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काशी में 492 साल पहले तुलसी दास ने शुरू की थी कृष्ण लीला

Mon, 29 Oct 2018 03:33 PM IST
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,वाराणसी
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,वाराणसी Updated Mon, 29 Oct 2018 03:33 PM IST
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Tulsi das started krishna leela in varanasi for 492 years ago
तुलसीघाट पर नाग नथैया की लीला देखने के लिए उमड़ा हुजूम। - फोटो : file photo
काशी के चार लक्खा मेले में शामिल कृष्ण लीला का आयोजन 31 अक्तूबर से तुलसी घाट पर किया जाएगा। लीला के बीच में एक दिन गंगा किनारे होने वाले नाग नथैया का मंचन देखने के लिए बड़ी संख्या में भीड़ उमड़ती है। गोस्वामी तुलसीदास द्वारा भदैनी में लगभग 492 साल पहले कार्तिक माह में शुरू की गई इस 22 दिनों की लीला की परंपरा आज भी कायम है।
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इसमें भगवान कृष्ण के जन्मोत्सव से लेकर उनके द्वारा किए गए पूतना वध, कंस वध, गोवर्धन पर्वत सहित कई लीलाओं का मंचन किया जाता है। एक माह पहले कृष्ण बलराम और राधिका चयन किया जाता है। जिनकी ट्रेनिंग एक माह पहले से ही चलती है।
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संकट मोचन मंदिर के महंत प्रो विश्वंभरनाथ मिश्रा का कहना है कि तुलसीदास ने इस लीला में सभी धर्मों के भेदभाव को मिटा दिया है। सभी कलाकर अस्सी भदैनी के ही होते हैं। सबसे प्रमुख दीपावली के चार दिन बाद होने वाली नागनथैया अपने आप में अनोखी लीला है।
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बता दें कि काशी के चार लक्खा मेला प्रसिद्ध हैं। इसमें रथयात्रा का मेला, नाटी इमली का भरत मिलाप, चेतगंज की नक्कटैया और तुलसी घाट की नाग नथैया शामिल है। इसमें से तीन लक्खा मेला तो संपन्न हो गए हैं, जबकि चौथा मेला 11 नवंबर को होगा। एक लाख से अधिक भीड़ आने के चलते इन्हें लक्खा मेला कहा जाता है। 
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