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दवाओं की अधिकता सेहत के लिए खतरनाक, मानक से कम डोज पर भी ठीक हो सकती है बीमारी
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
Updated Tue, 14 Nov 2017 12:22 AM IST
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मानक से कम दवा देने पर भी ठीक हो सकती है बीमारी
- फोटो : FILE PHOTO
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किसी भी बीमारी में दवा सेवन के लिए निर्धारित मानक से अधिकता भी सेहत के लिए खतरनाक हो सकती है। ऐसे में मानक से कम डोज देने से भी संबंधित बीमारी पर नियंत्रण पाया जा सकता है। इससे मरीज की सेहत के साथ-साथ उसका आर्थिक बचत भी होगा।
एम्स नई दिल्ली के जैव सांख्यिकी विभाग में हुए शोध में ये परिणाम आए हैं। सोमवार को बीएचयू सांख्यिकी विभाग में आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी में भाग लेने आए प्रोफेसर डॉ. एसएन द्विवेदी ने बातचीत में ये जानकारी दी।
विज्ञान संस्थान के संगोष्ठी संकुल में उद्घाटन समारोह के बाद बातचीत में डॉ. द्विवेदी ने बताया कि दवाओं के निर्माण, उसके सेवन की मात्रा का निर्धारण सहित इससे जुड़े कई महत्वपूर्ण कार्यों में सांख्यिकी का योगदान अहम है। बताया कि विभाग में थायरायड कैंसर की बीमारी के इलाज को लेकर हुए शोध के बाद 2012 में एक जर्नल में इसे प्रकाशित भी कराया जा चुका है।
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इसमें यह पाया गया है कि थायरायड की बीमारी में वर्तमान में दिए जाने वाले दवाओं के डोज को अगर कम कर दिया जाए तो भी इसका कोई साइड इफेक्ट नहीं होगा। अमूमन मानक से अधिक डोज पर साइड इफेक्ट का खतरा अधिक रहता है। कम डोज में भी इससे निजात मिल सकता है।
इस विधि को लागू किया जाए तो यह आमजन के लिए हितकर होगा। उधर संगोष्ठी के उदघाटन अवसर पर बतौर मुख्य अतिथि एलएन मिथिला विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.एसके सिंह ने बिग डेटा के विश्लेषण, विभिन्न सांख्यिकी सॉफ्टवेयर के अनुप्रयोग और सामान्य जनजीवन में सांख्यिकी की महत्ता पर प्रकाश डाला।
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एम्स नई दिल्ली के जैव सांख्यिकी विभाग में हुए शोध में ये परिणाम आए हैं। सोमवार को बीएचयू सांख्यिकी विभाग में आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी में भाग लेने आए प्रोफेसर डॉ. एसएन द्विवेदी ने बातचीत में ये जानकारी दी।
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विज्ञान संस्थान के संगोष्ठी संकुल में उद्घाटन समारोह के बाद बातचीत में डॉ. द्विवेदी ने बताया कि दवाओं के निर्माण, उसके सेवन की मात्रा का निर्धारण सहित इससे जुड़े कई महत्वपूर्ण कार्यों में सांख्यिकी का योगदान अहम है। बताया कि विभाग में थायरायड कैंसर की बीमारी के इलाज को लेकर हुए शोध के बाद 2012 में एक जर्नल में इसे प्रकाशित भी कराया जा चुका है।
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इसमें यह पाया गया है कि थायरायड की बीमारी में वर्तमान में दिए जाने वाले दवाओं के डोज को अगर कम कर दिया जाए तो भी इसका कोई साइड इफेक्ट नहीं होगा। अमूमन मानक से अधिक डोज पर साइड इफेक्ट का खतरा अधिक रहता है। कम डोज में भी इससे निजात मिल सकता है।
इस विधि को लागू किया जाए तो यह आमजन के लिए हितकर होगा। उधर संगोष्ठी के उदघाटन अवसर पर बतौर मुख्य अतिथि एलएन मिथिला विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.एसके सिंह ने बिग डेटा के विश्लेषण, विभिन्न सांख्यिकी सॉफ्टवेयर के अनुप्रयोग और सामान्य जनजीवन में सांख्यिकी की महत्ता पर प्रकाश डाला।