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Varanasi: गंगा की लहरों के बीच शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती को श्रद्धांजलि, कटआउट के सामने दीपदान

Wed, 14 Sep 2022 11:17 PM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: उत्पल कांत Updated Wed, 14 Sep 2022 11:17 PM IST
सार

तुलसीघाट पर गंगा की लहरों के बीच शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती को श्रद्धांजलि दी गई। शंकराचार्य के कटआउट के सामने लोगों ने दीपदान कर उनके कार्यों को याद किया। 

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Tribute to Shankaracharya Swami Swaroopanand Saraswati amidst the waves of the Ganges, donated a lamp in front
तुलसीघाट पर शंकराचार्य को अर्पित की गई श्रद्धांजलि - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

ब्रह्मलीन शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती को बुधवार को वाराणसी में श्रद्धांजलि अर्पित की गई। गंगा तट से लेकर मुमुक्षु भवन तक आयोजित श्रद्धांजलि सभा में शंकराचार्य को नमन करने के साथ ही वक्ताओं ने इसे अपूरणीय क्षति बताया। बुधवार शाम को तुलसीघाट पर गंगा की लहरों के बीच शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती को श्रद्धांजलि दी गई। शंकराचार्य के कटआउट के सामने लोगों ने दीपदान कर उनके कार्यों को याद किया।

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न्यूरोलॉजिस्ट प्रो. विजयनाथ मिश्र ने कहा कि शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती की कमी हमेशा सनातन धर्म को महसूस होती रहेगी। इस दौरान वाचस्पति उपाध्याय, शैलेश, अजय कृष्ण चतुर्वेदी, शिव विश्वकर्मा उपस्थित रहे। अस्सी स्थित मुमुक्षु भवन में शिव काशी मंच की ओर से श्रद्धांजलि सभा में दंडी संन्यासियों व काशीवासियों ने श्रद्धांजलि अर्पित की।
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शिव काशी मंच के संजय पांडेय ने कहा कि ब्रह्मलीन जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने अपना पूरा जीवन सनातनधर्म को सशक्त करने में गुजार दिया।

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धर्म एवं संस्कृति के संरक्षक थे स्वामी स्वरूपानंद

गणेश शिशु वाटिका जूनियर हाई स्कूल विद्यालय परिवार की ओर से श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। वक्ताओं ने कहा कि स्वामी स्वरूपानंद महाराज स्वतंत्रता सेनानी होने के साथ ही साथ हमारे धर्म एवं संस्कृति के संरक्षक थे। इस दौरान वीरेश्वर दातार, रामराज सिंह यादव, प्रवीण वसंत पटवर्धन एवं अर्चना श्रीवास्तव मौजूद रहे।

शंकराचार्य के निधन पर घोषित किया जाए राष्ट्रीय शोक

स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के निधन पर राष्ट्रीय हिंदू दल संगठन ने प्रधानमंत्री और गृहमंत्री से राष्ट्रीय शोक घोषित करने की मांग की है। संगठन के अध्यक्ष रोशन पांडेय ने कहा कि जिसने हम भारतीयों को गुलाम बनाकर देश पर 150 वर्ष तक शासन किया और भारत को लूटा उस देश की महारानी एलिजाबेथ के निधन पर भारत में राष्ट्रीय शोक हो सकता है तो, करोड़ों हिंदुओं के सर्वोच्च धर्मगुरु स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के निधन पर राष्ट्रीय शोक क्यों नहीं?

इसके अलावा सऊदी के सुल्तान के निधन पर भारत में राष्ट्रीय शोक, यूएई के खलीफा के निधन पर भारत में शोक घोषित हुआ, लेकिन शंकराचार्य के निधन पर नहीं। हिंदू बहुल भारत में शंकराचार्य के लिए राष्ट्रीय शोक घोषित नहीं होगा तो कहां होगा?

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