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नेत्र चिकित्सा में मशीनी उपकरणों का उपयोग महत्वपूर्ण
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यूपी राज्य आप्थोमोलोजिकल सोसाइटी के 55वें वार्षिक हाइब्रिड कॉन्फ्रेंस के दूसरे दिन शनिवार को स्वतंत्रता भवन में नेत्र रोग के उपचार की विभिन्न विधियों पर वक्ताओं ने चर्चा की। उद्घाटन समारोह में बीएचयू के प्रभारी वीसी प्रो. वीके शुक्ला ने नेत्र चिकित्सा में हो रहे तकनीकी विकास और मशीनी उपकरणों को महत्वपूर्ण बताया।
समारोह में प्रो. शुक्ला ने कहा कि कैटरेक्ट को 2.3 से 1.3 प्रतिशत तक लाना मुख्य उद्देश्य है। भारत में नेत्र संबंधी सभी बीमारियों को कम करने का लक्ष्य बनाकर बेहतर काम करने की जरूरत है। सरकार नेत्र रोगों के इलाज के लिए प्रयास कर रही है। डॉ. मोहिता शर्मा ने कहा कि पिछले दो साल में कोविड की वजह से कई कार्यों में बदलाव आया है। सोविनियर का विमोचन भी किया गया। विशिष्ट अतिथि पद्मश्री प्रो. एस नटराजन, डॉ. दीपक मिश्र, डॉ. आनंद शर्मा, डॉ. धर्मेंद्र नाथ उपस्थित थे। यूपीएसओएस के निवर्तमान अध्यक्ष प्रो श्रीकांत ने नए अध्यक्ष डॉ. ओपीएस मौर्या को कार्यभार सौंपा। डॉ. अनिल श्रीवास्तव ने नेत्र रोग से संबंधित नई तकनीक के बारे में जानकारी दी। अतिथियों का स्वागत डॉ. आनंद शर्मा, धन्यवाद ज्ञापन डॉ. आरके ओझा और संचालन डॉ. नीलिमा अवस्थी और आरम परवीन ने किया। इस दौरान डॉ. नम्रता शर्मा, डॉ. राजेश सिन्हा, डॉ. अजय अग्रवाल, डॉ. नीरज पांडेय, डॉ. कमलजीत सिंह, डॉ. निभा मिश्रा, डॉ. मनीष टंडन और डॉ. विशाल कटियार ने विचार रखे।
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समारोह में प्रो. शुक्ला ने कहा कि कैटरेक्ट को 2.3 से 1.3 प्रतिशत तक लाना मुख्य उद्देश्य है। भारत में नेत्र संबंधी सभी बीमारियों को कम करने का लक्ष्य बनाकर बेहतर काम करने की जरूरत है। सरकार नेत्र रोगों के इलाज के लिए प्रयास कर रही है। डॉ. मोहिता शर्मा ने कहा कि पिछले दो साल में कोविड की वजह से कई कार्यों में बदलाव आया है। सोविनियर का विमोचन भी किया गया। विशिष्ट अतिथि पद्मश्री प्रो. एस नटराजन, डॉ. दीपक मिश्र, डॉ. आनंद शर्मा, डॉ. धर्मेंद्र नाथ उपस्थित थे। यूपीएसओएस के निवर्तमान अध्यक्ष प्रो श्रीकांत ने नए अध्यक्ष डॉ. ओपीएस मौर्या को कार्यभार सौंपा। डॉ. अनिल श्रीवास्तव ने नेत्र रोग से संबंधित नई तकनीक के बारे में जानकारी दी। अतिथियों का स्वागत डॉ. आनंद शर्मा, धन्यवाद ज्ञापन डॉ. आरके ओझा और संचालन डॉ. नीलिमा अवस्थी और आरम परवीन ने किया। इस दौरान डॉ. नम्रता शर्मा, डॉ. राजेश सिन्हा, डॉ. अजय अग्रवाल, डॉ. नीरज पांडेय, डॉ. कमलजीत सिंह, डॉ. निभा मिश्रा, डॉ. मनीष टंडन और डॉ. विशाल कटियार ने विचार रखे।
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