{"_id":"5b756c6d42c7921b19356409","slug":"varanasi-court-judgment-is-about-sikroura-massacare","type":"photo-gallery","status":"publish","title_hn":"यूपीः 32 साल पुराने सिकरौरा नरसंहार कांड में एमएलसी बृजेश बरी, समर्थकों में खुशी की लहर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
यूपीः 32 साल पुराने सिकरौरा नरसंहार कांड में एमएलसी बृजेश बरी, समर्थकों में खुशी की लहर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Updated Fri, 17 Aug 2018 10:19 AM IST
विज्ञापन
कोर्ट परिसर में कड़ी सुरक्षा में एमएलसी बृजेश सिंह
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
varanasi
- फोटो : अमर उजाला
कोर्ट ने कहा कि आरोपी बृजेश की शिनाख्त नहीं कराना अभियोजन की कमी थी। गिरफ्तारी और साइकिल बरामदगी के समय के दो गवाहों को अभियोजन के द्वारा बयान नहीं कराने पर बृजेश की उपस्थिति संदिग्ध मानी गई। हत्या करने का उद्देश्य साबित न करना, साजिश सिद्ध न करना, पूर्व में बरी छह आरोपियों का आधार, गवाहों के बयान में भिन्नता, डॉक्टर का बयान आदि बृजेश को दोषमुक्त करने में अहम कड़ी साबित हुए। हालांकि इस प्रकरण में दोषमुक्त होने के बावजूद अभी भी बृजेश सेंट्रल जेल में ही रहेंगे।
varanasi
- फोटो : अमर उजाला
9 अप्रैल 1986 की रात चंदौली जिले के बलुआ थाना अंतर्गत सिकरौरा गांव के प्रधान रामचंद्र यादव, उसके दो भाई रामजन्म व सियाराम और चार मासूम बच्चों मदन, उमेश, टुनटुन व प्रमोद की नृशंस तरीके से हत्या कर दी गई थी। वारदात की वजह जमीन संबंधी विवाद और ग्राम प्रधान चुनाव की रंजिश बताई गई थी। रामचंद्र की पत्नी हीरावती देवी की तहरीर पर मुकदमा दर्ज किया गया था। इस मामले में आरोपी बृजेश सिंह को नामजद नहीं किया गया था। प्राथमिकी दर्ज कराने के समय और बयान में अदालत ने भिन्नता पाई।
विज्ञापन
विज्ञापन
एमएलसी बृजेश
- फोटो : अमर उजाला
अदालत में डॉक्टर ने बयान दिया कि जिस हथियार गड़ासा की बात कही गई है उससे हत्या नहीं हो सकती बल्कि बल्लमनुमा हथियार की चोट मृतकों के शरीर पर पाई गई थी। वादिनी ने पूर्व के बयान में कहा था कि उसने सीढ़ी से उतरते हुए पंचम और देवेंद्र को देखा था। जबकि, बाद के बयान में कहा कि सीढ़ी से पंचम और बृजेश को उतरते देखा था। इस वजह से अदालत ने वादिनी के बयान को अविश्वसनीय माना।
विज्ञापन
court
बता दें कि इस प्रकरण के छह आरोपी पहले ही बरी किए जा चुके हैं। 2008 में बृजेश की ओडिशा के भुवनेश्वर से गिरफ्तारी के बाद हाईकोर्ट इलाहाबाद के निर्देश पर मामले की त्वरित सुनवाई जिले की अदालत में शुरू हुई। शुरुआत में मामला वारदात के समय बृजेश के बालिग और नाबालिग होने को लेकर अटका रहा। वारदात के दौरान बृजेश के बालिग घोषित होने पर ट्रायल शुरू हुआ।