PFI के दो सदस्य उगलेंगे राज: 55 घंटे की पुलिस रिमांड मंजूर, कोर्ट ने कहा-'इस दौरान अधिवक्ता 20 मीटर दूर रहें'
बनारस से गिरफ्तार पीएफआई के दो सदस्यों की रिमांड की अवधि मंगलवार सुबह 10 बजे से 29 सितंबर की शाम 5 बजे तक यानी 55 घंटे रहेगी। अदालत ने कहा है कि रिमांड के दौरान अधिवक्ता 20 मीटर दूर रहेंगे।
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आदमपुर थाना क्षेत्र से गिरफ्तार पीएफआई सदस्य मोहम्मद शाहिद और रिजवान अहमद को अपर सिविल जज जूनियर डिवीजन अष्टम सौम्या अरुण की अदालत ने तीन दिनों की पुलिस कस्टडी रिमांड पर देने का आदेश दिया है। रिमांड की अवधि मंगलवार सुबह 10 बजे से 29 सितंबर की शाम 5 बजे तक यानी 55 घंटे रहेगी। अदालत ने कहा है कि रिमांड के दौरान अधिवक्ता 20 मीटर दूर रहेंगे।
अदालत ने कहा कि प्रपत्रों के अवलोकन से स्पष्ट है कि आरोपी 24 सितंबर से न्यायिक अभिरक्षा में है। विवेचक द्वारा बताया गया कि आरोपी मो. शाहिद के घर की तलाशी लेकर उसके द्वारा प्रयोग किए गए मोबाइल को प्राप्त करने व आरोपियों के निशानदेही पर पीएफआई कार्यालय की तलाश के बाबत पूछताछ की जानी है। कोर्ट ने इन तथ्यों के मद्देनजर तीन के पुलिस कस्टडी रिमांड पर देने का आदेश दिया।
इसके पहले आरोपी मो. शाहिद के अधिवक्ता की दलील थी कि आरोपी को पुलिस ने गैर कानूनी तरीके से हिरासत में लिया। करीब 60 घंटे पुलिस हिरासत में रखने के बाद कोर्ट में पेश किया और गिरफ्तार करने का कारण व आधार भी नहीं बताया गया। पुलिस रिमांड देने पर आरोपियों को प्रताड़ित किया जाएगा।
पुलिस ने मांगी थी सात दिन की कस्टडी रिमांड
अभियोजन की ओर से पुलिस कस्टडी रिमांड का आवेदन विवेचक सहायक पुलिस आयुक्त त्रिलोचन त्रिपाठी ने कोर्ट में देकर सात दिन के लिए पुलिस कस्टडी रिमांड पर देने का अनुरोध किया गया था। अदालत में एपीओ नागेंद्र मिश्र ने अभियोजन पक्ष की दलीलें रखीं। इस पर दोनों आरोपियों को सोमवार को कोर्ट में तलब किया था। दोनों आरोपियों को कड़ी सुरक्षा के बीच अदालत में पेश किया गया था।
सुनवाई के बाद अदालत ने तीन दिन की पुलिस रिमांड मंजूर की। कोर्ट में पुलिस की ओर से हवाला दिया कि आरोपियों के घर की तलाशी, पीएफआई से जुड़े अन्य सदस्यों के बाबत जानकारी, फंडिंग आदि जानकारी के लिए दोनों से पूछताछ बेहद अहम है। एटीएस के अनुसार गिरफ्तार जैतपुरा थाना अंतर्गत कच्चीबाग निवासी रिजवान अहमद और आदमपुर के आलमबाग निवासी मोहम्मद शाहिद हैं।
दोनों के मोबाइल और लैपटॉप से पीएफआई से संबंधित दस्तावेज और अन्य तस्वीरें भी मिली हैं। पूछताछ में सामने आया कि दोनों पीएफआई के लिए फंड जुटाते थे और मुस्लिम युवकों को भड़काते थे। पीएफआई के संदेश को प्रसारित करने के साथ ही दोनों कहते थे कि ज्ञानवापी प्रकरण की लंबी लड़ाई लड़ी जाएगी।
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