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Varanasi News: यह समय कविता का नहीं, एआई के युग में भी काव्य रचना करना एक चमत्कार ही है

Fri, 11 Jul 2025 01:37 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Fri, 11 Jul 2025 01:37 AM IST
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This is not the time for poetry, writing poetry even in the age of AI is a miracle
वाराणसी। बीएचयू के एचएन त्रिपाठी सभागार में हुए कविता पाठ में देश भर से कई कवि और साहित्यकार जुटे। बीएचयू के साहित्यकार प्रो. रामाज्ञा राय शशिधर ने वर्तमान समाज और व्यवस्था पर टिप्पणी करते हुए कहा कि यह समय कविता का नहीं एआई का है। इस समय कविता का होना मनुष्यता के लिए चमत्कार की ही तरह है। क्योंकि एआई भी अब सेकेंड भर में कविताओं की रचना कर दे रही है। अब तो कविता कुर्सी में बदल रही है, तो कुर्सी को भी कविता के बारे में सोचना चाहिए। उन्होंने मुक्तक और कुछ दोहों का व्यंग्य भरा पाठ भी किया।
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बीएचयू के महिला अध्ययन एवं विकास केंद्र और सामाजिक विज्ञान संकाय की ओर से आयोजित कविता पाठ की शुरुआत शताक्षी ने स्त्री पीड़ा से की। सदियों से समानता और स्वतंत्रता जैसी के लिए जूझती स्त्री की पीड़ा बताई। पूजा जिनागल ने “बारिश के झरने के साथ झरता है जीवन में अवसाद शीर्षक से कविता पढ़ी। पूजा कुमारी ने मौलिकता, वे मुझसे अच्छा रो लेते हैं कविता का पाठ किया। पूजा यादव ने “कवि की रुलाई, युद्ध और स्त्री, आखिरी बार मिलना” का पाठ किया। प्रो. नीरज खरे ने “इन दिनों, चरखारीवाली महतिन का कच्चा घर और इमोजी संवाद” जैसी कविताएं पढ़ी। शिव कुमार पराग ने वागर्थ के जुलाई अंक में प्रकाशित अपनी कुछ गीतों और भोजपुरी गजलों का पाठ किया। प्रो. बलिराज पांडेय ने रुपये की महत्ता, मणिपुर, बुलडोजर, अन्ना तुम खलनायक हो जैसी कविताओं का पाठ किया।
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