यूपी पंचायत चुनाव: अब नए सिरे से तैयार होगी सीटों के आरक्षण की सूची, पचास फीसदी सीटों पर पड़ेगा असर
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हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब 2015 में हुए आरक्षण को आधार मानकर त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की सीटों के लिए नई सूची तैयार होगी। पहले से जारी आरक्षण की सूची अवैध हो गई है। इसके चलते तकरीबन 50 प्रतिशत सीटों पर असर पड़ेगा। इसी के साथ गंवई राजनीति का समीकरण बदल गया है। इससे चुनाव की तैयारी करने वाले दावेदारों को झटका लगा है। उधर, जिनकी सीट आरक्षित हो गई थी, वे मायूस हो गए थे। लेकिन अब उनके चेहरे भी खिल गए हैं। क्योंकि अब नए सिरे से आरक्षण होगा और नई सूची जारी की जाएगी। इसके लिए 27 मार्च तक का समय दिया गया है।
वाराणसी के डीपीआरओ शास्वत आनंद सिंह ने बताया कि पहले 1995 को आधार मानकर आरक्षण सूची जारी की गई थी। अब 2015 के आधार पर आरक्षण सूची जारी होगी। अभी आयोग से तारीख का एलान नहीं हुआ है। लेकिन 27 मार्च तक अंतिम सूची का प्रकाशन होना है। इस बीच आरक्षण की अनंतिम सूची जारी की जाएगी। इस पर दावे आपत्तियां लिए जाएंगे।
इसके बाद अंतिम सूची का प्रकाशन होगा। इसके चलते तकरीबन 50 प्रतिशत सीटों पर असर पड़ेगा। 2015 में जो सीटें ओबीसी थी, वे एससी या सामान्य होगी। इसी प्रकार जो सीटें एससी होंगी, वे ओबीसी या सामान्य होंगी। जो सीटें सामान्य हैं वे ओबीसी और एससी होंगी। इसके लिए आयोग से गाइडलाइन जारी की जाएगी।
आरक्षण के लिए आठ कटेगरी
चक्रानुक्रम में पहले अनुसूचित जनजाति महिला, फिर अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति महिला, अनुसूचित जाति, पिछड़ा वर्ग महिला, पिछड़ा वर्ग, महिला, सामान्य सीट होगी।
कहीं खुशी तो कहीं गम
मौजूदा आरक्षण व्यवस्था पर हाईकोर्ट की रोक के बाद कहीं खुशी तो कहीं गम है। उन दावेदारों को बड़ा झटका लगा है, जिन्होंने पोस्टर-बैनर छपवाकर प्रचार-प्रसार करना शुरू कर दिया था। उन्हें अब ये डर सताने लगा है कि कहीं अभी के आरक्षण में हाथ आई सीट 2015 की आरक्षण व्यवस्था के चलते हाथ से न निकल जाए। हालांकि वे दावेदार जिनके हाथ इस आरक्षण सूची से मायूसी लगी थी, वे उम्मीद लगाए बैठे हैं कि शायद नई व्यवस्था से कुछ बदलाव हो जाए। सीटों का उलटफेर हुआ तो शायद उन्हें अपनी मनमाफिक सीट से चुनावी मैदान में उतरने का मौका मिल जाए। कोर्ट के फैसले ने कई के चेहरे पर मायूसी तो कई के चेहरे पर चमक ला दी है।