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आस्था का महापर्व नहाय-खाय के साथ आरंभ
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भगवान भास्कर की आराधना और लोक आस्था का महापर्व छठ नहाय खाय के साथ आरंभ हो गया। घरों में छठी मैया के गीत गूंजने लगे हैं तो घाट व कुंडों पर सफाई को अंतिम रूप दिया जा रहा है। कोरोना संक्रमण के कारण काफी एहतियात बरती जा रही है।
बुधवार को छठ पूजन वाले घरों की रौनक बदली-बदली नजर आई। कहीं सफाई हो रही थी तो कहीं पूजा की तैयारियां। गीत गवनई संग घर व खास तौर पर पूजा गृह को स्वच्छ किया गया। वहीं घाट पर घाट छेंकने और वेदी बनाने का काम भी चलता रहा। नहाय खाय की रस्म के लिए सबसे पहले महिलाओं ने गंगा स्नान किया। अधिकांश व्रती महिलाओं ने घरों में स्नान को प्राथमिकता दी। इसके बाद भगवान भाष्कर की पूजा करके कद्दू, नया चावल और चने की दाल का भोग लगाया गया। इसके बाद प्रसाद स्वरूप ग्रहण करके भगवान भाष्कर की आराधना के निमित्त आत्म शुद्धता का संकल्प लिया गया। गंगा घाट और कुंडों पर तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। हालांकि गंगा के किनारे कई घाटों पर अभी तक सफाई का काम अधूरा है। वरुणा के तट पर भी वेदी बनाने का काम चलता रहा। वहीं बरेका के सूर्य सरोवर पर भी तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। वहां पर बिना कोरोना रिपोर्ट के किसी को भी पूजा की अनुमति नहीं दी जाएगी।
छठ के दूसरे दिन बृहस्पतिवार को कार्तिक शुक्ल पंचमी को व्रती दिन भर का उपवास रखने के बाद शाम को भोजन करती हैं। इसे खरना कहा जाता है। प्रसाद के रूप में गन्ने के रस में बने हुए चावल की खीर के साथ दूध, चावल का पिठ्ठा और घी चुपड़ी रोटी बनाई जाती है।
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बुधवार को छठ पूजन वाले घरों की रौनक बदली-बदली नजर आई। कहीं सफाई हो रही थी तो कहीं पूजा की तैयारियां। गीत गवनई संग घर व खास तौर पर पूजा गृह को स्वच्छ किया गया। वहीं घाट पर घाट छेंकने और वेदी बनाने का काम भी चलता रहा। नहाय खाय की रस्म के लिए सबसे पहले महिलाओं ने गंगा स्नान किया। अधिकांश व्रती महिलाओं ने घरों में स्नान को प्राथमिकता दी। इसके बाद भगवान भाष्कर की पूजा करके कद्दू, नया चावल और चने की दाल का भोग लगाया गया। इसके बाद प्रसाद स्वरूप ग्रहण करके भगवान भाष्कर की आराधना के निमित्त आत्म शुद्धता का संकल्प लिया गया। गंगा घाट और कुंडों पर तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। हालांकि गंगा के किनारे कई घाटों पर अभी तक सफाई का काम अधूरा है। वरुणा के तट पर भी वेदी बनाने का काम चलता रहा। वहीं बरेका के सूर्य सरोवर पर भी तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। वहां पर बिना कोरोना रिपोर्ट के किसी को भी पूजा की अनुमति नहीं दी जाएगी।
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छठ के दूसरे दिन बृहस्पतिवार को कार्तिक शुक्ल पंचमी को व्रती दिन भर का उपवास रखने के बाद शाम को भोजन करती हैं। इसे खरना कहा जाता है। प्रसाद के रूप में गन्ने के रस में बने हुए चावल की खीर के साथ दूध, चावल का पिठ्ठा और घी चुपड़ी रोटी बनाई जाती है।
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