{"_id":"57bf57ac4f1c1bf64ad5033b","slug":"trio-was-sunk-hundreds-of-household","type":"story","status":"publish","title_hn":"‘तिकड़ी’ ने डुबो दी सैकड़ों की गृहस्थी ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
‘तिकड़ी’ ने डुबो दी सैकड़ों की गृहस्थी
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
Updated Fri, 26 Aug 2016 02:30 AM IST
विज्ञापन
बनारस में बाढ़।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बाढ़ की विपदा से बेहाल वरुणा के डूब क्षेत्र के सैकड़ों बाशिंदों की घर-गृहस्थी दांव पर लग चुकी है। डूब क्षेत्र में अवैध निर्माण का खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ रहा है लेकिन उनकी इस दशा के लिए सरकारी महकमे भी कम कसूरवार नहीं हैं। डूब क्षेत्र को सुरक्षित करने की जिम्मेदारी नगर निगम, वीडीए और राजस्व विभाग के जिन मुलाजिमों पर थी, उन्होंने ही भू-माफिया से गठजोड़ कर यहां हुई बरबादी की बुनियादी रख दी थी। डूब क्षेत्र में कब्जा कर लगातार मकान बनते गए लेकिन मिलीभगत के कारण उन्हें रोका नहीं गया। यही नहीं, हाल ही में विकास कार्यों की समीक्षा करने आए मुख्य सचिव दीपक सिंघल ने भी डूब क्षेत्र के अवैध कब्जेदारों पर कार्रवाई का एलान किया था लेकिन अब तक सब कुछ पहले जैसा ही है।
अलबत्ता, नगर निगम, वीडीए और भू-माफिया की ‘तिकड़ी’ ने राजस्व कर्मियों को मिलाकर पहले दस्तावेजों में हेरफेर कराया, फिर नदी की जमीन की सौदेबाजी की। देखते-देखते नदी की जमीन कब्जा कर कई अवैध कॉलोनियां बस गईं। होटल और व्यावसायिक कांप्लेक्स खड़े हो गए। वर्षों से यह खेल खुलेआम चल रहा है लेकिन इस पर रोक या डूब क्षेत्र को कब्जा मुक्त कराने की अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई। जबकि, वरुणा कॉरिडोर के लिए कुछ महीनों पहले कराए गए ड्रोन सर्वे में भी इसका खुलासा हो चुका है और पूरी रिपोर्ट शासन-प्रशासन तक पहुंच चुकी है लेकिन तत्काल कार्रवाई के बजाय निर्धारित प्रक्रिया के नाम पर न सिर्फ डूब क्षेत्र के बाशिंदों बल्कि पूरे शहर को बाढ़ के खतरों के बीच छोड़ दिया गया। अमर उजाला ने सीएम के ड्रीम प्रोजेक्ट वरुणा कॉरिडोर का काम शुरू होने के समय ही इस ओर आगाह किया था।
हालांकि उसके बाद 50 मीटर तक के डूब क्षेत्र में वीडीए ने 762 और सिंचाई विभाग ने 130 अवैध निर्माणों को चिह्नित कर नोटिस जारी किया था लेकिन फिर कार्रवाई सुस्त पड़ गई। राजस्व और सिंचाई विभाग के रिकार्ड में वरुणा किनारे से 50 मीटर तक का दायरा डूब क्षेत्र है। कॉरिडोर के तहत इस क्षेत्र में ग्रीन बेल्ट विकसित करने की कार्ययोजना बनाई गई है। नदी विशेषज्ञों का दावा है कि डूब क्षेत्र में अवैध निर्माण न होते तो बाढ़ इतनी भयावह नहीं होती। गनीमत है कि जलस्तर में और उछाल नहीं आया नहीं तो पूरा शहर संकट में पड़ जाता।
विज्ञापन
वरुणा की बाढ़ ने तटीय इलाके में रहने वाले बुनकरों की महीनों की रोजी-रोटी छीन ली। करघे पानी में डूबे हैं। उनका खटर-पटर पूरी तरह थम गया है। बेहाल बुनकरों को बाढ़ उतरने का इंतजार है। हालांकि बाढ़ उतरने के बाद पांच से सात हजार रुपये खर्च कर करघों को चालू हालत में लाने में उन्हें कम से कम 25 दिन लग जाएंगे। वरुणा किनारे सरैया, नक्खीघाट, दानियालपुर, अमरपुर, सिधवा घाट और पुरानापुल में तकरीबन एक हजार से अधिक करघे डूबे हैं। अगले महीने बकरीद का त्योहार है लेकिन प्रभावित बुनकरों के लिए दो वक्त की रोटी का संकट है। सबसे ज्यादा नुकसान उन बुनकरों का हुआ, जो हथकरघा और पावरलूम के सहारे अपना काम करते हैं।
बाढ़ के पानी ने न सिर्फ उनके सिर से छत का साया छीन लिया बल्कि उनकी कमाई का जरिया भी छीन लिया। वरुणा के तटीय इलाकों में रहने वाले बुनकर परिवारों की जीविका का सहारा उनके करघा ही है। बाढ़ के चलते रोजी-रोजगार ठप होने से उनकी चिंताएं बढ़ गई हैं। बाढ़ उतरने के बाद महीने भर तक गुजारा कैसे होगा, इसे लेकर वे बेचैन हैं। दानियालपुर की लीलावती ने बताया कि ब्याज पर कर्ज लेकर हथकरघा लगाया था। अभी ब्याज की रकम चुकता भी नहीं कर पाई थी कि बाढ़ आ गई। यहीं के जितेंद्र, अजीज अहमद, शहनवाज का कहना है कि दस दिन से करघा बंद है।
विज्ञापन
अलबत्ता, नगर निगम, वीडीए और भू-माफिया की ‘तिकड़ी’ ने राजस्व कर्मियों को मिलाकर पहले दस्तावेजों में हेरफेर कराया, फिर नदी की जमीन की सौदेबाजी की। देखते-देखते नदी की जमीन कब्जा कर कई अवैध कॉलोनियां बस गईं। होटल और व्यावसायिक कांप्लेक्स खड़े हो गए। वर्षों से यह खेल खुलेआम चल रहा है लेकिन इस पर रोक या डूब क्षेत्र को कब्जा मुक्त कराने की अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई। जबकि, वरुणा कॉरिडोर के लिए कुछ महीनों पहले कराए गए ड्रोन सर्वे में भी इसका खुलासा हो चुका है और पूरी रिपोर्ट शासन-प्रशासन तक पहुंच चुकी है लेकिन तत्काल कार्रवाई के बजाय निर्धारित प्रक्रिया के नाम पर न सिर्फ डूब क्षेत्र के बाशिंदों बल्कि पूरे शहर को बाढ़ के खतरों के बीच छोड़ दिया गया। अमर उजाला ने सीएम के ड्रीम प्रोजेक्ट वरुणा कॉरिडोर का काम शुरू होने के समय ही इस ओर आगाह किया था।
विज्ञापन
हालांकि उसके बाद 50 मीटर तक के डूब क्षेत्र में वीडीए ने 762 और सिंचाई विभाग ने 130 अवैध निर्माणों को चिह्नित कर नोटिस जारी किया था लेकिन फिर कार्रवाई सुस्त पड़ गई। राजस्व और सिंचाई विभाग के रिकार्ड में वरुणा किनारे से 50 मीटर तक का दायरा डूब क्षेत्र है। कॉरिडोर के तहत इस क्षेत्र में ग्रीन बेल्ट विकसित करने की कार्ययोजना बनाई गई है। नदी विशेषज्ञों का दावा है कि डूब क्षेत्र में अवैध निर्माण न होते तो बाढ़ इतनी भयावह नहीं होती। गनीमत है कि जलस्तर में और उछाल नहीं आया नहीं तो पूरा शहर संकट में पड़ जाता।
विज्ञापन
वरुणा की बाढ़ ने तटीय इलाके में रहने वाले बुनकरों की महीनों की रोजी-रोटी छीन ली। करघे पानी में डूबे हैं। उनका खटर-पटर पूरी तरह थम गया है। बेहाल बुनकरों को बाढ़ उतरने का इंतजार है। हालांकि बाढ़ उतरने के बाद पांच से सात हजार रुपये खर्च कर करघों को चालू हालत में लाने में उन्हें कम से कम 25 दिन लग जाएंगे। वरुणा किनारे सरैया, नक्खीघाट, दानियालपुर, अमरपुर, सिधवा घाट और पुरानापुल में तकरीबन एक हजार से अधिक करघे डूबे हैं। अगले महीने बकरीद का त्योहार है लेकिन प्रभावित बुनकरों के लिए दो वक्त की रोटी का संकट है। सबसे ज्यादा नुकसान उन बुनकरों का हुआ, जो हथकरघा और पावरलूम के सहारे अपना काम करते हैं।
बाढ़ के पानी ने न सिर्फ उनके सिर से छत का साया छीन लिया बल्कि उनकी कमाई का जरिया भी छीन लिया। वरुणा के तटीय इलाकों में रहने वाले बुनकर परिवारों की जीविका का सहारा उनके करघा ही है। बाढ़ के चलते रोजी-रोजगार ठप होने से उनकी चिंताएं बढ़ गई हैं। बाढ़ उतरने के बाद महीने भर तक गुजारा कैसे होगा, इसे लेकर वे बेचैन हैं। दानियालपुर की लीलावती ने बताया कि ब्याज पर कर्ज लेकर हथकरघा लगाया था। अभी ब्याज की रकम चुकता भी नहीं कर पाई थी कि बाढ़ आ गई। यहीं के जितेंद्र, अजीज अहमद, शहनवाज का कहना है कि दस दिन से करघा बंद है।