मीठा खाते हैं तो घबराने की जरूरत नहीं, मधुमेह को हल्दी और आंवले का चूर्ण कर देगा खत्म
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अधिकांश लोगों को यही जानकारी होती है कि अगर वह मीठा अधिक खा रहे हैं तो ही मधुमेह होगा। लेकिन ऐसा नहीं है। अच्छी सेहत के लिए मीठा खाना भी जरूरी है। अगर सावधानी बरत रहे हैं तो आप मधुमेह से बच सकते हैं। कई उपाय ऐसे हैं जो आप घर में ही कर सकते हैं। यदि मधुमेह शुरुआती दौर में है तो हल्दी और आंवले का चूर्ण रोज सुबह लेने से उपयोगी साबित हो सकता है।
आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति में 20 प्रकार के मधुमेह का जिक्र है। बेहतर जीवन शैली से इनमें से 16 प्रकार की डायबिटीज से बचा जा सकता है। बीएचयू आयुर्वेद संकाय के वैद्य सुशील दूबे के अनुसार, 10 को कफज प्रमेह, 6 को पित्तज और चार को वातज कहा जाता है।
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इसमें कफज, पित्तज को सावधानी से ठीक किया जा सकता है, लेकिन इसके प्रति लापरवाही से यह वातज में बदल जाएगा। इन सबका जुड़ाव यूरिन से होता है। वेलनेस सेंटर में हर सप्ताह ऐसे 10 से 20 मरीज ऐसे आते हैं जो मधुमेह के शुरुआती 16 कारणों से प्रभावित हैं।
चूर्ण का ऐसे करें सेवन :
वैद्य सुशील दूबे के मुताबिक, करीब 100 ग्राम आंवला चूर्ण और 100 ग्राम हल्दी चूर्ण को अच्छे से मिला लें। इस चूर्ण को प्रतिदिन सुबह एक चम्मच लेना होगा। मधुमेह के अगर शुरुआती लक्षण होंगे तो करीब 15 दिन बाद इसका असर दिखने लगेगा।
मधुमेह के लक्षण :
बार-बार पेशाब लगना, कमजोरी महसूस होना, आलस्य और नींद का पूरा न होना, हमेशा जम्हाई आना, बालों में घनेपन की कमी, मुंह हमेशा मीठा लगना, हाथ पैर में शून्यता और जलन महसूस होना, मुंह-कंठ का सूखना।
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यह बरतें सावधानी :
देर तक न सोयें, सूर्योदय से पहले बिस्तर छोड़ दें। दही का सेवन कम से कम करें। मछली खाने से परहेज करें। नया अन्न का सेवन न करें। टहलने के दौरान नाक और मस्तक पर पसीना आए तो टहलने से बचें।
ये करें उपाय :
पुराने अन्न का सेवन करें। रोज सुबह व्यायाम करना जरूरी है। 40 साल के बाद वालों के लिए योग जरूरी है। बीमारी छिपाए नहीं, बल्कि चिकित्सक से सलाह लें।
आयुर्वेद संकाय के संकायप्रमुख प्रो यामिनी भूषण त्रिपाठी ने बताया कि असावधानी से ही इस तरह की बीमारी शुरू होती है। जीवन शैली में सुधार और खानपान पर ध्यान देने से मधुमेह से बचा जा सकता है। वेलनेस सेंटर में डायबिटीज से राहत के उपाय भी बताए जा रहे हैं।