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पीसीएस प्री परीक्षा: सामान्य ज्ञान, इतिहास के सवालों में उलझे अभ्यर्थी, वाराणसी में 90 केंद्रों पर हुई परीक्षा
Sun, 24 Oct 2021 10:04 PM IST
उत्पल कांत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Published by: उत्पल कांत
Updated Sun, 24 Oct 2021 10:04 PM IST
सार
यूपी पीसीएस की प्रारंभिक परीक्षा देने वाले अभ्यर्थियों के अनुसार सामान्य ज्ञान और इतिहास के सवालों ने उन्हें अधिक उलझाए रखा। दूसरी पाली में कॉमन एप्टिट्यूड की परीक्षा में सवाल कुछ आसान रहे।
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परीक्षा देकर बाहर निकलते परीक्षार्थी
- फोटो : amar ujala
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विस्तार
लोक सेवा आयोग की ओर से रविवार को आयोजित यूपी पीसीएस की प्रारंभिक परीक्षा वाराणसी में 90 केंद्रों पर कराई गई। केंद्रों पर पुलिस की तैनाती के साथ ही खुफिया विभाग के लोग भी सक्रिय रहे। परीक्षा देने वाले अभ्यर्थियों के अनुसार सामान्य ज्ञान और इतिहास के सवालों ने उन्हें अधिक उलझाए रखा।
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इस बार कोरोना और कैबिनेट की ओर से किए जाने वाले कई फैसलों पर आधारित सवाल भी पूछे गए थे। कोरोना काल में हुई इस परीक्षा में थर्मल स्क्रीनिंग के साथ ही मास्क की जांच के बाद ही अभ्यर्थियों को अंदर जाने की इजाजत मिली।
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सुबह 9:30 बजे से सामान्य अध्ययन की पहली पाली की परीक्षा के लिए वाराणसी और आसपास के इलाकों से बहुत से अभ्यर्थी सुबह 7 बजे ही केंद्र पहुंच गए। दोपहर 2:30 से 4:30 बजे तक हुई दूसरी पाली में कॉमन एप्टिट्यूड की परीक्षा में सवाल कुछ आसान रहे।
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शिवपुर की प्रियंका यादव ने कहा कि पेपर में इस बार करंट अफेयर्स के काफी उलझाऊ सवाल पूछे गए। इस वजह से कुछ अधिक समय लगा। पिछले छह महीने पहले की महत्वपूर्ण घटनाओं, फैसलों को भी इसमें शामिल किया गया था।
सारनाथ के रामकुमार ने कहा कि करेंट अफेयर्स तो कुछ अच्छा रहा, लेकिन इस बार इतिहास के ज्यादत्तर प्रश्न मॉडल टाइप के थे। इसे हल करने में समस्या हो रही थी। कई प्रश्न काफी कठिन पूछे गए थे, उन्हें हल करने में समय काफी लगा।
भदोही के धीरज ने कहा कि मध्यकालीन इतिहास के प्रश्न औसत से थोड़े कठिन आए थे। बहुत से ऐसे सवाल रहे जिसे हल करने में औसतन अधिक समय लग गया। यहीं कारण है कि इसका जवाब देने में अधिक समय भी लग गया।
सारनाथ के रामकुमार ने कहा कि करेंट अफेयर्स तो कुछ अच्छा रहा, लेकिन इस बार इतिहास के ज्यादत्तर प्रश्न मॉडल टाइप के थे। इसे हल करने में समस्या हो रही थी। कई प्रश्न काफी कठिन पूछे गए थे, उन्हें हल करने में समय काफी लगा।
भदोही के धीरज ने कहा कि मध्यकालीन इतिहास के प्रश्न औसत से थोड़े कठिन आए थे। बहुत से ऐसे सवाल रहे जिसे हल करने में औसतन अधिक समय लग गया। यहीं कारण है कि इसका जवाब देने में अधिक समय भी लग गया।