तीन सौ साल पुरानी परंपरा कोरोना की वजह से बदली, मां शीतला के भक्त बने औरों के लिए उदाहरण
वाराणसी में मां शीतला के दरबार में तीन सौ सालों से चली आ रही संगीत परंपरा का निर्वहन जारी है। कलाकार घरों से ही फेसबुक लाइव के माध्यम से माता के चरणों में हाजिरी लगा रहे हैं। परिवार के साथ शाम होते ही कलाकारों द्वारा भजनों की प्रस्तुति आरंभ हो रही है जो देर रात तक जारी रहती है।
पांच दिवसीय आनलाइन संगीत समारोह में गुरुवार को डॉ. विजय कपूर ने जन-जन का कल्याण करे मोरी शीतला मईया.., जब भक्त नहीं होंगे भगवान कहां होगा...की प्रस्तुति दी। लखनऊ से दीपक त्रिपाठी ने निमिया के डरिया पे झुलुआ झुलेली सातों बहिनिया..., चनन के पलना मखमल के तकिया...सुनाया। जौनपुर के अवधेश पाठक मधुर ने जग पे नजरिया बनवले रहिया, किरपा के अंचरा ओढ़वले रहिया...मनीष उपाध्याय ने जग में चारों ओर मचल हाहाकार मईया, जागा-जागा हे शीतला मई की प्रस्तुति दी।
इसके अलावा हार्दिक पांडेय, प्रियांशु दास, सुमन अग्रहरि, आरती सिन्हा ने स्वरांजलि भेंट की। ढोलक पर विशाल शर्मा, तबले पर दीपक सिंह ने धुन बजाई। संयोजक गीतकार कन्हैया दुबे केडी ने बताया कि मंदिर परिसर में सायंकाल मां शीतला को पंचामृत स्नान कराकर नूतनावस्त्राभूषण से सुसज्जित कराया गया। पं अविनाश पांडेय सुट्टु महाराज ने आरती उतारी। लाक डाउन के कारण सायंकालीन आरती के एक घंटे बाद ही समय से पहले महंत पं शिव प्रसाद पांडेय के द्वारा शयन आरती करके पट बंद कर दिया गया।