फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   Vaishakh Purnima 2024 devotees will dip in Ganga And see ashes of Tathagat

Vaishakh Purnima 2024: वैशाख पूर्णिमा पर गंगा में पुण्य की लगाएंगे डुबकी, होंगे तथागत के अस्थिकलश के दर्शन

Mon, 20 May 2024 07:15 PM IST
प्रगति चंद अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: प्रगति चंद Updated Mon, 20 May 2024 07:15 PM IST
सार

वैशाख पूर्णिमा 23 मई को है। इस दिन शहर के कई हिस्सों में आयोजन किए जाएंगे। वैशाख पूर्णिमा को लेकर लोग तैयारियों में जुट गए हैंय़। इस दिन धम्म यात्रा भी निकलेगी। वहीं लोग गंगा में पुण्य की डुबकी भी लगाएंगे। 

विज्ञापन
Vaishakh Purnima 2024 devotees will dip in Ganga And see ashes of Tathagat
Vaishakh Purnima 2024 - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

वैशाख पूर्णिमा पर गंगा के तट से लेकर सारनाथ तक आयोजनों की तैयारियां शुरू हो गई हैं। सारनाथ में जहां बौद्ध धर्मावलंबी तथागत के अस्थिकलश के दर्शन करेंगे। वहीं, गंगा के तट पर श्रद्धालु पुण्य की डुबकी लगाएंगे। 23 मई को वैशाख पूर्णिमा पर शहर के मंदिरों में भी विविध अनुष्ठान होंगे।

विज्ञापन


पंचांग के अनुसार वैशाख पूर्णिमा 22 मई की शाम 7:47 बजे से शुरू होकर 23 मई की शाम 7:22 बजे तक रहेगी। उदया तिथि के अनुसार स्नान-दान के लिए शुभ मुहूर्त 23 मई को सुबह 4:04 बजे से लेकर सुबह 4:45 बजे तक रहेगा। इस दौरान चंद्रोदय का समय शाम 7:12 बजे रहेगा। वैशाख पूर्णिमा के दिन मां लक्ष्मी और चंद्रमा के साथ ही चांदी के सिक्कों की भी पूजा करना शुभ माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार, वैशाख पूर्णिमा के दिन चांदी के सिक्कों की पूजा से कुंडली में चंद्रमा की स्थिति मजबूत होती है।

विज्ञापन

विहाराधिपति और महाबोधि सोसाइटी ऑफ इंडिया के संयुक्त सचिव भिक्षु सुम्मितानंद थेरो के मार्गदर्शन में समस्त बौद्ध संगठन और बुद्ध विहारों की ओर से वैशाख पूर्णिमा का आयोजन किया जाएगा। वैशाख पूर्णिमा पर देश-विदेश से भिक्षु संघ और उपासकों का आगमन हो रहा है। अतिथियों के भोजन और रहने का प्रबंध स्थानीय बुद्ध विहारों में किया जा रहा है।

धम्म शिक्षण संस्थान के संस्थापक भिक्षु चंदीमा थेरो ने बताया कि वैशाख पूर्णिमा के महापर्व पर तथागत बुद्ध के पवित्र अस्थि-धातु के दर्शन, धम्म-सभा और धम्मयात्रा जैसे विशेष आयोजन होंगे। वैशाख पूर्णिमा को बौद्ध धर्म में बहुत ही पवित्र स्थान प्राप्त है। वैशाख पूर्णिमा के दिन भगवान बुद्ध का राजकुमार सिद्धार्थ के रूप में जन्म हुआ। 

छह वर्षों के कठोर तपस्या के बाद वैशाख पूर्णिमा के दिन ही बोधि वृक्ष के नीचे उन्होंने बुद्धत्व को प्राप्त किया। ज्ञान प्राप्ति के बाद 45 वर्षों तक लोक कल्याण का जीवन पूर्ण करके वैशाख पूर्णिमा के दिन तथागत बुद्ध ने कुशीनगर शालवान में महापरिनिर्वाण को प्राप्त किया था। तथागत बुद्ध के जीवन से जुड़ी इन तीन प्रमुख घटनाओं के कारण इसे तिविध पावनी वैशाख पूर्णिमा कहा जाता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed