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योग से काशी का रिश्ता: यहीं से विश्व को मिला ज्ञान, 196 मुद्राओं वाले सूत्र की भी हुई रचना, पढ़ें- खास बातें
Thu, 20 Jun 2024 04:46 PM IST
अमन विश्वकर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी
Published by: अमन विश्वकर्मा
Updated Thu, 20 Jun 2024 04:46 PM IST
सार
Varanasi News: योग के जनक महर्षि पतंजलि ने शरीर की शुद्धि के साथ ही मन को शक्तिशाली बनाने पर जोर दिया। इसमें उन्होंने अष्टांग योग को शामिल किया। योग को टुकड़ों में बांटकर उन्होंने इसे आम लोगों तक पहुंचाया। इसमें यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधि को शामिल किया।
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पंचगंगा घाट पर योग करतीं पीलिकोठी क्षेत्र की रहने वाली रुचि तिवारी।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
दुनिया भर में आज योग जन-जन तक पहुंच रहा है। इसका पूरा श्रेय काशी को ही जाता है। काशी की धरती पर ही दुनिया के पहले योग गुरु महर्षि पतंजलि ने योगसूत्र की रचना की थी। महर्षि पतंजलि के योगसूत्र में 196 योग मुद्राएं शामिल हैं।
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महर्षि पतंजलि ने योग को 196 सूत्रों में बांटकर आमजन के लिए सहज बनाया। योग के जनक महर्षि पतंजलि को शेषनाग का अवतार कहा जाता है। काशी विद्वत परिषद के महामंत्री प्रो. रामनारायण द्विवेदी ने बताया कि महर्षि पतंजलि ने योग शास्त्र और महाभाष्य की रचना की।
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अष्टाध्यायी के अलावा योग को जन-जन तक पहुंचाने का पूरा श्रेय उनको जाता है। वेद और पुराणों के अनुसार महर्षि पतंजलि से पहले भी योग का चलन था लेकिन महर्षि पतंजलि ने इसे धर्म और अंधविश्वास से बाहर निकालकर जनमानस के अनुसार 196 सूत्रों में बांटकर योगसूत्र रचा।
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योग को ध्यान के साथ भी जोड़ा ताकि शरीर के साथ ही मन भी शक्तिशाली हो। 12वीं से 19वीं शताब्दी के बीच योग भारतीय जनमानस के बीच से लुप्त सा हो गया था। सात सौ सालों तक चलन से बाहर रहने के बाद 19वीं सदी में योग बड़ी तेजी से लौटा। इसका पूरा श्रेय स्वामी विवेकानंद को जाता है।