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यूपी: बृजेश गंझू के एनकाउंटर पर झारखंड के सात जिलों में तीन दिन का बंद, टीएसपीसी ने चस्पा कराए पोस्टर
Thu, 24 Sep 2026 10:55 AM IST
Pragati Chand
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
Published by: Pragati Chand
Updated Thu, 24 Sep 2026 10:55 AM IST
सार
बृजेश गंझू उर्फ गोपाल सिंह भोक्ता के एनकाउंटर पर टीएसपीसी ने झारखंड के सात जिलों में तीन दिन तक बंद की बात कही है। इसके लिए बंद का पोस्टर भी सार्वजनिक तौर पर चस्पा कराया है।
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बृजेश गंझू उर्फ गोपाल सिंह भोक्ता
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन तृतीया सम्मेलन प्रस्तुति कमेटी (टीएसपीसी) के सुप्रीमो बृजेश गंझू उर्फ गोपाल सिंह भोक्ता के एनकाउंटर पर झारखंड में बंद का आह्वान किया गया है। लोहरदगा, लातेहार, महुआडांड, गारू सीमा, गुमला-पलामू सीमांत जोनल कमेटी ने सात जिलों में 24 से 26 सितंबर तक बंद की बात कही है। बंद का पोस्टर भी सार्वजनिक तौर पर चस्पा कराया है। बंद का असर चतरा, हजारीबाग, पलामू, लातेहार, गढ़वा, लोहरदगा और गुमला जिलों में होगा।
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झारखंड के इन जिलों के बाजारों और सरकारी कार्यालयों के बाहर चस्पा कराए गए। पोस्टर में बृजेश की हत्या का आरोप लगाया है। संगठन का दावा है कि यह एक फर्जी एनकाउंटर है और इसके लिए झारखंड सरकार जिम्मेदार है। जोनल कमेटी की ओर से जारी पोस्टर में यह बताया गया है कि 10 सितंबर को बृजेश, रीजनल कमांडर शशिकांत और जोनल कमांडर नथुनी के साथ दोपहर एक बजे अंतिम बार बात हुई थी।
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16 सितंबर की शाम 4.30 बजे संगठन को सूचना मिली कि उन्हें हजारीबाग जिले के केरेडारी के जंगल से पुलिस ने उठाया है। 17 सितंबर को हजारीबाग और चतरा की पुलिस से जानकारी सामने आई कि बृजेश को उठा लिया गया है, लेकिन किस जिले की पुलिस ने ऐसा किया है यह स्पष्ट नहीं है। छानबीन पर स्पष्ट जानकारी नहीं मिली।
20 सितंबर को सूचना मिली कि सुप्रीमो की वाराणसी के रामनगर थाना क्षेत्र में एनकाउंटर के जरिये हत्या की गई। टीपीसी संगठन ने पत्र के माध्यम से कहा है कि पुलिस कानून को अपने हाथ में ले रही है और इस फर्जी मुठभेड़ की पूरी जिम्मेदारी झारखंड सरकार की है।
10 दिन पहले रीजनल और जोनल कमांडर से की थी बात
बृजेश ने 10 दिन पहले संगठन के रीजनल कमांडर और 10 लाख के इनामी शशिकांत और जेल से छूटे जोनल कमांडर नथुनी सिंह से बातचीत की थी। जांगी एप पर भी बराबर संपर्क में रहते थे। एटीएस के अनुसार बृजेश गंझू ने 20 सितंबर को चेकिंग के दौरान रामनगर लंका मैदान के पास पुलिस टीम पर फायरिंग की थी और वह जवाबी फायरिंग में मारा गया।
बृजेश ने 10 दिन पहले संगठन के रीजनल कमांडर और 10 लाख के इनामी शशिकांत और जेल से छूटे जोनल कमांडर नथुनी सिंह से बातचीत की थी। जांगी एप पर भी बराबर संपर्क में रहते थे। एटीएस के अनुसार बृजेश गंझू ने 20 सितंबर को चेकिंग के दौरान रामनगर लंका मैदान के पास पुलिस टीम पर फायरिंग की थी और वह जवाबी फायरिंग में मारा गया।
उत्तर प्रदेश मानवाधिकार आयोग में मामला दर्ज
उत्तर प्रदेश राज्य मानवाधिकार आयोग ने बृजेश गंझू से जुड़े एक मामले को औपचारिक रूप से दर्ज कर लिया है। आयोग ने शिकायतकर्ता को इसकी सूचना आधिकारिक ई-मेल से दी है। शिकायतकर्ता कामता प्रसाद तिवारी ने आयोग को बताया कि उसका बृजेश गंझू से कोई व्यक्तिगत संबंध नहीं है। राज्य प्रशासन और पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं।
उन्होंने लखनऊ के उच्च पुलिस अधिकारियों के विपिन राय को 2 लाख रुपये का इनाम देने पर रोष जताया। उनका आरोप है कि जनांदोलनों को पहले बदनाम किया जाता है। फिर उनके नेताओं को जेल भेजा जाता है या खत्म कर दिया जाता है।
कहा कि यह मामला मानवाधिकारों के व्यापक हनन से जुड़ा है, जिस पर सांविधानिक संस्थाओं की सख्त नजर जरूरी है। मानवाधिकार संरक्षण कानूनों के तहत कोई भी नागरिक पीड़ित के अधिकारों के हनन के खिलाफ शिकायत कर सकता है।
आयोग के पास सरकारी अधिकारियों को तलब करने और जांच टीम गठित करने का अधिकार है। दोषी पाए जाने पर आयोग उचित कार्रवाई या मुआवजे की सिफारिश कर सकता है। इसी बीच, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने भी ''हमारा मोर्चा'' के ई-मेल का संज्ञान लिया है।
उत्तर प्रदेश राज्य मानवाधिकार आयोग ने बृजेश गंझू से जुड़े एक मामले को औपचारिक रूप से दर्ज कर लिया है। आयोग ने शिकायतकर्ता को इसकी सूचना आधिकारिक ई-मेल से दी है। शिकायतकर्ता कामता प्रसाद तिवारी ने आयोग को बताया कि उसका बृजेश गंझू से कोई व्यक्तिगत संबंध नहीं है। राज्य प्रशासन और पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं।
उन्होंने लखनऊ के उच्च पुलिस अधिकारियों के विपिन राय को 2 लाख रुपये का इनाम देने पर रोष जताया। उनका आरोप है कि जनांदोलनों को पहले बदनाम किया जाता है। फिर उनके नेताओं को जेल भेजा जाता है या खत्म कर दिया जाता है।
कहा कि यह मामला मानवाधिकारों के व्यापक हनन से जुड़ा है, जिस पर सांविधानिक संस्थाओं की सख्त नजर जरूरी है। मानवाधिकार संरक्षण कानूनों के तहत कोई भी नागरिक पीड़ित के अधिकारों के हनन के खिलाफ शिकायत कर सकता है।
आयोग के पास सरकारी अधिकारियों को तलब करने और जांच टीम गठित करने का अधिकार है। दोषी पाए जाने पर आयोग उचित कार्रवाई या मुआवजे की सिफारिश कर सकता है। इसी बीच, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने भी ''हमारा मोर्चा'' के ई-मेल का संज्ञान लिया है।