को खंगाल रही है। साइबर फ्रॉड में 96 साइबर ठगों की गिरफ्तारी की गई है। बाकी की जांच साइबर सेल कर रही है। - विदुष सक्सेना, एसीपी साइबर