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नहीं आ रहे पर्यटक, टूरिस्ट गाइडों पर रोजी-रोटी का संकट
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वाराणसी। कोरोना की वजह से सबसे बड़ा झटका पर्यटन और इससे जुड़े लोगों पर पड़ा है। टूरिस्ट गाइडों की आजीविका पर संकट खड़ा हो गया है। इनके आय का एक मात्र स्रोत विदेशी पर्यटक हैं जो कोरोना के कारण पिछले साल से नहीं आ रहे। इनकी जमा पूंजी भी खत्म होने के कगार पर है। परिवार का भरण-पोषण भी नहीं हो पा रहा है।
काशी विश्व भर में धार्मिक और सांस्कृतिक नगरी के रूप में विख्यात है। इसकी पहचान और इतिहास बताने का काम टूरिस्ट गाइडों के कंधों पर है। ये शहर की संकरी गलियों, घाटों, काशी विश्वनाथ, सारनाथ जैसे पर्यटक स्थलों का इतिहास विश्व के कोने-कोने से आने वाले पर्यटकों को समझाते हैं। साथ ही यहां की संस्कृति से भी पर्यटकों को रूबरू कराते हैं।
शहर में 300 टूरिस्ट गाइड हैं। जो बेरोजगार हैं। विदेशी पर्यटकों का आवागमन बंद है। देश के अन्य हिस्सों से भी पर्यटक नहीं आ रहे हैं। गाइडों ने बताया कि पिछले साल पर्यटन राज्य मंत्री नीलकंठ तिवारी को बैठक कर अपनी समस्याएं बताई थीं। आश्वासन के बाद भी अब तक कोई सहायता नहीं मिल पाई है। सरकार ने जरूरतमंद गाइडों के किए किसी प्रकार की सुविधा या भत्ते की घोषणा नहीं की। कई ऐसे गाइड हैं जिन्होंने अपनी जमा पूंजी भी गंवा दी है।
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पिछले साल से विदेशी पर्यटकों का आवागमन बाधित है। 300 टूरिस्ट गाइड बेरोजगार हो गए हैं। आजीविका का संकट खड़ा होने पर पर्यटन मंत्री से गुहार लगाई थी। आश्वासन के बाद अब तक कोई सहायता नहीं मिली।
- अनूप सेठ, अध्यक्ष बनारस टूरिस्ट गाइड एसोसिएशन
कोरोना काल में कई लोगों का रोजगार और व्यवसाय बंद हो गया है। सरकार गरीबों को भत्ता और तमाम योजनाओं का लाभ दे रही है। हम लोगों के बारे में कुछ नहीं सोचा गया।
- रंजीत पांडेय, उपाध्यक्ष बनारस टूरिस्ट गाइड एसोसिएशन
जब से महामारी आई है तब से रोजगार के साधन बंद हैं। पेट पालने का संकट खड़ा हो गया है। बचत के पैसे भी कुछ ही दिनों में खत्म हो जाएंगे। परिवार चलना भी मुश्किल हो गया है।
- अजय श्रीवास्तव, टूरिस्ट गाइड
टूरिज्म की पढ़ाई कर अन्य देशों की भाषाओं का भी अध्ययन किया ताकि एक अच्छा गाइड बन सकूं। क्या पता था शुरुआत करते ही रोजगार पर विराम लग जाएगा। जो भी कमाया सब खत्म हो गया।
- अभिषेक शर्मा, टूरिस्ट गाइड
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काशी विश्व भर में धार्मिक और सांस्कृतिक नगरी के रूप में विख्यात है। इसकी पहचान और इतिहास बताने का काम टूरिस्ट गाइडों के कंधों पर है। ये शहर की संकरी गलियों, घाटों, काशी विश्वनाथ, सारनाथ जैसे पर्यटक स्थलों का इतिहास विश्व के कोने-कोने से आने वाले पर्यटकों को समझाते हैं। साथ ही यहां की संस्कृति से भी पर्यटकों को रूबरू कराते हैं।
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शहर में 300 टूरिस्ट गाइड हैं। जो बेरोजगार हैं। विदेशी पर्यटकों का आवागमन बंद है। देश के अन्य हिस्सों से भी पर्यटक नहीं आ रहे हैं। गाइडों ने बताया कि पिछले साल पर्यटन राज्य मंत्री नीलकंठ तिवारी को बैठक कर अपनी समस्याएं बताई थीं। आश्वासन के बाद भी अब तक कोई सहायता नहीं मिल पाई है। सरकार ने जरूरतमंद गाइडों के किए किसी प्रकार की सुविधा या भत्ते की घोषणा नहीं की। कई ऐसे गाइड हैं जिन्होंने अपनी जमा पूंजी भी गंवा दी है।
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पिछले साल से विदेशी पर्यटकों का आवागमन बाधित है। 300 टूरिस्ट गाइड बेरोजगार हो गए हैं। आजीविका का संकट खड़ा होने पर पर्यटन मंत्री से गुहार लगाई थी। आश्वासन के बाद अब तक कोई सहायता नहीं मिली।
- अनूप सेठ, अध्यक्ष बनारस टूरिस्ट गाइड एसोसिएशन
कोरोना काल में कई लोगों का रोजगार और व्यवसाय बंद हो गया है। सरकार गरीबों को भत्ता और तमाम योजनाओं का लाभ दे रही है। हम लोगों के बारे में कुछ नहीं सोचा गया।
- रंजीत पांडेय, उपाध्यक्ष बनारस टूरिस्ट गाइड एसोसिएशन
जब से महामारी आई है तब से रोजगार के साधन बंद हैं। पेट पालने का संकट खड़ा हो गया है। बचत के पैसे भी कुछ ही दिनों में खत्म हो जाएंगे। परिवार चलना भी मुश्किल हो गया है।
- अजय श्रीवास्तव, टूरिस्ट गाइड
टूरिज्म की पढ़ाई कर अन्य देशों की भाषाओं का भी अध्ययन किया ताकि एक अच्छा गाइड बन सकूं। क्या पता था शुरुआत करते ही रोजगार पर विराम लग जाएगा। जो भी कमाया सब खत्म हो गया।
- अभिषेक शर्मा, टूरिस्ट गाइड