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Varanasi News: अन्नकूट पर काशी में निभाई जाएगी ये विशिष्ट परंपरा
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काशी विश्वनाथ मंदिर में अन्नकूट के दिन 14 नवंबर को विशिष्ट परंपरा का निर्वहन होगा। टेढ़ीनीम स्थित महंत आवास से भगवान शिव की रजत प्रतिमा ले जाकर गर्भगृह में प्रतिष्ठित की जाएगी।
पूर्व महंत डा. कुलपति तिवारी ने बताया कि 14 नवंबर को पूर्वाह्न 11 बजे टेढ़ीनीम स्थित महंत आवास से बाबा की रजत प्रतिमा काशी विश्वनाथ मंदिर ले जाई जाएगी। इससे पूर्व प्रतिमा का पूजन अर्चन महंत आवास पर होगा। डॉ. तिवारी ने बताया कि इस परंपरा का निर्वहन करने के लिए मंदिर के मुख्य कार्यपालक अधिकारी डाॅ. सुनील वर्मा को पत्र लिखा गया है। विश्वनाथ धाम निर्माण के कारण जब से महंत आवास टेढ़ीनीम में स्थानांतरित हुआ है तब से प्रतिवर्ष नाटकोट क्षत्रम् के पारंपरिक वाद्ययंत्रों की गूंज के बीच बाबा की चल रजत प्रतिमा विश्वनाथ मंदिर ले जाई जाती है। वहां गर्भगृह में प्रतिमा प्रतिष्ठित करने के बाद दीक्षित मंत्र से बाबा का पूजन किया जाता है। शाम को सप्तर्षि आरती से पूर्व बाबा की चल प्रतिमा पुन: महंत अवास ले आई जाती है।
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पूर्व महंत डा. कुलपति तिवारी ने बताया कि 14 नवंबर को पूर्वाह्न 11 बजे टेढ़ीनीम स्थित महंत आवास से बाबा की रजत प्रतिमा काशी विश्वनाथ मंदिर ले जाई जाएगी। इससे पूर्व प्रतिमा का पूजन अर्चन महंत आवास पर होगा। डॉ. तिवारी ने बताया कि इस परंपरा का निर्वहन करने के लिए मंदिर के मुख्य कार्यपालक अधिकारी डाॅ. सुनील वर्मा को पत्र लिखा गया है। विश्वनाथ धाम निर्माण के कारण जब से महंत आवास टेढ़ीनीम में स्थानांतरित हुआ है तब से प्रतिवर्ष नाटकोट क्षत्रम् के पारंपरिक वाद्ययंत्रों की गूंज के बीच बाबा की चल रजत प्रतिमा विश्वनाथ मंदिर ले जाई जाती है। वहां गर्भगृह में प्रतिमा प्रतिष्ठित करने के बाद दीक्षित मंत्र से बाबा का पूजन किया जाता है। शाम को सप्तर्षि आरती से पूर्व बाबा की चल प्रतिमा पुन: महंत अवास ले आई जाती है।
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