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Varanasi: सारनाथ को ताजमहल से भी बड़ा पर्यटन केंद्र बनाने की क्षमता, यूनेस्को राजदूत ने दिए विकास के सुझाव

Tue, 04 Aug 2026 12:08 PM IST
Pragati Chand अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: Pragati Chand Updated Tue, 04 Aug 2026 12:08 PM IST
सार

यूनेस्को राजदूत सारनाथ में 2500 साल पुराना ड्रेनेज सिस्टम और धमेख की कारीगरी देख अचंभित हुए। उन्होंने मेडिटेशन सेंटर बनाने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि सारनाथ दुनिया भर के 50 करोड़ से अधिक बौद्ध अनुयायियों के लिए आध्यात्मिक चिंतन का प्रमुख केंद्र है।

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UNESCO Ambassador stated that Sarnath potential to become an even bigger tourism hub than Taj Mahal in Varanas
सारनाथ में यूनेस्को में भारत के स्थायी प्रतिनिधि व राजदूत विशाल वी. शर्मा - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

यूनेस्को में भारत के स्थायी प्रतिनिधि व राजदूत विशाल वी. शर्मा ने सोमवार को सारनाथ के पुरातात्विक उत्खनित स्थल परिसर में विश्व धरोहर पट्टिका का अनावरण किया। यूनेस्को समिति के 48वें सत्र के दौरान सारनाथ को विश्व धरोहर सूची में शामिल किए जाने के बाद यह भारत की 45वीं विश्व धरोहर संपत्ति बन गई है। इस अवसर पर उन्होंने पूरे परिसर और इंटरप्रेटेशन सेंटर का अवलोकन किया। 

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राजदूत शर्मा ने कहा कि सारनाथ दुनिया भर के 50 करोड़ से अधिक बौद्ध अनुयायियों के लिए आध्यात्मिक चिंतन का प्रमुख केंद्र है। यदि यहां की सुविधाओं और प्रचार-प्रसार पर सही दिशा में काम किया जाए, तो मन की शांति की तलाश में यहां आने वाले पर्यटकों की संख्या आगरा के ताज महल से भी अधिक हो सकती है। उन्होंने कहा कि यह पावन भूमि युवाओं को सत्य, अहिंसा, सजग जीवन शैली और समावेशी सामाजिक बदलाव के लिए प्रेरित करती है।
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सारनाथ संग्रहालय और ऐतिहासिक कलाकृतियों के गहन अध्ययन के दौरान राजदूत शर्मा ने भारत के राष्ट्रीय चिह्न ''चार सिंह शीर्ष'' (अशोक स्तंभ) और उसके धर्मचक्र को देखा और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के अधिकारियों को इनके रखरखाव के लिए विशेष सुझाव दिए। इसके बाद उन्होंने हिंदू और बुद्ध दीर्घाओं में रखी देवी-देवताओं और भगवान बुद्ध की प्रतिमाओं, चुनार के बलुआ पत्थरों पर उकेरी गई प्राचीन नक्काशी और ऐतिहासिक ईंटों का भी सूक्ष्म अध्ययन किया। धमेख स्तूप पर की गई बारीक कारीगरी को देखकर वे अचंभित रह गए और उन्होंने सराहना करते हुए कहा कि बिना किसी आधुनिक उपकरण या कंप्यूटर के उस काल में ऐसी अद्भुत नक्काशी करना अद्वितीय शिल्प कला का प्रमाण है।

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परिसर के निरीक्षण के दौरान राजदूत शर्मा ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के अधिकारियों को ग्रीन नर्सरी क्षेत्र में एक आधुनिक मेडिटेशन सेंटर (ध्यान केंद्र) विकसित करने की सलाह दी, जिससे वैश्विक पर्यटकों को शांतिपूर्ण अनुभव मिल सके। इसके साथ ही उन्होंने भगवान बुद्ध के चक्रमण स्थल पर स्पष्ट पदचिह्न बनाने का निर्देश दिया ताकि श्रद्धालु उनके बताए मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित हों। निरीक्षण के दौरान जब वे लगभग ढाई हजार वर्ष पुरानी प्राचीन जल निकासी (ड्रेनेज) प्रणाली के पास पहुंचे, तो यह जानकर हैरान रह गए कि वह व्यवस्था आज भी काम कर रही है। उन्होंने इस ऐतिहासिक अभियांत्रिकी के महत्व को देखते हुए तुरंत वहां विवरण बोर्ड (सूचना पट्ट) लगाने के निर्देश दिए।

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सारनाथ को विश्व धरोहर का दर्जा मिलने पर व्यापारियों में हर्ष
सारनाथ को विश्व धरोहर का दर्जा मिलने की खुशी में स्थानीय संस्थाओं ने राजदूत विशाल वी. शर्मा का नागरिक अभिनंदन किया। राष्ट्रीय फेरी पटरी ठेला व्यवसाई महासंघ के प्रतिनिधियों ने उन्हें लकड़ी का बना अशोक स्तंभ और अंगवस्त्र भेंटकर सम्मानित किया। वहीं सारनाथ टूरिस्ट गाइड एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने उन्हें भगवान बुद्ध की प्रतिमा भेंट कर इस ऐतिहासिक उपलब्धि के लिए आभार व्यक्त किया।

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