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बनारस में एक भी बांग्लादेशी की नहीं हो पाई तस्दीक, CM योगी ने दिया था सर्वे का निर्देश
amarujala.com- Written by: पुष्पेन्द्र कुमार त्रिपाठी
Updated Thu, 02 Nov 2017 03:55 PM IST
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
- फोटो : amar ujala
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर कराए गए सर्वे में 15 हजार से अधिक बांग्लादेशियों के अवैध तरीके से बनारस में रहने की आशंका के बावजूद पुलिस एक भी ऐसे व्यक्ति की तस्दीक नहीं कर पाया है।
जिन डेढ़ दर्जन चिह्नित इलाकों में सर्वे कराया गया, वहां के बाशिंदों के पास मतदाता परिचय पत्र, राशन कार्ड और आधार कार्ड जैसे अहम दस्तावेज देख खुफिया इकाई के अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए उनकी मूल नागरिकता तय कर पाना मुश्किल हो गया। इन्होंने न सिर्फ भारतीय नागरिकता के दावे किए बल्कि बोली-भाषा से जुड़े सवालों पर जवाब दिया कि हम बांग्लादेशी नहीं बांग्लाभाषी है सर... कितनी बार हमारा वेरिफिकेशन होगा...।
खुफिया इकाइयों के पूर्व के अनुमान के अनुसार शहर और इससे सटे इलाकों में 15 हजार से अधिक बांग्लादेशी नागरिक अवैध तरीके से रहकर रिक्शा चलाने, मजदूरी, घरेलू नौकर के साथ ही होटलों-ढाबों, ठेले-खोमचों पर काम करते हैं। इनमें से कई बस्तियों का कुछ वर्षों पहले तक नामोनिशान नहीं था।
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15 अक्तूबर को वीडियो कांफ्रेंसिंग में सीएम के निर्देश के आधार पर भेलूपुर के बजरडीहा, खोजवा, लंका के नगवां, दशाश्वमेध, कोतवाली, जैतपुरा, आदमपुर, रामनगर के सूजाबाद, नगर निगम पुलिस चौकी क्षेत्र, कैंट रेलवे स्टेशन के आसपास, वरुणा पार की प्रेमचंद नगर कॉलोनी और आवास विकास कॉलोनी के साथ ही शहर के बाहरी इलाकोें की झोपड़ पट्टियों में सर्वे कराया गया। जहां-जहां सर्वे किया गया है,
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जिन डेढ़ दर्जन चिह्नित इलाकों में सर्वे कराया गया, वहां के बाशिंदों के पास मतदाता परिचय पत्र, राशन कार्ड और आधार कार्ड जैसे अहम दस्तावेज देख खुफिया इकाई के अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए उनकी मूल नागरिकता तय कर पाना मुश्किल हो गया। इन्होंने न सिर्फ भारतीय नागरिकता के दावे किए बल्कि बोली-भाषा से जुड़े सवालों पर जवाब दिया कि हम बांग्लादेशी नहीं बांग्लाभाषी है सर... कितनी बार हमारा वेरिफिकेशन होगा...।
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खुफिया इकाइयों के पूर्व के अनुमान के अनुसार शहर और इससे सटे इलाकों में 15 हजार से अधिक बांग्लादेशी नागरिक अवैध तरीके से रहकर रिक्शा चलाने, मजदूरी, घरेलू नौकर के साथ ही होटलों-ढाबों, ठेले-खोमचों पर काम करते हैं। इनमें से कई बस्तियों का कुछ वर्षों पहले तक नामोनिशान नहीं था।
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15 अक्तूबर को वीडियो कांफ्रेंसिंग में सीएम के निर्देश के आधार पर भेलूपुर के बजरडीहा, खोजवा, लंका के नगवां, दशाश्वमेध, कोतवाली, जैतपुरा, आदमपुर, रामनगर के सूजाबाद, नगर निगम पुलिस चौकी क्षेत्र, कैंट रेलवे स्टेशन के आसपास, वरुणा पार की प्रेमचंद नगर कॉलोनी और आवास विकास कॉलोनी के साथ ही शहर के बाहरी इलाकोें की झोपड़ पट्टियों में सर्वे कराया गया। जहां-जहां सर्वे किया गया है,
यहां भी सब वोट का खेल!
यूपी100
- फोटो : amar ujala
वोट के चक्कर में स्थानीय नेताओं ने ही बांग्लादेशी नागरिकों का पहले राशनकार्ड बनवाया और फिर राजनीतिक रसूख का इस्तेमाल कर उनका मतदाता परिचय पत्र और आधार कार्ड भी बनवा दिया। ऐसी जानकारी पुलिस-प्रशासन को मिली है। इससे संवेदनशील शहर की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
खुद को पश्चिम बंगाल का बताया
जिन पर भी बांग्लादेशी नागरिक होने का शक है, वो खुद को बांग्लादेश की सीमा से सटे पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद, मालदा, नादिया, उत्तरी 24 परगना, रायगंज और जलपाईगुड़ी जिले का मूल निवासी बताते हैं। सूत्रों के मुताबिक सत्यापन के लिए पश्चिम बंगाल पुलिस बांग्ला भाषा में विवरण उपलब्ध कराने को कहती है, इससे दिक्कतें आती हैं।
एडीजी जोन बी महापात्रा ने कहा कि बांग्लादेशी नागरिकों को चिह्नित करने के लिए हुए सर्वे में पेश किए गए दस्तावेजों का सत्यापन कराने के बाद रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी।