बीएचयू के मालवीय मूल्य अनुशीलन केंद्र में आयोजित अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में वक्ताओं ने वैश्विक अनिश्चितताओं के दौर में शांति के मुद्दे पर विस्तार से चर्चा की। मुख्य अतिथि बीएचयू के कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि संघर्षों को सहयोग में बदलने के लिए संवाद और सहानुभूति को बढ़ावा देना आवश्यक है। शांति निर्माण की शुरुआत सूक्ष्म स्तर से होनी चाहिए। भारत में पहले की तुलना में हड़ताल और आंदोलन की घटनाएं काफी कम हुई हैं। उन्होंने इस परिवर्तन का श्रेय सांविधानिक शासन व्यवस्था के विकास, न्यायपालिका की भूमिका और ऐसे संस्थागत तंत्रों को दिया जो विवादों के समाधान के लिए संवाद को बढ़ावा देते हैं।
मालवीय सेंटर फॉर पीस रिसर्च को छात्रों को इंटर्नशिप और सामुदायिक संपर्क कार्यक्रमों के माध्यम से जोड़ना चाहिए ताकि वे लोगों की समस्याओं को रचनात्मक रूप से समझकर उन्हें संवाद और उचित संस्थागत माध्यमों की ओर मार्गदर्शन दे सकें। बीएचयू यूनेस्को चेयर फॉर पीस के प्रो. प्रियंकर उपाध्याय ने विश्व में शांति के सामने बढ़ते खतरों पर चिंता व्यक्त की। बंगाल विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. समीर कुमार दास ने जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न विस्थापन, श्रम असुरक्षा और कोविड-19 महामारी जैसी परिस्थितियों ने वैश्विक स्तर पर नई चुनौतियां उत्पन्न की हैं। स्वागत प्रो. मनोज कुमार मिश्रा, धन्यवाद ज्ञापन प्रो. अंजू शरण उपाध्याय ने किया।