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Varanasi News: शैक्षणिक सुधार के लिए बीएचयू में हो सकते हैं डीन के तीन पद
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बीएचयू में शैक्षणिक सुधार के लिए डीन के तीन नए पद बनाए जा सकते हैं। प्रशासनिक सुधार के लिए गठित समिति ने डीन के शैक्षणिक, अनुसंधान एवं विकास और प्रौद्योगिक एवं डिजिटल लर्निंग के तीन नए पद बनाने की सिफारिश की है। साथ ही ऐसी गतिविधियों और इकाइयों की समीक्षा करने को कहा है जो विश्वविद्यालय की मूल गतिविधियों व कार्यों में योगदान नहीं दे रही हैं। कुलपति प्रो. सुधीर कुमार जैन ने अधिकारियों की एक समिति गठित की थी, जिसे बीएचयू की कार्यकुशलता बढ़ाने के लिए व्यवस्थागत चुनौतियों के समाधान की सिफारिशें देने थीं। पूर्व सचिव पवन अग्रवाल की अध्यक्षता वाली समिति ने बुधवार को कुलपति को रिपोर्ट सौंपी। कामकाज में कुशलता, जवाबदेही, पारदर्शिता और सेवाएं प्रदान करने के लिए समिति ने कुल 64 सिफारिशें की हैं। समिति द्वारा कामकाज में परामर्श दृष्टिकोण अपनाने तथा प्रभावी निगरानी व्यवस्था स्थापित करने की बात कही गई है, जिसमें साप्ताहिक रूप से आंतरिक निगरानी तथा मासिक रूप से वाह्य निगरानी की जाए।
समिति ने महसूस किया कि प्रशासन में कई जगह दोहरापन है, जिनसे निर्णय लेने में देरी होती है। सुझाव दिया कि सूचना का केंद्रीय स्तर पर प्रबंधन हो, ताकि विलंब व त्रुटियों से निपटा जा सके। समिति की प्रमुख सिफारिशों में आधुनिक प्रबंधन तरीकों के इस्तेमाल, आईटी प्रक्रियाओं व व्यवस्था के क्रियान्वयन, डिजिटल लर्निंग, लाइब्रेरी और आईटी सुरक्षा शामिल है। सुझाव दिया कि इस दिशा में आवश्यकतानुसार निवेश करना चाहिए। समिति में पूर्व उप नियंत्रक व महालेखा परीक्षक पराग प्रकाश तथा पूर्व संयुक्त सचिव आरडी सहाय सदस्य थे। पूर्व संयुक्त कुलसचिव डॉ. सुनीता चंद्रा को सचिव बनाया गया था। कुलपति प्रो. सुधीर कुमार जैन ने विश्वविद्यालय परिवार का आह्वान किया कि वे अपनी प्राथमिकताएं तय करें और संस्थान को शिखर पर ले जाने की दिशा में योगदान दें।
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शैक्षणिक यात्राओं का दिया है सुझाव
समिति ने कर्मियों को अधिक कुशल बनाने और कार्य के प्रति जिम्मेदारी के लिए क्षमता निर्माण गतिविधियों की वकालत की। कहा कि लिपिकीय कर्मियों के कौशल निर्माण के लिए प्रशिक्षण व उत्साहवर्धन की व्यवस्था होनी चाहिए। साथ ही शैक्षणिक व प्रशासनिक कर्मियों के लिए बाहरी संस्थानों में जाकर कामकाज के उत्तम तरीके सीखने के लिए शैक्षणिक यात्राओं का भी सुझाव दिया। बजट निर्माण को व्यवस्थित और व्यय में सतर्कता के साथ ही संसाधन जुटाने की सलाह दी गई है।
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नहीं हो रहा है अनुसंधान क्षमता का भरपूर उपयोग
समिति की रिपोर्ट के अनुसार विश्वविद्यालय में अनुसंधान क्षमता का भरपूर उपयोग नहीं हो पा रहा है। विविध विशेषज्ञता और संसाधनों का प्रयोग जटिल समस्याओं के नए व खोजपरक समाधान के लिए होना चाहिए। विश्वविद्यालय को अपने विशाल पुरा छात्र नेटवर्क से बेहतर ढंग से जुड़ना होगा। साथ ही सामुदायिक हित की गतिविधियों को बढ़ाना होगा। विद्यार्थियों के पठन अनुभव को बेहतर बनाने, प्लेसमेंट व्यवस्था को अधिक प्रभावी करने का सुझाव दिया गया है।
हर विभाग को देखा और मांगे सुझाव
प्रशासनिक सुधार समिति ने विश्वविद्यालय के सभी विभागों, इकाइयों और केंद्रों में व्यापक व विस्तृत चर्चा की। चुनौतियों व समस्याओं को लेकर सुझाव व संभावित समाधान लिए। समिति के सदस्यों ने सभी संस्थानों, संकायों, कार्यालयों तथा दक्षिणी परिसर का दौरा किया।