{"_id":"6adb49b34ba7e14a4f02d6ed","slug":"varanasi-bhu-professor-to-showcase-designs-rooted-in-lanes-ghats-and-crafts-of-banaras-at-an-event-in-goa-2026-10-23","type":"story","status":"publish","title_hn":"वाराणसी: गोवा में बनारस की गलियो, घाटों, शिल्प में छिपी डिजाइन बताएंगे बीएचयू के प्रोफेसर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
वाराणसी: गोवा में बनारस की गलियो, घाटों, शिल्प में छिपी डिजाइन बताएंगे बीएचयू के प्रोफेसर
Fri, 23 Oct 2026 05:19 PM IST
Pragati Chand
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
Published by: Pragati Chand
Updated Fri, 23 Oct 2026 05:19 PM IST
सार
प्रो. मनीष अरोड़ा 23 अक्तूबर को गोवा में होने वाले इंटरनेशनल डिजाइन कार्यक्रम में बनारस की सांस्कृतिक जीवनशैली, पारंपरिक शिल्प, स्थानीय आजीविका और रोजमर्रा के मानवीय व्यवहार पर आधारित डिजाइन-बुद्धिमत्ता को समकालीन डिजाइन के संदर्भ में प्रस्तुत करेंगे।
विज्ञापन
बनारस हिंदी विश्वविद्यालय, BHU
- फोटो : X (@bhupro)
विस्तार
बीएचयू दृश्य कला संकाय के व्यावहारिक कला विभाग के हेड प्रो. मनीष अरोड़ा गोवा में आयोजित इंटरनेशनल डिजाइन कार्यक्रम में बनारस की गलियों, घाटों, शिल्प से रूबरू कराएंगे। डिजाइन डेज 26 विषय पर आधारित इस कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए वह गोवा के लिए रवाना हो गए हैं।
विज्ञापन
विश्वविद्यालय के दृश्य कला संकाय के डिजाइन इनोवेशन सेंटर की ओर से डिजाइन की बारीकियों के बारे में विद्यार्थियों को प्रशिक्षण दिया जाता है। प्रो. मनीष अरोड़ा 23 अक्तूबर को गोवा में होने वाले इंटरनेशनल डिजाइन कार्यक्रम में बनारस की सांस्कृतिक जीवनशैली, पारंपरिक शिल्प, स्थानीय आजीविका और रोजमर्रा के मानवीय व्यवहार पर आधारित डिजाइन-बुद्धिमत्ता को समकालीन डिजाइन के संदर्भ में प्रस्तुत करेंगे।
विज्ञापन
उन्होंने बताया कि प्रस्तुति का शीर्षक ‘द सिटी इज द इंटरफेस-बनारस इज ए लिविंग डिजाइन सिस्टम’ है। इसका आशय है कि शहर केवल इमारतों, सड़कों और सार्वजनिक स्थलों का समूह नहीं बल्कि लोगों, स्थानों, स्मृतियों, आवागमन, अर्थव्यवस्था और संस्कृति के बीच विकसित होने वाली एक जीवोत व्यवस्था भी है।
विज्ञापन
प्रो. मनीष के अनुसार कार्यक्रम में डिजाइन, तकनीक, वास्तुकला, इंजीनियरिंग, शिक्षा और अन्य रचनात्मक क्षेत्रों से जुड़े लोगों के बीच विचार-विमर्श तथा सहयोग को महत्व दिया जा रहा है। शहर की संकरी गलियाँ, घाटों पर नावों का संचालन, बुनकरों के करघे, पारंपरिक बाजार और चाय-पान की दुकानों पर होने वाले संवाद इन सभी पर वह अपनी बात रखेंगे।