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फूलों से महकी तथागत की उपदेशस्थली
अमर उजाला ब्यूरो, वाराणसी
Updated Tue, 05 May 2015 02:41 AM IST
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बुद्ध पूर्णिमा पर गौतम बुद्ध की उपदेशस्थली पर नृत्य-संगीत के साथ स्वच्छता अभियान की अलख जगाई गई। सुबह धम्म यात्रा निकाली गई तो शाम को सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से तथागत के संदेशों का गुणगान किया गया। धर्म सभा में आतंकवाद, भ्रष्टाचार की सफाई और प्रेम-करुणा के संचार पर रोशनी डाली गई। इस दौरान बौद्ध मंदिरों को फूलों और रंग-बिरंगी लतर से सजाया गया था।
बतौर मुख्य अतिथि मंडलायुक्त आरएम श्रीवास्तव ने धर्मसभा का शुभारंभ किया। कहा कि बुद्ध के संदेशों को आत्मसात कर आतंकवाद, भ्रष्टाचार से निबटा जा सकता है। संकट मोचन मंदिर के महंत प्रो. विश्वंभर नाथ मिश्र ने कहा कि सारनाथ बुद्ध के ज्ञान अवतार का केंद्र होने की वजह से आध्यात्मिक ऊर्जा से भरा है। काशी मुक्ति के त्रिदेव पर आश्रित मानी जाती है। इससे बौद्ध दर्शन अलग नहीं है। आचार्य वागीश शास्त्री ने कहा कि धर्म वस्तुत: नैतिकता है। अहिंसा की जहां प्रतिष्ठा होती है, उसके संसर्ग में प्राणी सर्वत्र शांति की प्रतिष्ठा प्राप्त करता है।
तिब्बती विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एलएन शास्त्री ने कहा कि तथागत ने मनुष्य को नीर, क्षीर विवेकी होने का संदेश दिया है। मूलगादी मठ, कबीर चौरा के महंत आचार्य विवेक दास ने कहा कि प्रकृति में निहित प्रेम, सत्य, अहिंसा और करुणा को धर्म के रूप में अपनाना होगा। इस मौके पर क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी रवींद्र मिश्र, प्रो. परमानंद सिंह, प्रो. राममोहन पाठक, अयूब ए खान आदि मौजूद थे। संचालन डॉ. बेनी माधव ने किया।
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बतौर मुख्य अतिथि मंडलायुक्त आरएम श्रीवास्तव ने धर्मसभा का शुभारंभ किया। कहा कि बुद्ध के संदेशों को आत्मसात कर आतंकवाद, भ्रष्टाचार से निबटा जा सकता है। संकट मोचन मंदिर के महंत प्रो. विश्वंभर नाथ मिश्र ने कहा कि सारनाथ बुद्ध के ज्ञान अवतार का केंद्र होने की वजह से आध्यात्मिक ऊर्जा से भरा है। काशी मुक्ति के त्रिदेव पर आश्रित मानी जाती है। इससे बौद्ध दर्शन अलग नहीं है। आचार्य वागीश शास्त्री ने कहा कि धर्म वस्तुत: नैतिकता है। अहिंसा की जहां प्रतिष्ठा होती है, उसके संसर्ग में प्राणी सर्वत्र शांति की प्रतिष्ठा प्राप्त करता है।
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तिब्बती विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एलएन शास्त्री ने कहा कि तथागत ने मनुष्य को नीर, क्षीर विवेकी होने का संदेश दिया है। मूलगादी मठ, कबीर चौरा के महंत आचार्य विवेक दास ने कहा कि प्रकृति में निहित प्रेम, सत्य, अहिंसा और करुणा को धर्म के रूप में अपनाना होगा। इस मौके पर क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी रवींद्र मिश्र, प्रो. परमानंद सिंह, प्रो. राममोहन पाठक, अयूब ए खान आदि मौजूद थे। संचालन डॉ. बेनी माधव ने किया।
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