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Varanasi News: 35 मिनट चला राम और रावण का युद्ध, भीड़ बेकाबू देख 10 मिनट पहले दशानन का पुतला किया दहन
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गाजीपुर। जिले में विजय दशमी का पर्व शनिवार को परंपरागत तरीके से मनाया गया। शहर के लंका मैदान और बाहर एक लाख लोगों की भीड़ जुट गई। बाहर और मैदान में एक लाख की भीड़ बेकाबू होती देख प्रशासन के हाथ-पांव फूलने लगे। अंतत: स्थिति यह हुई कि 35 मिनट चले युद्ध के बाद प्रशासन ने समिति से अनुरोध करते हुए निर्धारित समय से दस मिनट पहले ही दशानन पुतला दहन कराने को कहा और वे तैयार हो गए। परंपरानुसार डीएम-एसपी ने बटन दबाकर बुराई के प्रतीक रावण के पुतले का दहन किया।
पुतला दहन होते ही उपस्थित लोग जय श्रीराम का जयकार करने लगे। वहीं, ग्रामीण क्षेत्रों में भी रावण के पुतले का दहन किया गया। इस दौरान कई जगहों पर मेले का भी आयोजन किया गया था। सुरक्षा के मद्देनजर पुख्ता इंतजाम किए गए थे।
मेला देखने के लिए दोपहर बाद से लोगों का घरों से निकलने का क्रम शुरू हो गया था। भीड़ अनुमान लगाते हुए पुलिस ने लंका मैदान के दो गेटों को बंद करा दिया था। शाम चार बजे सभी गेट खोल दिए गए। शाम छह बजे तक मैदान खचाखच भर गया था। दशानन का 60 फीट ऊंचा पुतला लोगों के आकर्षण का केंद्र बना था। रावण दहन का समय नजदीक आते ही लोगों में पुतले के पास जाने की होड़ मच गई थी। रामलीला कमेटी के मंत्री ओमप्रकाश तिवारी उर्फ बच्चा लोगों से धैर्य रखने की अपील करते रहे। रात सात बजे बाजे-गाजे के साथ भगवान श्रीराम लक्ष्मण के साथ रावण के पुतले के पास पहुंचे। इसके बाद सवा सात बजे राम और रावण युद्ध प्रारंभ हुआ। दोनों तरफ से तीर की बौछार शुरु हो गई। करीब 35 मिनट तक चले युद्ध के बाद भगवान राम ने रावण का वध कर दिया। भगवान राम के साथ मंच पर परिवार समेत मौजूद डीएम आर्यका अखौरी और एसपी डा. ईरज राजा ने शाम 7.50 आठ बजे बटन दबाकर रावण के विशाल पुतले को आग के हवाले किया। इसी तरह मुहम्मदाबाद, जमानिया, औड़िहार, भीमापार, सादात, कासिमाबाद, खानपुर, मरदह, करंडा, भांवरकोल, करीमुद्दीनपुर, बहादुरगंज, दुबिहा, दुल्लहपुर, बिरनो, जंगीपुर, शादियाबाद, बहरियाबाद, देवकली, सिधागरघाट, नंदगंज, सेवराई, बारा आदि ग्रामीण क्षेत्रों में मेले का आयोजन किया गया था।
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पुतला दहन होते ही उपस्थित लोग जय श्रीराम का जयकार करने लगे। वहीं, ग्रामीण क्षेत्रों में भी रावण के पुतले का दहन किया गया। इस दौरान कई जगहों पर मेले का भी आयोजन किया गया था। सुरक्षा के मद्देनजर पुख्ता इंतजाम किए गए थे।
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मेला देखने के लिए दोपहर बाद से लोगों का घरों से निकलने का क्रम शुरू हो गया था। भीड़ अनुमान लगाते हुए पुलिस ने लंका मैदान के दो गेटों को बंद करा दिया था। शाम चार बजे सभी गेट खोल दिए गए। शाम छह बजे तक मैदान खचाखच भर गया था। दशानन का 60 फीट ऊंचा पुतला लोगों के आकर्षण का केंद्र बना था। रावण दहन का समय नजदीक आते ही लोगों में पुतले के पास जाने की होड़ मच गई थी। रामलीला कमेटी के मंत्री ओमप्रकाश तिवारी उर्फ बच्चा लोगों से धैर्य रखने की अपील करते रहे। रात सात बजे बाजे-गाजे के साथ भगवान श्रीराम लक्ष्मण के साथ रावण के पुतले के पास पहुंचे। इसके बाद सवा सात बजे राम और रावण युद्ध प्रारंभ हुआ। दोनों तरफ से तीर की बौछार शुरु हो गई। करीब 35 मिनट तक चले युद्ध के बाद भगवान राम ने रावण का वध कर दिया। भगवान राम के साथ मंच पर परिवार समेत मौजूद डीएम आर्यका अखौरी और एसपी डा. ईरज राजा ने शाम 7.50 आठ बजे बटन दबाकर रावण के विशाल पुतले को आग के हवाले किया। इसी तरह मुहम्मदाबाद, जमानिया, औड़िहार, भीमापार, सादात, कासिमाबाद, खानपुर, मरदह, करंडा, भांवरकोल, करीमुद्दीनपुर, बहादुरगंज, दुबिहा, दुल्लहपुर, बिरनो, जंगीपुर, शादियाबाद, बहरियाबाद, देवकली, सिधागरघाट, नंदगंज, सेवराई, बारा आदि ग्रामीण क्षेत्रों में मेले का आयोजन किया गया था।
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