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यूपीः परिजनों ने कर दिया था अंतिम संस्कार, पर फेसबुक की मदद से काशी में मिला....

Thu, 30 Jan 2020 12:19 AM IST
स्‍वाधीन तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: स्‍वाधीन तिवारी Updated Thu, 30 Jan 2020 12:19 AM IST
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UP: The family had performed the last rites, but with the help of Facebook, they met in Kashi.
नौ साल बाद अपने परिजनों संग बैठे उमेश यादव - फोटो : amar ujala

घर वालों ने जिसको मरा हुआ मानकर अंतिम संस्कार कर दिया था, वह काशी में जिंदा मिला। सामाजिक कार्यकर्ता अमन कबीर के प्रयास ने बिहार बोर्ड के टापर उमेश यादव को उसके परिजनों से मिला दिया। उमेश को जिंदा देखकर परिजनों की आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। उमेश के भाई रामानुज राजातालाब तहसील में कार्यरत हैं। परिजन अमन को धन्यवाद देते हुए उमेश को अपने साथ लेकर रवाना हो गए। बिहार के गया के अरवल के रहने वाले उमेश यादव 2010 से घर से लापता हो गए थे।

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अमन ने बताया कि बुधवार को वह पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन पर कुछ काम से गया था। वहां उमेश दिखाई दिए। उन्होंने अमन से बात की और घर जाने को कहा। अमन ने उनका पता पूछा तो वह सही-सही नहीं बता सके। उन्हें वहां से उठाया और नहलाकर दाढ़ी बनवाकर तस्वीर फेसबुक पेज पर डाली। कुछ देर बाद बिहार के गया निवासी एक व्यक्ति का फोन आया।
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उसने बताया कि उमेश बिहार के रहने वाले हैं। इनके पिता राजेश्वर यादव पीडब्ल्यूडी में इंजीनियर थे और भाई रामानुज यादव राजातालाब तहसील में कार्यरत हैं। अमन कबीर उमेश को लेकर मुढ़ैला स्थित रामानुज यादव के निवास पर पहुंचे। घर वाले उमेश को देखकर खुशी से रो पड़े। रामानुज यादव ने बताया कि उमेश उनके बड़े भाई हैं। उन्होंने 1984 में बिहार बोर्ड परीक्षा में बिहार टाप किया था।
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UP: The family had performed the last rites, but with the help of Facebook, they met in Kashi.
Facebook - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

उसके छह महीने बाद वह मानसिक रूप से डिस्टर्ब हो गए थे। पिताजी ने इलाज करवाया लेकिन आगे पढ़ाई नहीं कर सके। रामानुज ने बताया कि उसके बाद अक्तूबर 2010 में वह घर छोड़कर कहीं चले गए थे। उन्हें कई जगह ढूंढा गया पर नहीं मिले। उसके बाद इनकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई गई। फिर हमने लोगों के कहने पर उनका सांकेतिक दाह संस्कार भी कर दिया। उमेश के दो पुत्र और दो पुत्रियां। एक पुत्री की शादी पिछले साल हुई है।

घायलों और लावारिसों की मदद को तैयार रहते हैं अमन

काशी के अमन कबीर हमेशा लावारिसों और घायलों की मदद के लिए तैयार रहते हैं। शहर में कहीं से भी सूचना मिलने पर वह मदद के लिए बाइक एंबुलेंस लेकर पहुंच जाते हैं। घायल को प्राथमिक उपचार के बाद मंडलीय चिकित्सालय में भर्ती कराने की जिम्मेदारी वह स्वयं उठाते हैं। उन्होंने लावारिसों के लिए अपने घर में कबीर छाया कुटिया भी बना रखी है।

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