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कोर्ट में बतौर गवाह पेश हुए यूपी के डीजीपी, 31 साल पुराना है मामला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Updated Mon, 30 Apr 2018 10:18 PM IST
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डीजीपी ओपी सिंह
- फोटो : अमर उजाला
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रिश्वत देने के प्रयास के एक मामले में सोमवार को यूपी के डीजीपी ओपी सिंह की गवाही कोर्ट में हुई। बतौर गवाह अपना बयान दर्ज कराने के लिए विशेष न्यायाधीश (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) दिवाकर प्रसाद चतुर्वेदी की कोर्ट में पेश हुए।
डीजीपी ने अभियोजन की कथानक का समर्थन करते हुए घटना के समय मौजूद रहने की बात कही। बयान दर्ज होने के बाद बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने उनसे जिरह किया। बयान और जिरह की कार्रवाई पूर्ण होने के बाद कोर्ट ने इस मामले में सुनवाई के लिए अगली तिथि 31 मई नियत कर दी।
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अभियोजन पक्ष के मुताबिक भदोही के सुरियावां के महुआपुर गांव निवासी लालचंद उपाध्याय व सुरेश चंद्र उपाध्याय जमीन से संबंधित एक मामले में 13 फरवरी 1987 को उप संचालक चकबंदी आरके दूबे के सरकारी आवास पर रिश्वत देने का प्रयास कर रहे थे।
उस वक्त तत्कालीन एएसपी व वर्तमान में डीजीपी ओपी सिंह भी मौके पर मौजूद थे। चकबंदी अधिकारी आरके दूबे ने रिश्वत देने का प्रयास कर रहे दोनों लोगों को पुलिस के हवाले करा दिया था।
सेंट्रल बार पहुंचे डीजीपी, बोले-न्यायपालिका का सम्मान सर्वोपरि
अदालत में गवाही के बाद सोमवार को डीजीपी ओपी सिंह सेंट्रल बार एसोसिएशन पहुंचे। डीजीपी ने कहा कि पुलिस और अधिवक्ताओं को सेमिनार आयोजित कर एक-दूसरे से बेहतर संवाद करना चाहिए। ऐसा प्रयोग लखनऊ में शुरू होने जा रहा है और वह चाहते हैं कि बनारस में भी इसकी शुरूआत हो। विभागीय विवेचक अधिवक्ताओं से कानूनी बारीकियां सीखें।
डीजीपी ने अभियोजन की कथानक का समर्थन करते हुए घटना के समय मौजूद रहने की बात कही। बयान दर्ज होने के बाद बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने उनसे जिरह किया। बयान और जिरह की कार्रवाई पूर्ण होने के बाद कोर्ट ने इस मामले में सुनवाई के लिए अगली तिथि 31 मई नियत कर दी।
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अभियोजन पक्ष के मुताबिक भदोही के सुरियावां के महुआपुर गांव निवासी लालचंद उपाध्याय व सुरेश चंद्र उपाध्याय जमीन से संबंधित एक मामले में 13 फरवरी 1987 को उप संचालक चकबंदी आरके दूबे के सरकारी आवास पर रिश्वत देने का प्रयास कर रहे थे।
उस वक्त तत्कालीन एएसपी व वर्तमान में डीजीपी ओपी सिंह भी मौके पर मौजूद थे। चकबंदी अधिकारी आरके दूबे ने रिश्वत देने का प्रयास कर रहे दोनों लोगों को पुलिस के हवाले करा दिया था।
सेंट्रल बार पहुंचे डीजीपी, बोले-न्यायपालिका का सम्मान सर्वोपरि
अदालत में गवाही के बाद सोमवार को डीजीपी ओपी सिंह सेंट्रल बार एसोसिएशन पहुंचे। डीजीपी ने कहा कि पुलिस और अधिवक्ताओं को सेमिनार आयोजित कर एक-दूसरे से बेहतर संवाद करना चाहिए। ऐसा प्रयोग लखनऊ में शुरू होने जा रहा है और वह चाहते हैं कि बनारस में भी इसकी शुरूआत हो। विभागीय विवेचक अधिवक्ताओं से कानूनी बारीकियां सीखें।
मंदिरों में श्रद्धालुओं के साथ न हो अभद्र व्यवहार
डीजीपी ओपी सिंह
- फोटो : अमर उजाला
डीजीपी ओपी सिंह ने सोमवार की सुबह कालभैरव मंदिर, काशी विश्वनाथ मंदिर और अन्नपूर्णा मंदिर में दर्शन-पूजन किया। इसके बाद उन्होंने काशी विश्वनाथ परिक्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया।
पढ़ेंः वाराणसी में यूपी पुलिस के मुखिया, जोन के दस जिलों के SP और थानेदारों का पढ़ाया पाठ
गर्भ गृह में धोती-कुर्ता पहने पुलिसकर्मियों की तैनाती को उन्होंने एसएसपी आरके भारद्वाज की अच्छी पहल बताया। कहा कि इस पहल से दर्शनार्थियों के मन में पुलिस का भय नहीं होगा।
उन्होंने श्रद्धालुओं से किसी तरह का दुर्व्यवहार न होने देने की हिदायत भी दी। बताया कि परिक्षेत्र में इंटीग्रेटेड कमांड सेंटर के जरिए सुरक्षा व्यवस्था और पुख्ता की जाएगी।
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गर्भ गृह में धोती-कुर्ता पहने पुलिसकर्मियों की तैनाती को उन्होंने एसएसपी आरके भारद्वाज की अच्छी पहल बताया। कहा कि इस पहल से दर्शनार्थियों के मन में पुलिस का भय नहीं होगा।
उन्होंने श्रद्धालुओं से किसी तरह का दुर्व्यवहार न होने देने की हिदायत भी दी। बताया कि परिक्षेत्र में इंटीग्रेटेड कमांड सेंटर के जरिए सुरक्षा व्यवस्था और पुख्ता की जाएगी।