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भटकती आत्माओं को शांत करने वाला खुद अशांत
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
Updated Sun, 19 Jun 2016 01:50 AM IST
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बदहाल है पिशाच मोचन कुंड।
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पुराणों और प्राचीन ग्रंथों में असि और वरुणा के बीच बसी काशी में सौ तीर्थों का उल्लेख मिलता है। इन्हीं में से एक है विमल तीर्थ जो इन दिनों लाखों रुपये खर्च करने के बाद भी बदहाल है। इसी तीर्थ का नाम है पिशाच मोचन कुंड। इस कुंड में भटकती आत्माओं को शांति मिलती है। पितृपक्ष में तो पड़ोसी देश नेपाल, इंडोनेशिया, भूटान और म्यांमार से भी श्रद्धालु पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान करने यहां आते हैं। इन दिनों कुंड में झाड़ियां उग आई हैं। फूलमाला और कचरे फेंकने से गंदगी फैल रही है।
पिशाच मोचन कुंड पर उनकी आत्मा की शांति के लिए पिंडदान होता है जिनकी अकाल मौत हुई हो। सड़क हादसों के अलावा हमलों में जान गंवाने वालों की भटकती आत्माओं की शांति इस कुंड पर की जाती है। इसके लिए यहां त्रिपिंडी श्राद्ध किया जाता है। कहते हैं कि कभी राजा भगीरथ ने अपने पुरखों की आत्मा की शांति के लिए इस कुंड पर पिंडदान और श्राद्ध किया था। यहीं पिशाचेश्वर का मंदिर भी है।
इस तीर्थ के दक्षिण में पित्रीश्वर और छागलेश्वर तो हैं ही, कर्पदीश्वर और विमलेश्वर के मंदिर भी हैं। हेरम्ब विनायक पिशाचमोचन के समीप वाल्मीकि टीले पर स्थित है। मान्यता है कि यहां किसी भी तरह की भटकती आत्मा को शांति मिल जाती है। पितृपक्ष में ऐसी आत्माओं को आसन इसी कुंड पर दिया जाता है।
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तमाम भटकती आत्माओं को इसी कुंड के पीपल के पेड़ में कील ठोंक कर स्थिर किया जाता है। तीन वर्ष पहले सीएंडडीएस ने लाखों रुपये खर्च कर इस कुंड पर सुरक्षा दीवार, सीढ़ियां और पाथ-वे का निर्माण कराया गया। अब इस कुंड के दक्षिणी हिस्से में झाड़ियां फैल रही हैं। इसकी सफाई के लिए कई बार नगर निगम का ध्यान आकृष्ट कराया गया लेकिन स्थिति जस की तस है।
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पिशाच मोचन कुंड पर उनकी आत्मा की शांति के लिए पिंडदान होता है जिनकी अकाल मौत हुई हो। सड़क हादसों के अलावा हमलों में जान गंवाने वालों की भटकती आत्माओं की शांति इस कुंड पर की जाती है। इसके लिए यहां त्रिपिंडी श्राद्ध किया जाता है। कहते हैं कि कभी राजा भगीरथ ने अपने पुरखों की आत्मा की शांति के लिए इस कुंड पर पिंडदान और श्राद्ध किया था। यहीं पिशाचेश्वर का मंदिर भी है।
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इस तीर्थ के दक्षिण में पित्रीश्वर और छागलेश्वर तो हैं ही, कर्पदीश्वर और विमलेश्वर के मंदिर भी हैं। हेरम्ब विनायक पिशाचमोचन के समीप वाल्मीकि टीले पर स्थित है। मान्यता है कि यहां किसी भी तरह की भटकती आत्मा को शांति मिल जाती है। पितृपक्ष में ऐसी आत्माओं को आसन इसी कुंड पर दिया जाता है।
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तमाम भटकती आत्माओं को इसी कुंड के पीपल के पेड़ में कील ठोंक कर स्थिर किया जाता है। तीन वर्ष पहले सीएंडडीएस ने लाखों रुपये खर्च कर इस कुंड पर सुरक्षा दीवार, सीढ़ियां और पाथ-वे का निर्माण कराया गया। अब इस कुंड के दक्षिणी हिस्से में झाड़ियां फैल रही हैं। इसकी सफाई के लिए कई बार नगर निगम का ध्यान आकृष्ट कराया गया लेकिन स्थिति जस की तस है।