जाम का झाम: 2 किमी के दायरे वाले लंका में 1200 दुकानें, शौचालय एक भी नहीं; लोगों की समस्याएं बढ़ीं
वाराणसी का लंका क्षेत्र हर दिन जाम की समस्या से जूझता रहता है। यहां सामुदायिक शाैचालक नहीं होने से लोगों को समस्याएं हो रही हैं। इस क्षेत्र में अतिक्रमण के कारण भी परेशानी हो रही हैं।
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सर्व विद्या की राजधानी बीएचयू से सटा लंका बाजार अतिक्रमण और जाम से मुक्त नहीं हो पा रहा है। दो किमी के दायरे में फैले लंका बाजार में वर्षों से यूरिनल और शौचालय नहीं है। जिस तरह गोदौलिया कभी प्रीमियम मार्केट हुआ करता था और आज फुटपाथ मार्केट में तब्दील है। ठीक वहीं स्थिति लंका बाजार की होने वाली है। इससे सबसे ज्यादा समस्या महिलाओं को होती है।
पार्किंग की कमी से सड़क पर ग्राहकों के वाहन खड़े होने पर पुलिस के चालान और अन्य कार्रवाई ने बाजार की रंगत छीन ली है। चार पहिया लेकर लंका आने पर भी लोगों को कई बार सोचना पड़ता है। हर समय जाम के चलते बीएचयू और ट्रॉमा सेंटर के मरीज रास्ते में दम तक तोड़ देते हैं। यहां केवल पटरियों की दुकानदारी रह गई है।
लंका बाजार में मेडिकल की 250 से अधिक दुकानें है। बीएचयू, ट्रॉमा सेंटर के साथ ही महामना कैंसर संस्थान सुंदरपुर तक के मरीजों और तीमारदारों की आवाजाही यहां होती है। खानपान, कास्मेटिक, कपड़े, ऑटोमोबाइल शोरूम, दूध सट्टी, धार्मिक स्थल में संकट मोचन मंदिर तक समाहित है।
छोटी-बड़ी मिलाकर 1200 से अधिक दुकानें हैं। सामनेघाट पुल बनने के बाद से लंका बाजार में भीड़ तो बढ़ी, लेकिन व्यापार में वृद्धि नहीं हो सकी। व्यापारियों के अनुसार सिर्फ पटरियों की दुकानदारी रह गई है। बाजार में पार्किंग और जाम की समस्या से व्यापारी दिनों दिन घुट रहे हैं। महिलाओं के लिए सबसे बड़ी समस्या शौचालय की है। बाजार में न तो शौचालय और न ही पेयजल की कोई व्यवस्था है।
सुनें जनता की
जाम ने लंका बाजार की रंगत छीन ली है। सामनेघाट पुल बनने के बाद से लंका में वाहनों की संख्या काफी बढ़ी है। टोल टैक्स बचाने के लिए भी लोग लंका से होकर आगे निकलते हैं। इस वजह से जाम बराबर बना रहता है। मालवीय प्रतिमा को बचाते हुए चारों तरफ से फ्लाईओवर बनना चाहिए। -रवि प्रकाश जायसवाल
महानगर अध्यक्ष, उत्तर प्रदेश युवा उद्योग व्यापार मंडल
जिस तरह गोदौलिया कभी प्रीमियम मार्केट हुआ करता था और आज फुटपाथ मार्केट में तब्दील है। ठीक वहीं स्थिति लंका बाजार की होने वाली है। जाम और अतिक्रमण के चलते बड़ी दुकानों पर ग्राहकों की संख्या कम हो गई है। सिर्फ पटरियों की दुकानदारी हो रही है। जाम में फंसे मरीज कभी-कभी एंबुलेंस में ही दम तोड़ देते हैं। - राम भरत ओझा, महामंत्री, लंका व्यापार मंडल
पार्किंग की समस्या ने लंका बाजार को तोड़कर रख दिया है। कोई भी संभ्रांत व्यक्ति अब लंका में खरीदारी करने नहीं आता है। दो से तीन दिन अतिक्रमण अभियान चलता है फिर वहीं स्थिति हो जाती है। फ्लाईओवर निर्माण के बाद ही लंका बाजार सुरक्षित हो सकता है। - राकेश विश्वकर्मा, उपाध्यक्ष, लंका व्यापार मंडल
लंका बाजार में शौचालय नहीं होने से महिलाओं को काफी परेशानियां होती हैं। बीएचयू होने के कारण महिलाओं, युवतियों की संख्या इस बाजार में अधिक होती है। लंका चौराहे के पास पुराने पुलिस चौकी के समीप शौचालय प्रस्तावित था लेकिन अब तक बन नहीं सका है। अतिक्रमण और जाम भी बड़ी समस्या है। - धर्मेंद्र यादव, चाय विक्रेता, लंका