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फेसबुक पर अजनबी से दोस्ती करने से पहले सोचिए, कहीं नई परेशानी में तो नहीं पड़ रहे

Thu, 05 Mar 2020 01:30 AM IST
स्‍वाधीन तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: स्‍वाधीन तिवारी Updated Thu, 05 Mar 2020 01:30 AM IST
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Three fake Facebook ID blocks made in the name of girl students
FACEBOOK BLOCK

सोशल मीडिया जहां रिश्तों को संजोने का एक बेहतर माध्यम बन रहा है, तो इसके उपयोग में जरा सी असावधानी परेशानी भी खड़ी कर देती है। तभी फेसबुक पर अगर किसी अजनबी की फ्रेंड रिक्वेस्ट आती है, तो चेक करिए। नही तो मुसीबत में पड़ने में समय नहीं लगेगा। वाराणसी में तीन छात्राओं के नाम पर फर्जी फेसबुक अकाउंट को एसएसपी के निर्देश पर साइबर क्राइम टीम ने ब्लाक कराए। फर्जी अकाउंट बनाने वालों के मोबाइल नंबर और आईपी एड्रेस की जांच की जा रही है। एसएसपी प्रभाकर चौधरी ने कहा है कि सोशल मीडिया पर किसी छात्रा को कोई परेशान करे तो तुरंत शिकायत करें।

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साइबर क्राइम टीम के कोआर्डिनेटर विजय श्रीवास्तव ने बताया कि फेसबुक पर तीन छात्राओं के नाम से अकाउंट बना कर उनकी फोटो और वीडियो पोस्ट किए जा रहे थे। एसएसपी द्वारा जारी नंबर पर तीनों छात्राओं ने फर्जी अकाउंट के स्क्रीन शॉट और यूआरएल भेजे थे। एसएसपी के निर्देश पर फेसबुक कार्यालय में संपर्क कर तीनों अकाउंट ब्लाक करा दिए गए हैं। उन्होंने अपील की है कि फेसबुक सहित सोशल मीडिया के अन्य प्लेटफार्म पर ऐसी जानकारियां साझा करने से बचें जो भविष्य में आपको परेशान कर सकती हैं।

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Three fake Facebook ID blocks made in the name of girl students
बैंक अकाउंट

दो जालसाजों के खाते फ्रीज, वापस मिले 37 हजार

वाराणसी। खाते से रकम उड़ाए जाने की शिकायत पर पुलिस ने पांडेयपुर के आदित्य मिश्र के 20 हजार और मंडुवाडीह की आशा देवी के 17 हजार रुपये वापस कराए। दोनों के खाते से पैसा उड़ाने वाले दो जालसाजों के खाते भी फ्रीज कराए गए। साइबर क्राइम टीम के कोआर्डिनेटर ने कहा कि खाते से पैसे निकाले जाने की जानकारी मिलते ही एसएसपी कार्यालय में संपर्क करें। जितनी जल्दी सूचना देंगे, रुपये वापस मिलने की संभावना उतनी ज्यादा रहती है।

बारीकियां समझ कर साइबर क्राइम से बचाएंगी प्रशिक्षु आरक्षी

पुलिस लाइन में प्रशिक्षु महिला आरक्षियों को साइबर क्राइम की चुनौतियों से निपटने के गुर सिखाए जा रहे हैं। एसएसपी प्रभाकर चौधरी के अनुसार, इसका उद्देश्य यही है कि जब ये आरक्षी तैनात हों तो शिकायतों के निस्तारण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएं। साइबर क्राइम टीम के कोआर्डिनेटर विजय श्रीवास्तव ने बताया कि प्रशिक्षण में 347 प्रशिक्षु आरक्षी शामिल हुईं।

उन्हें डेबिट/क्रेडिट कार्ड फ्राड, हैकिंग, सिम स्वैप और साइबर बुलिंग आदि के बारे में बताया गया है। बताया गया है कि सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट के जरिये अपने ई-मेल अकाउंट तक पहुंचने की अनुमति न दें। निजी जानकारी जैसे पता, फोन नंबर और जन्मतिथि आदि शेयर न करें।

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