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छठ पर दिल को सुकून दे रहे हैं नये गाने, सोशल मीडिया पर छा गए हैं वीडियो

Mon, 23 Oct 2017 04:53 PM IST
टीम डिजिटल,वाराणसी
टीम डिजिटल,वाराणसी Updated Mon, 23 Oct 2017 04:53 PM IST
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वाराणसी में छठ

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दिपावली के बाद अब लोक आस्था का महापर्व छठ आ गया है। ऐसे में हर तरफ छठ का असर नजर आ रहा है। चारों ओर छठ के पूजा के गूंज रहे सुमधुर गीतों से छठ पूजा का उत्साह छलक रहा है। बनारस छठी माई के गीतों से गुलजार हो उठा है। केरवा जे फ रेला घवद से/ ओह पर सुगा मेडराय.., आदित लिहो मोर अरघिया, दरस देखाव ए दीनानाथ...। उगिहैं सुरुजदेव...। हे छठी मइया तोहार महिमा अपार... कांचहिं बांस के बहंगिया बहंगी लचकत जाय... जैसे छठ गीतों से गली-चौबारे गूंजने लगे हैं।

घर हो या बाजार हो ऑटो हो या बस हो हर जगह छठ के गीत लोग बजा रहे हैं। छठ गीतों के वीडियो ने सोशल मीडिया में धमाल मचा रखा है। छठ पर घर आने के संदेश के साथ गीतों के वीडियो लोग शेयर कर रहे हैं।
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यूट्यूब और एप पर भी छठ गीतों की शृंखलाएं उपलब्ध हैं। इस बार शारदा सिन्हा, देवी, मालिनी अवस्थी, कल्पना, मनोज तिवारी, पवन सिंह, छैला बिहारी, अजीत कुमार अकेला आदि कलाकारों की स्वरलहरियों से सजे गीतों की मांग अधिक है।
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शारदा सिन्हा, अनुराधा पौडवाल एवं कल्पना के गीत आनलाइन भी उपलब्ध हैं। उनकी सीडी, डीवीडी भी बिक रही है।

भोजपुरी नहीं आती फिर भी छठ गीत पसंद

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शारदा सिन्हा - फोटो : facebook
आधुनिकता के दौर में भी छठ पूजन के इन पारंपरिक गीतों की लोकप्रियता में तनिक भी कमी नहीं आई है। लोक आस्था के महापर्व छठ के गीतों का अपना अलग बाजार है और अपनी अलग लोकप्रियता। इस बार भी कई कलाकारों ने छठी माई के गीतों की सीडी बाजार में उतारी है।

जानी-मानी लोक गायिका पद्मश्री शारदा सिन्हा कहती हैं कि छठ गीतों की पारंपरिक धुन इतनी मधुर है कि जिसे भोजपुरी बोली समझ में न आती हो तो भी उसे गीत सुंदर लगता है। यही कारण है कि इस पारंपरिक धुन का इस्तेमाल सैकड़ों गीतों में हुआ है।

छठ की परंपरा बहुत पुरानी है और इस पर्व को बहुत पवित्रता से मनाया जाता है। इस पर्व के गीतों में भी शुद्धता और सात्विकता की जरूरत है। हमारी संस्कृति को बनाए रखने के लिए ऐसी धुनें बनाने वालों, इन्हें श्रद्धा से गाने वालों और पूरे मन से सुनने वालों की जरूरत है। 
 
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