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... तो खत्म हो जाएगी निजी और सरकारी स्कूलों के बीच की खाई
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बेसिक स्कूलों में शैक्षिक विकास के लिए निजी स्कूल मददगार साबित होंगे। निजी स्कूलों को आसपास के सरकारी स्कूलों में शिक्षा के तौर तरीके साझा करने होंगे। दोनों स्कूलों के बच्चों में समानता लाने के उद्देश्य से यह पहल की गई है। पहले भी कान्वेंट स्कूलों से सरकारी स्कूलों के छात्रों की प्रतियोगिता कराने की पहल हो चुकी है। अब इसे विस्तृत तौर पर शुरू करने की पहल की जा रही है।
बेसिक स्तर पर निजी और सरकारी स्कूलों के बीच बंटी स्कूली शिक्षा को अब एक जैसा स्वरूप देने की बड़ी पहल होगी। इसमें निजी और सरकारी स्कूल अब एक साथ मिलकर स्कूली शिक्षा को नई ऊंचाई पर ले जाएंगे। इस पहल के जरिए दोनों स्कूल एक दूसरे के संसाधनों का भी इस्तेमाल कर सकेंगे। नए शैक्षिक सत्र में प्रत्येक निजी स्कूल को अपने आसपास के कम से कम एक सरकारी स्कूल के साथ जुड़ाव रखना होगा। स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता को मजबूती देने के साथ निजी व सरकारी स्कूलों के बीच की खाई को पाटने के लिए यह पहल होगी। इसे 2023 तक पूरी तरह से अमल में लाने का लक्ष्य तय किया है। वर्तमान में निजी और सरकारी स्कूलों के बीच बड़ा अंतर दिखता है, जबकि सभी में एक जैसा कोर्स पढ़ाया जाता है।
खेलकूद को भी मिलेगा बढ़ावा
जिले के कुछ सरकारी स्कूलों में प्रयोगशाला, पुस्तकालय की सुविधाएं नहीं हैं। ऐसे में सरकार ने निजी और सरकारी स्कूलों के बीच जुड़ाव बढ़ाने की पहल की है। नई व्यवस्था के तहत निजी स्कूल खेलकूद जैसी गतिविधियों के लिए सरकारी स्कूलों के खेल मैदान आदि का इस्तेमाल कर सकेेंगे।
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प्रतियोगिताओं के साथ होंगी गतिविधियां
बच्चों का भविष्य संवारने के लिए निजी व सरकारी स्कूलों के छात्रों के बीच प्रतियोगिताएं होंगी। इसके साथ ही अलग-अलग गतिविधियों के जरिए स्कूल अपनी अच्छी पहल हो एक दूसरे से साझा करेंगे। बच्चे भी एक-दूसरे के परिसरों व प्रयोगशालाओं का भ्रमण करेंगे।
सरकारी स्कूलों में बेहतर माहौल बनाने के लिए कई तरह के नवाचार किए जा रहे हैं। नए सत्र से शैक्षिक विकास के लिए बड़े स्तर पर अभियान चलाया जाएगा। जिसमें सरकारी स्कूल और निजी स्कूल मिलकर बच्चों के व्यक्तित्व विकास करेंगे।- राकेश सिंह, बीएसए
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बेसिक स्तर पर निजी और सरकारी स्कूलों के बीच बंटी स्कूली शिक्षा को अब एक जैसा स्वरूप देने की बड़ी पहल होगी। इसमें निजी और सरकारी स्कूल अब एक साथ मिलकर स्कूली शिक्षा को नई ऊंचाई पर ले जाएंगे। इस पहल के जरिए दोनों स्कूल एक दूसरे के संसाधनों का भी इस्तेमाल कर सकेंगे। नए शैक्षिक सत्र में प्रत्येक निजी स्कूल को अपने आसपास के कम से कम एक सरकारी स्कूल के साथ जुड़ाव रखना होगा। स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता को मजबूती देने के साथ निजी व सरकारी स्कूलों के बीच की खाई को पाटने के लिए यह पहल होगी। इसे 2023 तक पूरी तरह से अमल में लाने का लक्ष्य तय किया है। वर्तमान में निजी और सरकारी स्कूलों के बीच बड़ा अंतर दिखता है, जबकि सभी में एक जैसा कोर्स पढ़ाया जाता है।
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खेलकूद को भी मिलेगा बढ़ावा
जिले के कुछ सरकारी स्कूलों में प्रयोगशाला, पुस्तकालय की सुविधाएं नहीं हैं। ऐसे में सरकार ने निजी और सरकारी स्कूलों के बीच जुड़ाव बढ़ाने की पहल की है। नई व्यवस्था के तहत निजी स्कूल खेलकूद जैसी गतिविधियों के लिए सरकारी स्कूलों के खेल मैदान आदि का इस्तेमाल कर सकेेंगे।
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प्रतियोगिताओं के साथ होंगी गतिविधियां
बच्चों का भविष्य संवारने के लिए निजी व सरकारी स्कूलों के छात्रों के बीच प्रतियोगिताएं होंगी। इसके साथ ही अलग-अलग गतिविधियों के जरिए स्कूल अपनी अच्छी पहल हो एक दूसरे से साझा करेंगे। बच्चे भी एक-दूसरे के परिसरों व प्रयोगशालाओं का भ्रमण करेंगे।
सरकारी स्कूलों में बेहतर माहौल बनाने के लिए कई तरह के नवाचार किए जा रहे हैं। नए सत्र से शैक्षिक विकास के लिए बड़े स्तर पर अभियान चलाया जाएगा। जिसमें सरकारी स्कूल और निजी स्कूल मिलकर बच्चों के व्यक्तित्व विकास करेंगे।- राकेश सिंह, बीएसए