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यूपी दिवस : सम्मानित होंगे शिक्षक, संगीतकार और कवि कृष्णकांत, काशी की कला-संस्कृति को दिलाई विदेशों में पहचान
Fri, 24 Jan 2025 03:53 AM IST
अमन विश्वकर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
Published by: अमन विश्वकर्मा
Updated Fri, 24 Jan 2025 03:53 AM IST
सार
कृष्णकांत शुक्ल ने ग्रामीण भारत के लोकगीतों पर भी शोध किया है। देश-विदेश में अपनी कला की प्रस्तुति दे चुके कृष्णकांत भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद आईसीसीआर के सदस्य हैं। इसके बैनर तले भी उन्होंने कई कार्यक्रमों की प्रस्तुति की है।
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शिक्षक, संगीतकार और कवि कृष्णकांत शुक्ला।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
शिक्षक, संगीतकार और कवि कृष्णकांत शुक्ला यूपी दिवस पर सम्मान पाकर काशी का मान बढ़ाएंगे। उनको शुक्रवार को लखनऊ में यूपी गौरव सम्मान से नवाजा जाएगा। सम्मान के लिए नाम तय होने की सूचना मिलते ही कृष्णकांत लखनऊ के लिए रवाना हो गए। अमर उजाला से बातचीत में उन्होंने सम्मान को बाबा का आशीर्वाद और गुरुओं की कृपा बताया।
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करौंदी निवासी कृष्णकांत शुक्ला के पिता स्व. प्रो.बीएम शुक्ला बीएचयू के प्रोफेसर और गोरखपुर विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति रहे हैं। जबकि माता स्व. प्रो. अन्नपूर्णा शुक्ला भी बीएचयू महिला महाविद्यालय की प्राचार्य रही हैं।
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भौतिक विज्ञानी के साथ ही संगीत और काव्य के क्षेत्र से जुड़ाव रखने वाले कृष्णकांत ने बताया कि पंडित कुमार गंधर्व और उस्ताद अली अकबर खान के शिष्य के रूप में जो कुछ भी सीखने और प्रस्तुत करने का मौका मिला है, वह गुरुओं की कृपा से ही हो रहा है। कृष्णकांत ने कबीर, गुरु गोरक्षनाथ, तुलसीदास, सूरदास, मीरा की कविताओं को भारतीय शास्त्रीय संगीत के आधार पर गए गीतों का अंग्रेजी में अनुवाद भी किया है।
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