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एक साल में भूमिगत हो जाएंगे बिजली के तार

Sat, 09 Apr 2016 02:27 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी Updated Sat, 09 Apr 2016 02:27 AM IST
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Underground electric wires will be in a year
आईपीडीएस के तहत एप की लाचिंग करते केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल (बीच में)। साथ में मेयर, कमिश्नर, विधायक एवं अन्य।
केंद्रीय ऊर्जा राज्यमंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि एक साल में काशी में बिजली के सारे तार भूमिगत हो जाएंगे। यह काम इंटीग्रेटेड पावर डेवलपमेंट स्कीम (आईपीडीएस) के तहत होगा। गोयल ने शुक्रवार की शाम कबीर नगर में बिजली के तारों को भूमिगत करने के कार्य का भूमिपूजन करने के अवसर पर यह बात कही। गोयल ने कहा कि उत्तर प्रदेश में बिजली की कमी है। प्रदेश सरकार जरूरत के मुताबिक बिजली नहीं खरीद रही है।
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गोयल ने कहा कि दीनदयाल ग्राम ज्योति विकास योजना के तहत 12500 करोड़ रुपये प्रदेश सरकार को  दिया गया था। अब तक दो साल में मात्र तीन गांव में ही विद्युतीकरण का काम हुआ था। केंद्र में मोदी सरकार बनने के बाद यूपी में अब तक 1364 गांव में विद्युतीकरण हुआ है। केंद्रीय मंत्री ने इस मौके पर जनता को काम की निगरानी के लिए काशी-आईपीडीएस मोबाइल एप की लांचिंग की। इस दौरान पांच लोगों को एलईडी के 50 वाट के पांच पंखे बांटने के साथ योजना की शुरुआत की। प्रदेश में एक करोड़वां एलईडी बल्ब विभाग के एमडी एके सिंह को दिया।
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कार्यक्रम में मंत्री ने कहा कि  जिला विद्युत समिति कार्य की समीक्षा होगी। जनप्रतिनिधि और जनता को पूरी जानकारी देने के लिए ग्रामीण विद्युतीकरण अभियंता होंगे। जो जानकारी देते रहेंगे। हाल ही में विद्युत प्रवाह मोबाइल एप का लांच किया गया है। इसके माध्यम से हर पल बिजली की दरों के बारे में जानकारी मिलती है। कौन राज्य किस दर पर बिजली खरीद रहा है। इसकी भी जानकारी दी जा रही है। किसी भी योजना के स्वीकृत होने के बाद बहुत कम समय में धरातल पर कार्य की शुरुआत होना अपने आप में उपलब्धि है। वाराणसी से इस योजना की शुरुआत की है। इस अवसर पर मेयर रामगोपाल मोहले, भाजपा विधायकों में श्याम देव राय चौधरी, डॉ. ज्योत्सना श्रीवास्तव, रवींद्र जायसवाल, कमिश्नर नितिन रमेश गोकर्ण, नवाबगंज के पार्षद अनिल शर्मा आदि मौजूद रहे।
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केंद्रीय मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार ने सफाई के लिए राज्य सरकार को 32 करोड़ रुपये दिए हैं लेकिन अब तक वह पैसा यहां नहीं आया है। सीएसआर के तहत कंपनियों के माध्यम से 33 करोड़ रुपये से शहर की सफाई कराई जानी है। यहां आने पर पता चला कि रमना में कूड़ा को लेकर विवाद चल रहा है। इसके लिए एनटीपीसी के दो अधिकारियों को लगाया गया है। 
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