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Varanasi News: काशी विश्वनाथ धाम में आदि शंकराचार्य का त्रिपुंड अभिषेक, वैशाख शुक्ल पंचमी पर हुआ आयोजन

Sun, 12 May 2024 11:06 PM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी Published by: अमन विश्वकर्मा Updated Sun, 12 May 2024 11:06 PM IST
सार

Varanasi News: श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के अर्चक एवं सहायकों ने विधि विधान से समस्त अनुष्ठान संपन्न कराए। शाम को भगवान शंकराचार्य की प्रतिमा पर शंकराचार्य कृत स्तोत्रों का सस्वर पाठ कर सांध्य अर्चना संपन्न की गई। 

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Tripunda Abhishek of Adi Shankaracharya in Kashi Vishwanath Dham
श्री काशी विश्वनाथ धाम में आदि शंकराचार्य की जयंती। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

वैशाख शुक्ल पंचमी तिथि पर रविवार को श्री काशी विश्वनाथ धाम में आदि शंकराचार्य की जयंती मनाई गई। धाम में विराजमान आदिशंकराचार्य की प्रतिमा का त्रिपुंड अभिषेक किया गया। न्यास के सदस्य और अधिकारियों ने प्रतिमा पर पुष्पसज्जा कर भगवान शंकराचार्य की शास्त्रोक्त आराधना की।

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धाम में शंकराचार्य भगवान की मंत्रोच्चार सहित आरती कर त्रिपुंड अभिषेक किया गया। मुख्य कार्यपालक अधिकारी विश्वभूषण मिश्र ने बताया कि श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास सनातन महापुरुषों, संतों, महात्माओं और अवतारों की सतत आराधना के उत्सव आयोजित करने के लिए प्रतिबद्ध है। इस दौरान न्यास सदस्य प्रो. ब्रजभूषण ओझा, पं. दीपक मालवीय, अपर मुख्य कार्यपालक निखिलेश कुमार मिश्र, एसडीएम शंभू शरण, ओएसडी उमेश प्रताप सिंह आदि मौजूद रहे।
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संविवि में मनाई गई शंकराचार्य की 1236वीं जयंती
संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में रविवार को आदि शंकराचार्य की 1236वीं जयंती मनाई गई। वेदमंत्रों के बीच शंकराचार्य की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की गई। इस दौरान पूरा परिसर वैदिक मंत्रोच्चार से गूंजता रहा। विश्व कल्याण, संस्था की समृद्धि और संस्कृत के संरक्षण- संवर्धन के लिए प्रार्थना की गई। 

कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने कहा कि भारतीय दर्शन, विशेष रूप से अद्वैत वेदांत में आदि शंकराचार्य के योगदान ने हमारी सांस्कृतिक विरासत पर एक अमिट छाप छोड़ी है। उन्होंने दुनिया में हिन्दू संस्कृति के पतन के समय इसे पुनर्जीवित किया। कुलपति ने आदि शंकराचार्य के प्रतिमा स्थल का सुंदरीकरण कराने और मां वाग्देवी मंदिर तक समुचित प्रकाश की व्यवस्था का निर्णय लिया। प्रो. रामकिशोर त्रिपाठी ने स्वागत किया। पूजन पुजारी डॉ. सच्चिदानंद ने कराया। 

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