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इमरजेंसी में स्ट्रेचर पर इलाज, बाल रोग विभाग में बेड खाली
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बीएचयू अस्पताल की इमरजेंसी के चिल्ड्रेन वार्ड में पिछले एक सप्ताह से स्ट्रेचर पर बच्चों का इलाज किया जा रहा है। बुधवार को भी कुछ ऐसा ही नजारा दिखा। जबकि दूसरी ओर बाल रोग विभाग के वार्डों में कई बेड खाली मिले। ऐसे में अगर नियमानुसार कुछ बच्चों को वार्ड में समय से शिफ्ट किया जाए तो चिल्ड्रेन वार्ड पर दबाव कम हो सकता है और इलाज में भी सहूलियत होगी।
बीएचयू अस्पताल की इमरजेंसी इस समय मरीजों से भरी पड़ी है। नई बिल्डिंग में भूतल के साथ ही प्रथम से तीसरे तल तक वार्ड में बेड पर मरीज तो हैं हीं स्ट्रेचर पर भी बहुत से मरीजों को रखा गया है। बुधवार दोपहर कुछ परिजन बेड खाली होने का इंतजार कर रहे थे। ताकि अपने बच्चों को भर्ती करा सके। उधर, बाल रोग विभाग में बच्चों के वार्ड में बेड खाली पड़े हैं। इन बेड पर बच्चों की भर्ती क्यों नहीं हो रही है, इस बारे में पूछने पर कोई आधिकारिक रूप से बोलने को तैयार नहीं है, लेकिन इसके पीछे समन्वय के अभाव को वजह माना जा रहा है।
बाल रोग विभाग की स्थिति
वार्ड कुल बेड खाली
वार्ड नंबर एक छह बेड पांच खाली
वार्ड नंबर दो दस बेड कोई खाली नहीं
वार्ड नंबर तीन दस बेड तीन खाली
वार्ड नंबर चार बारह बेड काई खाली नहीं
(दोपहर एक से डेढ़ बजे तक की स्थिति)
दो बेड के बीच में स्ट्रेचर, दरवाजे पर भी मरीज
इमरजेंसी में मरीजों की बढ़ती संख्या के आगे कहीं न कहीं वर्तमान समय में संसाधन नाकाफी साबित हो रहे हैं। वार्ड के भीतर दो बेड के बीच में एक लाइन से स्ट्रेचर पर मरीजों को भर्ती किया गया है। बुधवार दोपहर इमरजेंसी के दूसरे, तीसरे तल पर ऐसा ही नजारा दिखा। यहां वार्ड में दो बेड के बीच खाली जगह में स्ट्रेचर रखा गया था, लेकिन जगह न मिलने की वजह से वार्ड के दरवाजे पर ही स्ट्रेचर पर महिला मरीज को रखा गया। डॉक्टर भी बाहर ही आकर उसकी रिपोर्ट को देखते रहे।
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इमरजेंसी के चिल्ड्रेन वार्ड सहित अन्य वार्डों में बेड संबंधी जो समस्या हैं, उसके बारे में अस्पताल के एमएस को कहा जा चुका है। हर संभव कोशिश की जा रही है कि अस्पताल में आने वाले मरीजों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें और उन्हें कोई परेशानी न हो।
- प्रो. बीआर मित्तल, निदेशक, आईएमएस बीएचयू
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बीएचयू अस्पताल की इमरजेंसी इस समय मरीजों से भरी पड़ी है। नई बिल्डिंग में भूतल के साथ ही प्रथम से तीसरे तल तक वार्ड में बेड पर मरीज तो हैं हीं स्ट्रेचर पर भी बहुत से मरीजों को रखा गया है। बुधवार दोपहर कुछ परिजन बेड खाली होने का इंतजार कर रहे थे। ताकि अपने बच्चों को भर्ती करा सके। उधर, बाल रोग विभाग में बच्चों के वार्ड में बेड खाली पड़े हैं। इन बेड पर बच्चों की भर्ती क्यों नहीं हो रही है, इस बारे में पूछने पर कोई आधिकारिक रूप से बोलने को तैयार नहीं है, लेकिन इसके पीछे समन्वय के अभाव को वजह माना जा रहा है।
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बाल रोग विभाग की स्थिति
वार्ड कुल बेड खाली
वार्ड नंबर एक छह बेड पांच खाली
वार्ड नंबर दो दस बेड कोई खाली नहीं
वार्ड नंबर तीन दस बेड तीन खाली
वार्ड नंबर चार बारह बेड काई खाली नहीं
(दोपहर एक से डेढ़ बजे तक की स्थिति)
दो बेड के बीच में स्ट्रेचर, दरवाजे पर भी मरीज
इमरजेंसी में मरीजों की बढ़ती संख्या के आगे कहीं न कहीं वर्तमान समय में संसाधन नाकाफी साबित हो रहे हैं। वार्ड के भीतर दो बेड के बीच में एक लाइन से स्ट्रेचर पर मरीजों को भर्ती किया गया है। बुधवार दोपहर इमरजेंसी के दूसरे, तीसरे तल पर ऐसा ही नजारा दिखा। यहां वार्ड में दो बेड के बीच खाली जगह में स्ट्रेचर रखा गया था, लेकिन जगह न मिलने की वजह से वार्ड के दरवाजे पर ही स्ट्रेचर पर महिला मरीज को रखा गया। डॉक्टर भी बाहर ही आकर उसकी रिपोर्ट को देखते रहे।
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इमरजेंसी के चिल्ड्रेन वार्ड सहित अन्य वार्डों में बेड संबंधी जो समस्या हैं, उसके बारे में अस्पताल के एमएस को कहा जा चुका है। हर संभव कोशिश की जा रही है कि अस्पताल में आने वाले मरीजों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें और उन्हें कोई परेशानी न हो।
- प्रो. बीआर मित्तल, निदेशक, आईएमएस बीएचयू