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तिब्बती छात्राओं ने मनाया महिला क्रांति दिवस
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सारनाथ। केंद्रीय उच्च तिब्बती शिक्षा संस्थान में शुक्रवार को तिब्बती महिला संगठन के तत्वाधान में 62वां महिला क्रांति दिवस मनाया गया। छात्राओं ने शाम छह बजे दीप जलाकर तिब्बत आजादी के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान देने वाली तिब्बती महिलाओं की आत्मा की शांति के लिए भगवान बुद्ध से प्रार्थना की।
तिब्बती महिला संगठन की अध्यक्षा तावा छोदुंग के नेतृत्व में दर्जनों तिब्बती छात्राओं ने संस्थान परिसर के कालचक्र मंडप पर दीप जलाया साथ ही तिब्बती व भारतीय राष्ट्रगान हुआ। इसके बाद विश्व शांति के लिए पूजा की गई। तत्पश्चात केंद्रीय तिब्बती महिला संगठन धर्मशाला से भेजे गए संदेश पत्र को संगठन की अध्यक्षा दावा छोटूग ने पढ़कर सुनाया। इस मौके पर तेनजिंग उगजोम, तेनजिंग वंगमो, चेंजिंग छुइंग सहित अन्य लोग शामिल थे।
राजभाषा ही राष्ट्र के प्रगति का आधार है
सारनाथ। किसी भी देश की भाषा उसकी निजता की पहचान होती है। अपनी भाषा के बिना व्यक्ति गूंगे के समान है। जब तक राजभाषा का प्रयोग हर व्यक्ति अपनी जिम्मेदारी नहीं समझेगा तब -तक भाषा का विकास संभव नहीं है। उक्त बातें सारनाथ स्थित केंद्रीय उच्च तिब्बती शिक्षा संस्थान के राजभाषा कार्यान्वयन समिति के वक्ताओं ने शुक्रवार को आयोजित कार्यशाला में कही। सहायक कुल सचिव प्रमोद सिंह ने राजभाषा से संबंधित नियमों व अधिनियमों पर अपने विचार व्यक्त किया। संचालन डॉ. अनुराग त्रिपाठी व धन्यवाद ज्ञापन डा रामजी सिंह ने किया। अतिथियों का स्वागत डॉ. सुशील कुमार सिंह ने किया।
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तिब्बती महिला संगठन की अध्यक्षा तावा छोदुंग के नेतृत्व में दर्जनों तिब्बती छात्राओं ने संस्थान परिसर के कालचक्र मंडप पर दीप जलाया साथ ही तिब्बती व भारतीय राष्ट्रगान हुआ। इसके बाद विश्व शांति के लिए पूजा की गई। तत्पश्चात केंद्रीय तिब्बती महिला संगठन धर्मशाला से भेजे गए संदेश पत्र को संगठन की अध्यक्षा दावा छोटूग ने पढ़कर सुनाया। इस मौके पर तेनजिंग उगजोम, तेनजिंग वंगमो, चेंजिंग छुइंग सहित अन्य लोग शामिल थे।
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राजभाषा ही राष्ट्र के प्रगति का आधार है
सारनाथ। किसी भी देश की भाषा उसकी निजता की पहचान होती है। अपनी भाषा के बिना व्यक्ति गूंगे के समान है। जब तक राजभाषा का प्रयोग हर व्यक्ति अपनी जिम्मेदारी नहीं समझेगा तब -तक भाषा का विकास संभव नहीं है। उक्त बातें सारनाथ स्थित केंद्रीय उच्च तिब्बती शिक्षा संस्थान के राजभाषा कार्यान्वयन समिति के वक्ताओं ने शुक्रवार को आयोजित कार्यशाला में कही। सहायक कुल सचिव प्रमोद सिंह ने राजभाषा से संबंधित नियमों व अधिनियमों पर अपने विचार व्यक्त किया। संचालन डॉ. अनुराग त्रिपाठी व धन्यवाद ज्ञापन डा रामजी सिंह ने किया। अतिथियों का स्वागत डॉ. सुशील कुमार सिंह ने किया।
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