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बक्से से 40 साल बाद आज बाहर आएंगे गणना यंत्र
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वाराणसी। संपूर्णानंद संस्कृत विश्वद्यिालय में ग्रह-नक्षत्रों की गणना अब जल्द ही शुरू होगी। बक्से में 40 सालों से बंद टेलीस्कोप व अन्य यंत्र आज से बाहर आ जाएंगे। ज्योतिष विभाग की ओर से सभी यंत्रों का आज लोकार्पण होगा।
संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में ज्योतिष विभाग ग्रह-नक्षत्रों की उथल-पुथल की गणना करने के लिए पूरी तरह से तैयार है। विभाग के अध्यक्ष प्रो. अमित कुमार शुक्ला ने बताया कि आकाशीय गतिविधियों का अध्ययन के लिए टेलीस्कोप काफी उपयोगी है। इसमें सात-आठ छोटे-छोटे यंत्र भी हैं। टेलीस्कोप को पाणिनी भवन के एक कक्ष में रखने का निर्णय लिया गया है ताकि ज्योतिष के शोधार्थी भी इसका लाभ उठा सकें। खगोलीय गणना के लिए वर्ष 1979 में तत्कालीन ज्योतिष विभागाध्यक्ष प्रो. मुरारी लाल शर्मा ने यह टेलीस्कोप अमेरिका से मंगाया थी।
कुलपति प्रो. राजाराम शुक्ला ने बताया कि पाणिनि भवन के एक कक्ष में दीर्घा यंत्र में टेलीस्कोप भी रखने का निर्णय लिया गया है। खगोलीय गणना के लिए अब टेलीस्कोप देश-विदेश के अध्येताओं व शोधार्थियों को भी उपलब्ध कराया जाएगा।
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संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में ज्योतिष विभाग ग्रह-नक्षत्रों की उथल-पुथल की गणना करने के लिए पूरी तरह से तैयार है। विभाग के अध्यक्ष प्रो. अमित कुमार शुक्ला ने बताया कि आकाशीय गतिविधियों का अध्ययन के लिए टेलीस्कोप काफी उपयोगी है। इसमें सात-आठ छोटे-छोटे यंत्र भी हैं। टेलीस्कोप को पाणिनी भवन के एक कक्ष में रखने का निर्णय लिया गया है ताकि ज्योतिष के शोधार्थी भी इसका लाभ उठा सकें। खगोलीय गणना के लिए वर्ष 1979 में तत्कालीन ज्योतिष विभागाध्यक्ष प्रो. मुरारी लाल शर्मा ने यह टेलीस्कोप अमेरिका से मंगाया थी।
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कुलपति प्रो. राजाराम शुक्ला ने बताया कि पाणिनि भवन के एक कक्ष में दीर्घा यंत्र में टेलीस्कोप भी रखने का निर्णय लिया गया है। खगोलीय गणना के लिए अब टेलीस्कोप देश-विदेश के अध्येताओं व शोधार्थियों को भी उपलब्ध कराया जाएगा।
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